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ईरान में आंतरिक दरार: राष्ट्रपति का इस्तीफे की धमकी, मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा चिंतास्पेन का सख्त कदम: विदेशी पेंशनभोगियों को अब साल में दो बार देना होगा जीवित प्रमाणजुलाई 2026: जब सिनेमाघरों में गूंजे मिनियंस के ठहाके और जकार्ता में सजी 'एडम्स फैमिली' की संगीतमय शामविंबलडन 2026: सबालेंका-ओसाका की तूफानी जीत, इतालवी लहर पर सबकी निगाहेंचीन ने ताइवान के पूर्वी जल में नई तटरक्षक टुकड़ी तैनात की, पश्चिमी चिंताओं के बावजूद गश्त जारीजर्मनी को पेनल्टी पर हराकर पैराग्वे की ऐतिहासिक छलांग, अब फ्रांस की मजबूत दीवार से सामनाट्रंप ने 250वीं वर्षगांठ पर अमेरिकी पहचान पर 'हमले' की चेतावनी दी, साम्यवाद को सबसे बड़ा खतरा बतायाअमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर पुतिन का ट्रंप को संदेश: परमाणु जिम्मेदारी और ऐतिहासिक गठबंधन का स्मरणईरान में आंतरिक दरार: राष्ट्रपति का इस्तीफे की धमकी, मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा चिंतास्पेन का सख्त कदम: विदेशी पेंशनभोगियों को अब साल में दो बार देना होगा जीवित प्रमाणजुलाई 2026: जब सिनेमाघरों में गूंजे मिनियंस के ठहाके और जकार्ता में सजी 'एडम्स फैमिली' की संगीतमय शामविंबलडन 2026: सबालेंका-ओसाका की तूफानी जीत, इतालवी लहर पर सबकी निगाहेंचीन ने ताइवान के पूर्वी जल में नई तटरक्षक टुकड़ी तैनात की, पश्चिमी चिंताओं के बावजूद गश्त जारीजर्मनी को पेनल्टी पर हराकर पैराग्वे की ऐतिहासिक छलांग, अब फ्रांस की मजबूत दीवार से सामनाट्रंप ने 250वीं वर्षगांठ पर अमेरिकी पहचान पर 'हमले' की चेतावनी दी, साम्यवाद को सबसे बड़ा खतरा बतायाअमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर पुतिन का ट्रंप को संदेश: परमाणु जिम्मेदारी और ऐतिहासिक गठबंधन का स्मरण
भू-राजनीति और राजनीतिशुक्रवार, 3 जुलाई 2026

अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुरू: ईरान की शक्ति प्रदर्शन की कोशिश, नए नेतृत्व पर सवाल

तेहरान में पूर्व सर्वोच्च नेता की अंत्येष्टि में करोड़ों लोगों के जुटने का अनुमान, विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी और मोजतबा ख़ामेनेई की ग़ैरमौजूदगी ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और ईरान के आंतरिक सत्ता समीकरणों पर बहस तेज़ कर दी है।

ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुक्रवार से शुरू हुआ, जिनकी मृत्यु 28 फ़रवरी को अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में युद्ध के पहले ही दिन हो गई थी। तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला में पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहाँ ईरानी अधिकारियों के अनुसार अगले तीन दिनों में अकेले राजधानी में डेढ़ से दो करोड़ शोकाकुल नागरिकों के शामिल होने का अनुमान है। यह आयोजन चार महीने की देरी के बाद हो रहा है, जिसे ईरानी सरकार ने युद्ध की तीव्रता और सुरक्षा कारणों से टाला था।

इस अवसर पर ईरानी नेतृत्व ने इसे राष्ट्रीय एकता और प्रतिरोध का प्रदर्शन बताया। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने कहा कि “राष्ट्र की प्रतिशोध की पुकार पूरी दुनिया को सुनाई देनी चाहिए,” जबकि सेना प्रमुख ने अमेरिका और इज़राइल से ख़ून का बदला लेने की कसम खाई। वहीं, ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक गोपनीय निर्देश जारी कर सभी राजनयिक मिशनों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि मेज़बान देशों की भागीदारी को “अमित्रतापूर्ण कार्य” माना जाएगा। इस दबाव के चलते कम से कम 13 देशों ने अपनी भागीदारी वापस ले ली या स्तर घटा दिया, जिनमें पूर्वी यूरोप, अफ़्रीका और खाड़ी के कुछ अरब देश शामिल बताए जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, रूसी सुरक्षा परिषद के उपप्रमुख दिमित्री मेदवेदेव, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, तुर्की के उपराष्ट्रपति, चीनी संसद के उपाध्यक्ष, तथा भारत से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन सहित लगभग 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यूरोपीय देशों को आमंत्रित नहीं किया गया। पाकिस्तान, जिसने युद्धविराम और समझौता ज्ञापन में मध्यस्थता की थी, की उपस्थिति को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री की भागीदारी ने भी क्षेत्रीय कूटनीति में बदलाव के संकेत दिए।

