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भू-राजनीति और राजनीतिरविवार, 28 जून 2026

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: टीपीएस खत्म, हाईती-सीरिया सहित 17 देशों के प्रवासियों पर प्रत्यर्पण की तलवार

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अस्थायी संरक्षण प्राप्त लाखों प्रवासियों को स्थायी निवास या स्वदेश वापसी का विकल्प चुनने की चेतावनी; आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पर बहस तेज।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 25 जून को एक निर्णायक फैसले में स्पष्ट किया कि निचली अदालतें गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के टेंपररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने के फैसले को पलट नहीं सकतीं। मुलिन बनाम डो मामले में आए इस निर्णय का सीधा असर हाईती और सीरिया के प्रवासियों पर पड़ेगा, लेकिन इसके संभावित दायरे में वे सभी 17 देश शामिल हैं जिनके नागरिक फिलहाल इस संरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। कोर्ट के बहुमत ने पाया कि प्रशासन के कार्यों में नस्लीय पूर्वाग्रह का आरोप लगाने की संभावना कम है, जिससे इन समुदायों के लिए कानूनी राहत के रास्ते लगभग बंद हो गए हैं।

अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्री मार्कोइन मुलिन ने सीएनएन को दिए साक्षात्कार में सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “या तो स्थायी निवास के लिए आवेदन करें या हम आपको स्वदेश लौटने में मदद करेंगे। हम हवाई टिकट और बसने के लिए लगभग 2,100 डॉलर देंगे।” यह बयान ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जो अस्थायी संरक्षण कार्यक्रमों को समाप्त कर निर्वासन प्रक्रिया तेज करना चाहती है। मार्च में पदभार संभालने के बाद मुलिन पहले ही अफगानिस्तान, होंडुरास, नेपाल और वेनेजुएला समेत 13 देशों के टीपीएस को निरस्त कर चुके हैं।

दूसरी ओर, न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करने से इनकार करते हुए इसे “आधुनिक अमेरिकी इतिहास में प्रवासियों पर सबसे बड़े हमलों में से एक” बताया। उनके इस रवैये पर डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने ‘संवैधानिक संकट’ की चेतावनी दी है। वहीं ओहायो के रिपब्लिकन गवर्नर माइक डिवाइन ने आर्थिक तर्कों पर जोर देते हुए कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था और हेल्थकेयर सेक्टर हाईतीयन श्रमिकों पर निर्भर है और उनका निर्वासन अमेरिकी हितों के विपरीत होगा। आप्रवासन वकीलों की शीर्ष संस्था अमेरिकन इमीग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (एआईएलए) ने इस निर्णय को “विनाशकारी क्षति” करार दिया है।

टीपीएस कार्यक्रम की शुरुआत 1990 में हुई थी और इसे युद्ध या प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे देशों के नागरिकों को अस्थायी सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया था। 2010 में भूकंप के बाद हाईती और 2012 में गृह युद्ध के चलते सीरिया को यह दर्जा मिला था, लेकिन इसे बार-बार बढ़ाया जाता रहा। आलोचकों का कहना है कि ‘टेंपररी’ नाम प्रवासियों को समाज में घुलने-मिलने से रोकता है और स्प्रिंगफील्ड, ओहायो जैसे शहरों में 20,000 हाईतीयनों की भारी आमद ने स्थानीय संसाधनों पर दबाव डाला है। वहीं, स्टेट डिपार्टमेंट स्वयं इन देशों की यात्रा के लिए व्यापक हिंसा और अपहरण की चेतावनी जारी करता है।

फिलहाल प्रशासन के पास टीपीएस समाप्त करने की कानूनी मंजूरी है, लेकिन स्पष्ट समयसीमा घोषित नहीं की गई है। लेबनान जैसे कुछ देशों के लिए नवंबर 2026 तक विस्तार दिया गया है, लेकिन हाईती और सीरिया के लाखों प्रवासियों के वर्क परमिट तेजी से समाप्त हो रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञ प्रभावित लोगों को तुरंत वैकल्पिक आप्रवासन रास्ते तलाशने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले महीनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गर्मा सकता है, खासकर तब जब कुछ शहर संघीय आदेशों की अवहेलना की धमकी दे रहे हैं।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
संदेहव्यावहारिकता

अमेरिकी राजनीतिक प्रतिष्ठान हाईटियन और सीरियाई प्रवासियों के लिए अस्थायी संरक्षित स्थिति (टीपीएस) को समाप्त करने की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीव्र रूप से विभाजित है। जहां कुछ रिपब्लिकन नेता मानवीय चिंताओं और स्थानीय हितों के मद्देनजर प्रशासन से पुनर्विचार करने का आग्रह करते हैं, वहीं होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी इस बात पर जोर देते हैं कि टीपीएस धारकों को या तो स्थायी निवास की मांग करनी चाहिए या चले जाना चाहिए। यह विवाद संवैधानिक सवाल भी खड़ा करता है क्योंकि फैसले की अवज्ञा की डेमोक्रेटिक चेतावनियाँ कानून के शासन पर नई बहस छेड़ती हैं।

लैटिन अमेरिकी प्रेस
चेतावनीसंदेह

सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन 17 से अधिक देशों की अरक्षितता को उजागर करता है जिनके नागरिक संयुक्त राज्य अमेरिका में अस्थायी संरक्षित स्थिति पर निर्भर हैं। इस फैसले का सीधा असर हजारों हाईटियन और सीरियाई लोगों पर पड़ता है, लेकिन यह अन्य टीपीएस पदनामों को भी खतरे में डालता है, जिससे संभावित रूप से सैकड़ों हजारों प्रवासी प्रभावित हो सकते हैं। लैटिन अमेरिकी दृष्टिकोण से, यह फैसला अमेरिकी आव्रजन नीति के सख्त होने का संकेत है जिसका क्षेत्र पर अस्थिर करने वाला प्रभाव पड़ सकता है।

