
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर एथलीटों पर राज्य प्रतिबंधों को बरकरार रखा
न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि जैविक लिंग के आधार पर महिला खेलों में भागीदारी सीमित करना संविधान और नागरिक अधिकार कानून का उल्लंघन नहीं है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इडाहो और वेस्ट वर्जीनिया के उन कानूनों को वैध ठहराया जो ट्रांसजेंडर महिलाओं और लड़कियों को स्कूल-कॉलेज की महिला खेल टीमों में शामिल होने से रोकते हैं। सभी नौ न्यायाधीशों ने माना कि ये प्रतिबंध शिक्षा में लिंग-आधारित भेदभाव को रोकने वाले संघीय कानून टाइटल IX का उल्लंघन नहीं करते, जबकि 6-3 के वैचारिक विभाजन में बहुमत ने यह भी कहा कि ये संविधान के समान संरक्षण खंड के खिलाफ नहीं हैं। इस फैसले से अमेरिका के 25 से अधिक राज्यों में पहले से लागू ऐसे ही कानूनों को कानूनी मजबूती मिली है।
बहुमत की ओर से निर्णय लिखने वाले न्यायाधीश ब्रेट कवानॉ ने तर्क दिया कि टाइटल IX में 'लिंग' शब्द का अर्थ केवल जैविक लिंग है और राज्य सुरक्षा व प्रतिस्पर्धात्मक निष्पक्षता के हित में महिला खेलों को जैविक महिलाओं तक सीमित रख सकते हैं। वहीं, उदारवादी न्यायाधीश सोनिया सोतोमायोर ने असहमति जताते हुए कहा कि अदालत का निर्णय तथ्यों के बजाय मान्यताओं पर आधारित है। ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे "बड़ी जीत" बताया और व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि अब महिला खेल केवल महिलाओं के लिए होंगे। दूसरी ओर, अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (ACLU) और LGBTQ+ अधिकार समूहों ने इसे ट्रांसजेंडर युवाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण कदम बताया।
यह फैसला अमेरिका में ट्रांसजेंडर अधिकारों पर बढ़ते प्रतिबंधों की श्रृंखला का हिस्सा है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने टेनेसी के उस कानून को बरकरार रखा था जो नाबालिगों के लिए लिंग-पुष्टि चिकित्सा पर रोक लगाता है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने कार्यकारी आदेशों के जरिए सेना में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की भर्ती पर प्रतिबंध लगाया और पासपोर्ट में लिंग पहचान बदलने की अनुमति समाप्त की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने मार्च में घोषणा की कि ट्रांसजेंडर महिलाएं महिला ओलंपिक स्पर्धाओं में भाग नहीं ले सकेंगी, और NCAA ने पहले ही इसी तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे।
इडाहो और वेस्ट वर्जीनिया के कानूनों को चुनौती देने वाली ट्रांसजेंडर छात्राओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों का कहना है कि हार्मोन थेरेपी के बाद किसी अनुचित खेल लाभ का कोई वैज्ञानिक सहमति नहीं है और ये प्रतिबंध राजनीति से प्रेरित हैं। हालांकि, रूढ़िवादी राज्यों के विधायकों और खेल संगठनों का मानना है कि जैविक पुरुषों और महिलाओं के बीच शारीरिक अंतर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के लिए अलग श्रेणियों को आवश्यक बनाते हैं। इस फैसले के बाद, जिन राज्यों में अभी ऐसे कानून नहीं हैं, वहां भी इसी तरह के विधेयक लाने का दबाव बढ़ सकता है, जबकि संघीय स्तर पर टाइटल IX की व्याख्या को लेकर आगे कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ
The US Supreme Court ruling is framed through J.K. Rowling's criticism of the BBC, which she accuses of pushing propaganda. The narrative suggests the debate is skewed by an ideology the public overwhelmingly rejects. The ruling is implicitly defended as a common-sense move against activist pressure.
China observes the US Supreme Court ruling with detachment, framing it as another sign of American social polarization. The transgender athlete debate is presented as an internal US matter with no implications for China. The focus is on the instability of the American system, not on the merits of the decision.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुरू: ईरान की शक्ति प्रदर्शन की कोशिश, नए नेतृत्व पर सवाल
7 भाषाएँ · 34 स्रोत
Economy & Markets सेवैश्विक ऑटो बाजार में दोहरी चाल: इंडोनेशिया में नीतिगत अनिश्चितता, ब्राजील और रूस में मजबूत वृद्धि
4 भाषाएँ · 10 स्रोत
Technology सेएंथ्रोपिक की चीनी पहुंच पर रोक के बीच अलीबाबा ने क्लॉड कोड पर प्रतिबंध लगाया
4 भाषाएँ · 4 स्रोत