इस आयोजन की सबसे बड़ी अनिश्चितता नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति है, जो पिता की मृत्यु के एक सप्ताह बाद पद पर नियुक्त हुए थे लेकिन अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ईरानी सूत्रों के अनुसार वे उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और इज़राइल की ओर से लगातार हत्या की धमकियों के कारण सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। इसके विपरीत, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रमुख अहमद वहीदी युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से नज़र आए, जिसे विश्लेषक गार्ड की बढ़ी हुई राजनीतिक भूमिका का संकेत मान रहे हैं। अंतिम संस्कार की रस्में 6 जुलाई को तेहरान में जुलूस, 7 जुलाई को क़ोम, 8 जुलाई को इराक़ के नजफ़ और करबला, तथा 9 जुलाई को मशहद में दफ़न के साथ संपन्न होंगी। इसके बाद अमेरिका के साथ स्थायी शांति समझौते के लिए क़तर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 10 भाषाएँ

52%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसभारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
विजयपीड़ितभाव

The funeral of Ayatollah Khamenei is portrayed as a historic, spontaneous outpouring of grief by millions of Iranians, demonstrating the nation's unity and unwavering support for the Islamic Revolution. The event is framed as a direct response to the U.S.-Israeli assassination, turning the ceremony into a powerful show of strength and defiance against foreign enemies. The massive turnout is presented as a natural and voluntary expression of loyalty, with no mention of any state mobilization or dissent.

भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
संदेहआक्रोश

The funeral is covered with a focus on the emotional breakdown of Iranian leaders, but also raises critical questions about the authenticity of the massive turnout, given recent protests against Khamenei. The chants of 'Death to America' and calls for revenge are highlighted, suggesting a militant atmosphere. The coverage implies that the regime may have pressured people to attend, casting doubt on the voluntary nature of the mourning.

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ईरान में आंतरिक दरार: राष्ट्रपति का इस्तीफे की धमकी, मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा चिंता·स्पेन का सख्त कदम: विदेशी पेंशनभोगियों को अब साल में दो बार देना होगा जीवित प्रमाण·जुलाई 2026: जब सिनेमाघरों में गूंजे मिनियंस के ठहाके और जकार्ता में सजी 'एडम्स फैमिली' की संगीतमय शाम·विंबलडन 2026: सबालेंका-ओसाका की तूफानी जीत, इतालवी लहर पर सबकी निगाहें·चीन ने ताइवान के पूर्वी जल में नई तटरक्षक टुकड़ी तैनात की, पश्चिमी चिंताओं के बावजूद गश्त जारी·जर्मनी को पेनल्टी पर हराकर पैराग्वे की ऐतिहासिक छलांग, अब फ्रांस की मजबूत दीवार से सामना·ट्रंप ने 250वीं वर्षगांठ पर अमेरिकी पहचान पर 'हमले' की चेतावनी दी, साम्यवाद को सबसे बड़ा खतरा बताया·अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर पुतिन का ट्रंप को संदेश: परमाणु जिम्मेदारी और ऐतिहासिक गठबंधन का स्मरण·ईरान में आंतरिक दरार: राष्ट्रपति का इस्तीफे की धमकी, मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा चिंता·स्पेन का सख्त कदम: विदेशी पेंशनभोगियों को अब साल में दो बार देना होगा जीवित प्रमाण·जुलाई 2026: जब सिनेमाघरों में गूंजे मिनियंस के ठहाके और जकार्ता में सजी 'एडम्स फैमिली' की संगीतमय शाम·विंबलडन 2026: सबालेंका-ओसाका की तूफानी जीत, इतालवी लहर पर सबकी निगाहें·चीन ने ताइवान के पूर्वी जल में नई तटरक्षक टुकड़ी तैनात की, पश्चिमी चिंताओं के बावजूद गश्त जारी·जर्मनी को पेनल्टी पर हराकर पैराग्वे की ऐतिहासिक छलांग, अब फ्रांस की मजबूत दीवार से सामना·ट्रंप ने 250वीं वर्षगांठ पर अमेरिकी पहचान पर 'हमले' की चेतावनी दी, साम्यवाद को सबसे बड़ा खतरा बताया·अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर पुतिन का ट्रंप को संदेश: परमाणु जिम्मेदारी और ऐतिहासिक गठबंधन का स्मरण·
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शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुरू: ईरान की शक्ति प्रदर्शन की कोशिश, नए नेतृत्व पर सवाल

