
जर्मनी में पहले दिन से बीमारी प्रमाणपत्र अनिवार्य, चिकित्सकों का तीखा विरोध
गठबंधन सरकार के फैसले से स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ने की आशंका, जबकि रूस और ईरान में स्वास्थ्य प्रमाणन को लेकर अलग-अलग बहसें तेज़
जर्मनी की नई गठबंधन सरकार ने बीमारी की छुट्टी के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कर्मचारियों के लिए पहले ही दिन डॉक्टर का प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया है और कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई फ़ोन पर बीमारी की सूचना देने की सुविधा को समाप्त कर दिया है। चांसलर फ्रेडरिक मेर्ट्स (सीडीयू) के अनुसार, जर्मनी में बीमार छुट्टियों की संख्या “बहुत अधिक” है और यह अर्थव्यवस्था के लिए “प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान” बन चुकी है। अभी तक कर्मचारी बिना प्रमाणपत्र के तीन दिन तक अनुपस्थित रह सकते थे, जबकि नियोक्ता पहले भी प्रमाणपत्र मांग सकते थे। अब यह व्यवस्था उलट दी गई है—पहले दिन से प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा, हालांकि कंपनियां अपने कर्मचारियों को इससे छूट दे सकेंगी।
इस फैसले पर चिकित्सा संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। सांविधिक स्वास्थ्य बीमा चिकित्सकों के राष्ट्रीय संघ (केबीवी) ने इसे “पागलपन की सीमा” बताया और कहा कि खांसी या पेट के संक्रमण से पीड़ित मरीज़ों को भीड़भाड़ वाले प्रतीक्षालयों में आने के बजाय बिस्तर पर रहना चाहिए। सामान्य चिकित्सक संघ ने चेतावनी दी कि इससे संक्रमण के मामले डॉक्टरों के कक्षों में फैलेंगे। सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही सामाजिक जनवादी पार्टी (एसपीडी) के नेता और उप-चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने “व्यावहारिक समाधान” की ज़रूरत बताई, जबकि श्रम मंत्री बार्बेल बास ने कहा कि वे इस प्रावधान के प्रभावों की जांच करेंगी। सीडीयू संसदीय दल के नेता येन्स श्पान ने योजना का बचाव करते हुए कहा कि जर्मनी में प्रति कर्मचारी सालाना लगभग 18 बीमार दिन होते हैं, जो यूरोपीय संघ में सबसे अधिक में से एक है।
इस कदम के ठोस परिणाम सामने आने लगे हैं। केबीवी के अनुमान के अनुसार, इस बदलाव से हर साल लगभग तीन करोड़ अतिरिक्त डॉक्टर-दौरे होंगे, जिससे उन रोगियों के लिए अपॉइंटमेंट की कमी हो सकती है जिन्हें वास्तव में चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है। बर्लिन स्थित आईजीईएस संस्थान की सुज़ाने हिल्डेब्रांट के अनुसार, जर्मनी बीमार छुट्टियों के मामले में शीर्ष पर नहीं बल्कि ऊपरी तीसरे भाग में है, लेकिन छह सप्ताह तक पूर्ण वेतन भुगतान की व्यवस्था अपेक्षाकृत उदार है। नियोक्ता संघ बीडीए के आंकड़ों के अनुसार, कंपनियां सालाना 82 से 85 अरब यूरो का वेतन भुगतान अकेले बीमारी की छुट्टियों पर करती हैं। सरकारी प्रवक्ता श्टेफान कोर्नेलियुस ने बाद में स्पष्ट किया कि प्रमाणपत्र पहले दिन ही जमा कराना अनिवार्य नहीं होगा और वीडियो परामर्श के ज़रिए भी बीमारी प्रमाणपत्र लिया जा सकेगा, जिससे नियमों के अंतिम स्वरूप पर अभी काम जारी है।
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब विभिन्न देश स्वास्थ्य प्रमाणन की अपनी नीतियों पर पुनर्विचार कर रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक प्रस्ताव में लामबंदी या युद्धकाल के दौरान अनुबंध सैनिकों और जुटाए गए नागरिकों के लिए अनिवार्य चिकित्सा परीक्षण को सीमित करने की सिफारिश की है—केवल चोट, विकलांगता या सूचीबद्ध बीमारियों की स्थिति में ही यह ज़रूरी होगा। वहीं ईरान में पूर्व स्वास्थ्य उपमंत्री अमीरमोहसिन ज़ियाई ने परिवार चिकित्सा प्रणाली और रेफ़रल नेटवर्क के विस्तार को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इससे अनावश्यक चिकित्सा दौरे और संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सकेगी। जर्मनी में यह मामला अब संसदीय प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है, जहां गठबंधन के भीतर एसपीडी की आपत्तियों और चिकित्सकों के दबाव के बीच अंतिम नियमों को आकार दिया जाएगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
Germany abolishes phone sick notes, sparking debate on whether to require a doctor's certificate from the first day of illness. Opinions are split between those seeing it as a bureaucratic relief and those fearing misuse.
The German decision to abolish phone sick notes is seen as another sign of Western institutional decline, with criticism of public health management. The move is interpreted as a concession to social pressure that could undermine medical oversight.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
वैश्विक ऑटो बाजार में दोहरी चाल: इंडोनेशिया में नीतिगत अनिश्चितता, ब्राजील और रूस में मजबूत वृद्धि
4 भाषाएँ · 10 स्रोत
Technology सेAI का तेज़ विस्तार, सरकारें पीछे: संतुलित उपयोग और नियमन की चुनौती
7 भाषाएँ · 8 स्रोत
Science & Health सेहफ्ते में दो बार कसरत, दिल के दौरे का खतरा आधा: रोज़मर्रा की आदतें कैसे बदल सकती हैं सेहत
5 भाषाएँ · 11 स्रोत