
अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर पुतिन का ट्रंप को संदेश: परमाणु जिम्मेदारी और ऐतिहासिक गठबंधन का स्मरण
क्रेमलिन ने 250वीं वर्षगांठ पर भेजे गए संदेश में रूस और अमेरिका को वैश्विक सुरक्षा का विशेष उत्तरदायी बताया, साथ ही द्विपक्षीय संवाद की पैरवी की।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक औपचारिक बधाई संदेश भेजा, जिसमें दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सहयोग और समकालीन वैश्विक जिम्मेदारियों को रेखांकित किया गया। क्रेमलिन की वेबसाइट पर प्रकाशित इस संदेश में पुतिन ने कहा कि अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर न केवल एक राष्ट्र के जन्म का प्रतीक था, बल्कि विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना भी थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तत्कालीन रूस ने ब्रिटिश शासन से मुक्ति के लिए उत्तरी अमेरिकी उपनिवेशवादियों के संघर्ष को बिना शर्त समर्थन दिया था।
क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने दो विश्व युद्धों में मास्को और वाशिंगटन के गठबंधन, नाज़ीवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और आधुनिक विश्व व्यवस्था की नींव रखने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। संदेश के केंद्र में यह कथन था कि आज, दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के रूप में, रूस और अमेरिका वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने की विशेष जिम्मेदारी वहन करते हैं। पुतिन ने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि मास्को और वाशिंगटन के बीच रचनात्मक, समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों की स्थापना न केवल दोनों देशों के लोगों, बल्कि संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी अमेरिकी जनता को एक अलग संदेश भेजा, जिसे रूसी विदेश मंत्रालय ने जारी किया। इसमें लावरोव ने कहा कि यह वर्षगांठ विश्व व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर मनाई जा रही है, जहां पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिरोध के बावजूद एक अधिक न्यायसंगत और संतुलित बहुपक्षीय विकास मॉडल उभर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समानता, आपसी सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के आधार पर स्पष्ट संवाद के माध्यम से मास्को और वाशिंगटन जटिल वैश्विक और क्षेत्रीय समस्याओं के प्रभावी समाधान खोजने में सक्षम हैं। ईरानी मीडिया ने इस संदेश को पुतिन द्वारा परमाणु शक्ति के प्रदर्शन के रूप में देखा, जबकि इतालवी और इंडोनेशियाई मीडिया ने इसे राजनयिक पहल के रूप में रेखांकित किया।
यह संदेश ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन संघर्ष को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है। इससे पहले 14 जून को पुतिन और ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ट्रंप ने युद्धविराम का आह्वान किया था और पुतिन ने कहा था कि कीव शासन द्वारा रूसी नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले यूक्रेन के लिए युद्ध के मैदान की गंभीर स्थिति को नहीं बदल सकते। क्रेमलिन के ताजा संदेश में यूक्रेन का कोई सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन यह उच्च-स्तरीय संवाद जारी रखने के इरादे को दर्शाता है। फिलहाल वाशिंगटन की ओर से इस संदेश पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है, और न ही किसी ठोस द्विपक्षीय बैठक की घोषणा की गई है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.50 | aligned |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.60 | critical |
Russia reframes the occasion as a tribute to a shared great-power past, from which an irrevocable bipolar nuclear order derives.
The gesture is framed as historical responsibility, linking the US jubilee to the memory of World War II and the primacy of atomic weapons, thus presenting Moscow as an indispensable partner.
Mediterranean Europe reduces the move to a suspect formality, highlighting its contrast with the day's humanitarian urgency.
By implicitly juxtaposing the gesture with the Pope's Lampedusa visit, the congratulation is drained of substance and presented as a distraction from true international priorities.
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