
किम जोंग उन ने शी को भेजे संदेश में चीन-उत्तर कोरिया संबंधों को मजबूत करने का संकल्प दोहराया
प्योंगयांग शिखर वार्ता के बाद भेजे गए बधाई संदेश में किम ने द्विपक्षीय संबंधों को 'साझा संपदा' बताते हुए सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 105वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भेजे एक संदेश में द्विपक्षीय संबंधों को लगातार विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। सरकारी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, किम ने जून में प्योंगयांग में हुई दुर्लभ शिखर बैठक को 'ऐतिहासिक अवसर' बताया, जिसने दोनों नेताओं के बीच 'साथी जैसी मित्रता और विश्वास' को गहरा किया। उन्होंने कहा कि समाजवाद को केंद्र में रखकर चीन-डीपीआरके मैत्रीपूर्ण संबंधों का विकास उनकी पार्टी और सरकार का 'अटल रुख' है।
उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के बयानों के अनुसार, प्योंगयांग इस रिश्ते को 'दोनों देशों की जनता की साझा संपदा' मानता है और कूटनीति, कानून प्रवर्तन, सैन्य समन्वय के साथ-साथ आर्थिक, कृषि, विज्ञान और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर जोर देता है। चीनी सरकारी मीडिया ने भी इस शिखर बैठक को पारंपरिक मित्रता को 'सबसे शक्तिशाली और रणनीतिक संबंधों' में बदलने का खाका बताया। हालांकि, रूसी विश्लेषण में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस के साथ सैन्य सहयोग काफी बढ़ाया है, फिर भी चीन उसका सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बना हुआ है।
दक्षिण कोरिया के अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्रालय के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया का लगभग 98 प्रतिशत विदेशी व्यापार चीन के साथ होता है, जो प्योंगयांग की आर्थिक निर्भरता को रेखांकित करता है। इसी संदर्भ में, चीनी पक्ष ने कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने की इच्छा व्यक्त की है, साथ ही प्रतिबंधों की निगरानी में नरमी की वकालत की है। उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु शक्ति की स्थिति को कभी नहीं छोड़ा है, जबकि चीन और अमेरिका पहले इसे साझा लक्ष्य बता चुके हैं।
बीजिंग में आयोजित पार्टी स्थापना दिवस समारोह में शी जिनपिंग ने '1 जुलाई पदक' प्रदान किए और पार्टी की भूमिका को राष्ट्रीय विकास व स्थिरता का केंद्र बताया। विश्लेषकों के अनुसार, यह दोहरा संकेत—एक ओर घरेलू मोर्चे पर पार्टी की एकजुटता, दूसरी ओर प्योंगयांग के साथ रणनीतिक निकटता—चीन की व्यापक क्षेत्रीय नीति को दर्शाता है। फिलहाल, दोनों पक्षों ने संबंधों को और ऊंचाई पर ले जाने की इच्छा जताई है, लेकिन इस दिशा में किसी ठोस अगले कदम की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Kim Jong-un's message confirms the strategic axis with Beijing, strengthening the anti-Western bloc. Russia views this understanding favorably as it stabilizes Asia and challenges American hegemony. The synergy between Pyongyang and Beijing is a pillar for a new multipolar order.
The confirmation of strategic rapprochement between Kim and Beijing is seen as a sign of strength for the axis of resistance. Iran and its allies find a reference point in Sino-North Korean solidarity against Western pressures. This development fuels hope for a united front against American hegemony.
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