
जून में महासागरों का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर, अल नीनो से और वृद्धि की आशंका
यूरोपीय जलवायु सेवा कॉपरनिकस के अनुसार जून 2026 में वैश्विक समुद्री सतह का औसत तापमान अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया, जिससे चरम मौसमी घटनाओं और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ने की चेतावनी दी गई है।
21 जून 2026 को वैश्विक महासागरों की सतह का औसत तापमान 20.86 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस तारीख के लिए अब तक का सबसे अधिक है। यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा और कॉपरनिकस समुद्री सेवा के स्वतंत्र आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले रिकॉर्ड वर्षों 2023 और 2024 के स्तर को पार कर गया। समुद्री सेवा ने तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस मापा, जो पूर्व रिकॉर्ड से 0.1 डिग्री अधिक था। यह वृद्धि केवल एक दिन का आंकड़ा नहीं है; जून का पूरा महीना अब तक का सबसे गर्म जून रहा, और वर्ष 2026 की पहली छमाही दूसरी सबसे गर्म अर्धवार्षिकी के रूप में दर्ज हुई।
इस रिकॉर्ड के पीछे दो प्रमुख कारक हैं: दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन और इस वर्ष जून में शुरू हुआ अल नीनो मौसम पैटर्न। महासागर मानव गतिविधियों से उत्पन्न अतिरिक्त ऊष्मा का लगभग 90 प्रतिशत अवशोषित करते हैं, जिससे उनका तापमान लगातार बढ़ रहा है। अल नीनो, जो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की प्राकृतिक घटना है, इस अंतर्निहित गर्मी को और बढ़ा देता है। कॉपरनिकस के निदेशक कार्लो बुओंटेम्पो ने कहा कि वर्तमान स्थितियाँ एक नए चरण की शुरुआत का संकेत दे सकती हैं, जो हमें अनजाने क्षेत्र में ले जाएगी। मर्केटर ओशन इंटरनेशनल के समुद्र विज्ञानी साइमन वान गेनिप के अनुसार, अल नीनो वर्ष की शुरुआत के साथ 2026 के अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शामिल होने की उम्मीद है।
बढ़ते समुद्री तापमान के प्रभाव व्यापक हैं। गर्म पानी वायुमंडल को अधिक समय तक गर्म रखता है और अधिक ऊर्जा संचित करता है, जिससे चरम तूफानों, भारी वर्षा और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। वर्ष की पहली छमाही में वैश्विक महासागरों के 82 प्रतिशत हिस्से ने समुद्री ऊष्मा लहरों का अनुभव किया, और लगभग आधी सतह पर ये लहरें तीव्र से चरम श्रेणी की थीं। भूमध्य सागर में जून का औसत तापमान 24.34 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, और इसकी 98 प्रतिशत सतह ऊष्मा लहरों से प्रभावित रही। उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर ने भी अपना सबसे गर्म जून दर्ज किया। ये समुद्री ऊष्मा लहरें प्रवाल विरंजन, समुद्री जीवों की सामूहिक मृत्यु और मत्स्य पालन को नुकसान पहुँचाती हैं।
दक्षिण एशिया के लिए, अल नीनो ऐतिहासिक रूप से मानसून पैटर्न को बाधित करता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में सूखे या बाढ़ की आशंका बढ़ जाती है। गर्म हिंद महासागर चक्रवातों की तीव्रता को बढ़ा सकता है, जो तटीय क्षेत्रों के लिए खतरा है। हालाँकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस वर्ष मानसून पर कितना प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि अल नीनो की तीव्रता और अवधि अभी स्पष्ट नहीं है। मौसम विज्ञान एजेंसियों के पूर्वानुमान संकेत देते हैं कि यह अल नीनो दशकों में न देखी गई तीव्रता तक पहुँच सकता है।
आगे की राह: कॉपरनिकस के मौसमी पूर्वानुमानों के अनुसार, आने वाले महीनों में समुद्र और वायुमंडल दोनों में और तापमान रिकॉर्ड टूटने की संभावना है। अगला ध्यान देने योग्य मील का पत्थर अल नीनो की प्रगति और वैश्विक औसत तापमान पर इसका प्रभाव होगा, जिससे 2026 के सबसे गर्म वर्षों में से एक बनने की भविष्यवाणी को बल मिलेगा। भारतीय मौसम विभाग और विश्व मौसम संगठन के आगामी अपडेट इस दिशा में और स्पष्टता प्रदान करेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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भूमध्य सागर उबल रहा है, समुद्र की सतह का तापमान ऐतिहासिक औसत से छह डिग्री अधिक है। अल नीनो के आगमन से स्थिति और बिगड़ेगी, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को अपरिवर्तनीय क्षति से बचाने के लिए तत्काल अनुकूलन आवश्यक हो जाएगा।
वैश्विक औसत महासागर तापमान ने जून में एक नया रिकॉर्ड बनाया, जो 2023 और 2024 के स्तरों को पार कर गया। यूरोपीय कोपरनिकस वेधशाला इसका कारण अल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग के संयोजन को बताती है, और आने वाले महीनों में और वृद्धि की भविष्यवाणी करती है।
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