तेहरान में पूर्व सर्वोच्च नेता की अंत्येष्टि में करोड़ों लोगों के जुटने का अनुमान, विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी और मोजतबा ख़ामेनेई की ग़ैरमौजूदगी ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और ईरान के आंतरिक सत्ता समीकरणों पर बहस तेज़ कर दी है।

ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुक्रवार से शुरू हुआ, जिनकी मृत्यु 28 फ़रवरी को अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में युद्ध के पहले ही दिन हो गई थी। तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला में पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहाँ ईरानी अधिकारियों के अनुसार अगले तीन दिनों में अकेले राजधानी में डेढ़ से दो करोड़ शोकाकुल नागरिकों के शामिल होने का अनुमान है। यह आयोजन चार महीने की देरी के बाद हो रहा है, जिसे ईरानी सरकार ने युद्ध की तीव्रता और सुरक्षा कारणों से टाला था।

इस अवसर पर ईरानी नेतृत्व ने इसे राष्ट्रीय एकता और प्रतिरोध का प्रदर्शन बताया। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने कहा कि “राष्ट्र की प्रतिशोध की पुकार पूरी दुनिया को सुनाई देनी चाहिए,” जबकि सेना प्रमुख ने अमेरिका और इज़राइल से ख़ून का बदला लेने की कसम खाई। वहीं, ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक गोपनीय निर्देश जारी कर सभी राजनयिक मिशनों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि मेज़बान देशों की भागीदारी को “अमित्रतापूर्ण कार्य” माना जाएगा। इस दबाव के चलते कम से कम 13 देशों ने अपनी भागीदारी वापस ले ली या स्तर घटा दिया, जिनमें पूर्वी यूरोप, अफ़्रीका और खाड़ी के कुछ अरब देश शामिल बताए जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, रूसी सुरक्षा परिषद के उपप्रमुख दिमित्री मेदवेदेव, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, तुर्की के उपराष्ट्रपति, चीनी संसद के उपाध्यक्ष, तथा भारत से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन सहित लगभग 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यूरोपीय देशों को आमंत्रित नहीं किया गया। पाकिस्तान, जिसने युद्धविराम और समझौता ज्ञापन में मध्यस्थता की थी, की उपस्थिति को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री की भागीदारी ने भी क्षेत्रीय कूटनीति में बदलाव के संकेत दिए।

इस आयोजन की सबसे बड़ी अनिश्चितता नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति है, जो पिता की मृत्यु के एक सप्ताह बाद पद पर नियुक्त हुए थे लेकिन अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ईरानी सूत्रों के अनुसार वे उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और इज़राइल की ओर से लगातार हत्या की धमकियों के कारण सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। इसके विपरीत, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रमुख अहमद वहीदी युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से नज़र आए, जिसे विश्लेषक गार्ड की बढ़ी हुई राजनीतिक भूमिका का संकेत मान रहे हैं। अंतिम संस्कार की रस्में 6 जुलाई को तेहरान में जुलूस, 7 जुलाई को क़ोम, 8 जुलाई को इराक़ के नजफ़ और करबला, तथा 9 जुलाई को मशहद में दफ़न के साथ संपन्न होंगी। इसके बाद अमेरिका के साथ स्थायी शांति समझौते के लिए क़तर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 46 स्रोत · 10 भाषाएँ

52%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक5%
न्यूनत्र69%
निंदक26%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसभारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
विजयपीड़ितभाव

The funeral of Ayatollah Khamenei is portrayed as a historic, spontaneous outpouring of grief by millions of Iranians, demonstrating the nation's unity and unwavering support for the Islamic Revolution. The event is framed as a direct response to the U.S.-Israeli assassination, turning the ceremony into a powerful show of strength and defiance against foreign enemies. The massive turnout is presented as a natural and voluntary expression of loyalty, with no mention of any state mobilization or dissent.

भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
संदेहआक्रोश

The funeral is covered with a focus on the emotional breakdown of Iranian leaders, but also raises critical questions about the authenticity of the massive turnout, given recent protests against Khamenei. The chants of 'Death to America' and calls for revenge are highlighted, suggesting a militant atmosphere. The coverage implies that the regime may have pressured people to attend, casting doubt on the voluntary nature of the mourning.

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