
स्वचालित जीनोमिक विश्लेषण से दुर्लभ रोगों की पहचान, युवाओं में तेज़ होती जैविक उम्र बढ़ने की चिंता
एक ओपन-सोर्स टूल ने 241 अज्ञात मामलों में आनुवंशिक निदान किया, जबकि वैश्विक अध्ययन बता रहे हैं कि युवा पीढ़ी की जैविक उम्र वास्तविक उम्र से अधिक हो रही है।
ऑस्ट्रेलियाई और अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा विकसित स्वचालित प्रणाली ‘टैलोस’ ने दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों के निदान में एक नया रास्ता खोला है। नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस ओपन-सोर्स टूल ने 4,735 ऐसे बच्चों और वयस्कों के जीनोमिक डेटा का पुनर्विश्लेषण किया जो प्रारंभिक परीक्षण के बाद भी बिना निदान के थे। टैलोस ने 241 नए निदान खोजे, जिनमें से कई संबंधित जीन-रोग खोज के प्रकाशित होने के मात्र 32 दिनों के भीतर सामने आए। मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट और गारवन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं का कहना है कि मानव विश्लेषकों के लिए हजारों मरीजों के डेटा की बार-बार मैन्युअल जांच कर पाना असंभव है, जबकि यह प्रणाली तेज़ और सस्ती साबित हुई।
यह तकनीकी प्रगति ऐसे समय में आई है जब एक वैश्विक अध्ययन ने युवा पीढ़ी में आंतरिक उम्र बढ़ने की गति को लेकर चिंता जताई है। 1,60,000 से अधिक लोगों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि युवा वयस्कों की जैविक उम्र उनकी कालानुक्रमिक उम्र से अधिक हो रही है, जिसमें सूजन और कोशिकीय क्षति के चिह्न अधिक दिख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के सनशाइन कोस्ट विश्वविद्यालय के डॉ. लोक्लान फेनेल के अनुसार, यह इस बात का एक और सुराग हो सकता है कि क्यों युवाओं में पारंपरिक रूप से अधिक उम्र में होने वाले कैंसर, जैसे आंत्र कैंसर, का निदान बढ़ रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मोटापा, माइक्रोप्लास्टिक और जीवनशैली में बदलाव जैसे कारक इस त्वरित उम्र बढ़ने के संभावित माध्यम हो सकते हैं, लेकिन अभी पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है।
जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों की भूमिका अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी रेखांकित कर रहे हैं। इंडोनेशिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि धूप में असुरक्षित रहना, असंतुलित आहार, धूम्रपान और तेज़ी से वज़न घटाना त्वचा की लोच को कम कर सकता है और समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण ला सकता है। लेबनान के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. फ्रेडी खौरी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि त्वचा कैंसर, विशेषकर मेलानोमा, का ख़तरा गोरी त्वचा वालों में अधिक होता है, लेकिन सांवली त्वचा वाले भी इससे अछूते नहीं हैं। वे वार्षिक त्वचा जांच और मस्सों में किसी भी बदलाव की निगरानी को अनिवार्य बताते हैं। स्पेन के दीर्घायु विशेषज्ञ डेविड सेस्पेडेस एक अलग आयाम जोड़ते हैं: मस्तिष्क नये अनुभवों की कमी होने पर समय को संक्षिप्त कर देता है, जिससे उम्र बढ़ने का अहसास तेज़ होता है। टोरंटो विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार, छोटे-छोटे नए अनुभव भी स्मृति और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
इन सबके बीच, भविष्य का रास्ता शीघ्र पहचान और रोकथाम के संयोजन में दिखता है। ऑस्ट्रेलियाई चिकित्सक इस संभावना पर विचार कर रहे हैं कि कैंसर जांच केवल उम्र गिनने के बजाय जैविक उम्र मापने पर केंद्रित हो सकती है। टैलोस जैसे उपकरण यह साबित कर रहे हैं कि जीनोमिक डेटा का स्वचालित पुनर्विश्लेषण उन निदानों को उजागर कर सकता है जो वर्षों से डेटा में छिपे थे। अगला ठोस कदम इन उपकरणों को नियमित नैदानिक प्रणालियों में शामिल करने और जैविक उम्र के मापदंडों को कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों से जोड़ने की दिशा में अनुसंधान को आगे बढ़ाना है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एक वैश्विक अध्ययन से पता चलता है कि युवा पीढ़ी जैविक रूप से तेज़ी से बूढ़ी हो रही है, जो शुरुआती कैंसर के बढ़ते मामलों की व्याख्या कर सकता है। व्यक्तिगत कहानियाँ वास्तविक प्रभाव दिखाती हैं, जैसे एक युवती जिसके आंत के कैंसर के लक्षणों को उम्र के कारण नज़रअंदाज़ कर दिया गया। निष्कर्ष जागरूकता और जल्दी जाँच की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं।
युवाओं में त्वचा का समय से पहले ढीलापन अक्सर धूप में रहने और खराब जीवनशैली जैसी अनदेखी आदतों के कारण होता है। लेख त्वचा की लोच बनाए रखने के लिए व्यावहारिक स्पष्टीकरण और सलाह देता है। यह बिना किसी चिंता के शांत और जानकारीपूर्ण लहज़ा अपनाता है।
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