
भारत का पासपोर्ट नागरिकता प्रमाण नहीं: सरकारी बयान, न्यायिक आपत्ति और वैश्विक दस्तावेज़ नियमों में बदलाव
भारत के विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को केवल यात्रा दस्तावेज़ बताया, जिससे नागरिकता प्रमाणन पर संवैधानिक बहस छिड़ गई; वहीं अमेरिका और अन्य देशों में पहचान दस्तावेज़ों के नियम सख्त हो रहे हैं।
24 जून 2026 को भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के एक सदस्य ने सार्वजनिक रूप से कहा कि भारतीय पासपोर्ट एक “यात्रा दस्तावेज़” है, “नागरिकता दस्तावेज़” नहीं। इस बयान के तत्काल बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता सिद्ध नहीं करता तो कौन-सा दस्तावेज़ करेगा। पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने इसे पासपोर्ट अधिनियम की “गलत व्याख्या” बताते हुए कहा कि संसद ने जानबूझकर “पासपोर्ट” और “यात्रा दस्तावेज़” को अलग-अलग परिभाषित किया है, इसलिए पासपोर्ट को मात्र यात्रा दस्तावेज़ कहना कानूनी रूप से अस्थिर है। लोकुर के अनुसार, यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जटिलताएँ पैदा कर सकती है क्योंकि विदेशी दूतावास पासपोर्ट धारक को भारतीय नागरिक मानकर ही वीज़ा जारी करते हैं।
भारत सरकार ने अगले दिन स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना गया और यह कोई नया निर्णय नहीं है। मंत्रालय ने 1967 के पासपोर्ट अधिनियम की धारा 20 का हवाला दिया, जो सरकार को सार्वजनिक हित में गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ जारी करने का विवेकाधिकार देती है। साथ ही, 2013 के बंबई उच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख किया गया जिनमें कहा गया कि पासपोर्ट रखने मात्र से नागरिकता स्थापित नहीं होती। विधि विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालय पहले ही आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और यहाँ तक कि बैंक खाते या संपत्ति के स्वामित्व को भी नागरिकता का साक्ष्य नहीं मान चुके हैं। इस पृष्ठभूमि में, नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (2024 में प्रभावी) और असम समझौते पर सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियाँ नागरिकता की परिभाषा को और जटिल बनाती हैं।
वैश्विक स्तर पर पहचान दस्तावेज़ों के नियमों में भी बदलाव देखे जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने 2028 से 38 पृष्ठों वाला एकीकृत पासपोर्ट जारी करने की घोषणा की है, जो वर्तमान 26 और 50 पृष्ठों वाले प्रारूपों की जगह लेगा। साथ ही, अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) के अनुसार, अधिकांश विदेशी यात्रियों के लिए पासपोर्ट की वैधता यात्रा अवधि से कम-से-कम छह माह अधिक होनी चाहिए, हालाँकि अर्जेंटीना, ब्राज़ील, मैक्सिको सहित कई लैटिन अमेरिकी देश इस नियम से छूट प्राप्त हैं। स्पेन में गृह मंत्रालय पासपोर्ट की अंतिम 12 माह की वैधता के दौरान ही नवीनीकरण की अनुमति देता है, जबकि मैक्सिको, कोलंबिया, चिली और पेरू की आव्रजन एजेंसियाँ समाप्त पासपोर्ट पर यात्रा को रोक सकती हैं। इस बीच, भारत के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा को इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री के विज्ञापन तुरंत हटाने का नोटिस दिया है, और एमईए ने विदेश नीति से जुड़े होने का दावा कर भुगतान माँगने वाले सोशल मीडिया हैंडलों के प्रति आगाह किया है।
भारत में नागरिकता प्रमाणन का मसला फिलहाल अनसुलझा है। सरकार का रुख है कि पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज़ है, जबकि संविधान विशेषज्ञ और न्यायपालिका के पूर्व सदस्य इसे नागरिकता का ठोस संकेत मानते हैं। चुनाव आयोग द्वारा विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और नागरिकता की जाँच के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई इस बहस को आगे बढ़ाएगी। अमेरिका में नई पासपोर्ट श्रृंखला 2028 में लॉन्च होने की उम्मीद है, जबकि भारत में सोशल मीडिया धोखाधड़ी के खिलाफ जाँच जारी है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
भारतीय न्यायपालिका और कानूनी विशेषज्ञ सरकार की संकीर्ण व्याख्या को खारिज करते हैं, यह दावा करते हुए कि पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम के तहत नागरिकता से स्वाभाविक रूप से जुड़ा हुआ है।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के अधिकार का आह्वान करके, यह ढांचा सरकार के बयान को संवैधानिक दांव वाली कानूनी त्रुटि के रूप में अवैध ठहराता है, जिससे आलोचना आधिकारिक और गैर-पक्षपातपूर्ण दिखती है।
यात्रा दस्तावेज़ नियमों में बदलते वैश्विक संदर्भ, जो सरकार के व्यावहारिक रुख का समर्थन कर सकता है, पर चर्चा नहीं की गई है।
अमेरिकी और अन्य देशों के अधिकारी पासपोर्ट के लिए सख्त नियम लागू कर रहे हैं, जिन्हें नियमित प्रशासनिक अद्यतन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो दस्तावेज़ के नागरिकता से संबंध के बजाय तकनीकी अनुपालन पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
विशिष्ट राष्ट्रीय नियमों को सार्वभौमिक यात्रा आवश्यकताओं के रूप में प्रस्तुत करके, यह ढांचा प्रतिबंधों को सामान्य बनाता है और पासपोर्ट को राजनीतिक रूप से तटस्थ बनाता है, इसे विशुद्ध रूप से यात्रा उपकरण के रूप में मानता है।
पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में भारतीय बहस पूरी तरह से अनुपस्थित है, जो विशुद्ध प्रशासनिक ढांचे को चुनौती देगी।
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