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एसी मिलान ने गोंसालो रामोस को रिकॉर्ड 74 मिलियन यूरो में खरीदकर नए युग की शुरुआत की·ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार की तैयारी, इज़राइल ने नए नेता को दी धमकी·वेनेजुएला में भूकंप: 1,700 से अधिक मृत, उपग्रह अनुमान में 59,000 इमारतें क्षतिग्रस्त·होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान ने नियंत्रण पर जोर दिया, अमेरिका और सऊदी अरब ने किया विरोध·ईरान ने अमेरिकी अनुपालन पर टिकाई समझौते की शर्त, डोहा वार्ता पर विरोधाभासी दावे·कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर, तिमाही गिरावट 2020 के बाद सबसे बड़ी·अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता पर ट्रंप के आदेश को असंवैधानिक ठहराया·ब्राजील का सरकारी कर्ज पांच साल के उच्चतम स्तर पर, ब्याज बोझ 2016 के बाद सबसे अधिक·एसी मिलान ने गोंसालो रामोस को रिकॉर्ड 74 मिलियन यूरो में खरीदकर नए युग की शुरुआत की·ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार की तैयारी, इज़राइल ने नए नेता को दी धमकी·वेनेजुएला में भूकंप: 1,700 से अधिक मृत, उपग्रह अनुमान में 59,000 इमारतें क्षतिग्रस्त·होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान ने नियंत्रण पर जोर दिया, अमेरिका और सऊदी अरब ने किया विरोध·ईरान ने अमेरिकी अनुपालन पर टिकाई समझौते की शर्त, डोहा वार्ता पर विरोधाभासी दावे·कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर, तिमाही गिरावट 2020 के बाद सबसे बड़ी·अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता पर ट्रंप के आदेश को असंवैधानिक ठहराया·ब्राजील का सरकारी कर्ज पांच साल के उच्चतम स्तर पर, ब्याज बोझ 2016 के बाद सबसे अधिक·
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: टीपीएस खत्म, हाईती-सीरिया सहित 17 देशों के प्रवासियों पर प्रत्यर्पण की तलवार

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अस्थायी संरक्षण प्राप्त लाखों प्रवासियों को स्थायी निवास या स्वदेश वापसी का विकल्प चुनने की चेतावनी; आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पर बहस तेज।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 25 जून को एक निर्णायक फैसले में स्पष्ट किया कि निचली अदालतें गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के टेंपररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने के फैसले को पलट नहीं सकतीं। मुलिन बनाम डो मामले में आए इस निर्णय का सीधा असर हाईती और सीरिया के प्रवासियों पर पड़ेगा, लेकिन इसके संभावित दायरे में वे सभी 17 देश शामिल हैं जिनके नागरिक फिलहाल इस संरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। कोर्ट के बहुमत ने पाया कि प्रशासन के कार्यों में नस्लीय पूर्वाग्रह का आरोप लगाने की संभावना कम है, जिससे इन समुदायों के लिए कानूनी राहत के रास्ते लगभग बंद हो गए हैं।

अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्री मार्कोइन मुलिन ने सीएनएन को दिए साक्षात्कार में सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “या तो स्थायी निवास के लिए आवेदन करें या हम आपको स्वदेश लौटने में मदद करेंगे। हम हवाई टिकट और बसने के लिए लगभग 2,100 डॉलर देंगे।” यह बयान ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जो अस्थायी संरक्षण कार्यक्रमों को समाप्त कर निर्वासन प्रक्रिया तेज करना चाहती है। मार्च में पदभार संभालने के बाद मुलिन पहले ही अफगानिस्तान, होंडुरास, नेपाल और वेनेजुएला समेत 13 देशों के टीपीएस को निरस्त कर चुके हैं।

दूसरी ओर, न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करने से इनकार करते हुए इसे “आधुनिक अमेरिकी इतिहास में प्रवासियों पर सबसे बड़े हमलों में से एक” बताया। उनके इस रवैये पर डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने ‘संवैधानिक संकट’ की चेतावनी दी है। वहीं ओहायो के रिपब्लिकन गवर्नर माइक डिवाइन ने आर्थिक तर्कों पर जोर देते हुए कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था और हेल्थकेयर सेक्टर हाईतीयन श्रमिकों पर निर्भर है और उनका निर्वासन अमेरिकी हितों के विपरीत होगा। आप्रवासन वकीलों की शीर्ष संस्था अमेरिकन इमीग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (एआईएलए) ने इस निर्णय को “विनाशकारी क्षति” करार दिया है।

टीपीएस कार्यक्रम की शुरुआत 1990 में हुई थी और इसे युद्ध या प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे देशों के नागरिकों को अस्थायी सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया था। 2010 में भूकंप के बाद हाईती और 2012 में गृह युद्ध के चलते सीरिया को यह दर्जा मिला था, लेकिन इसे बार-बार बढ़ाया जाता रहा। आलोचकों का कहना है कि ‘टेंपररी’ नाम प्रवासियों को समाज में घुलने-मिलने से रोकता है और स्प्रिंगफील्ड, ओहायो जैसे शहरों में 20,000 हाईतीयनों की भारी आमद ने स्थानीय संसाधनों पर दबाव डाला है। वहीं, स्टेट डिपार्टमेंट स्वयं इन देशों की यात्रा के लिए व्यापक हिंसा और अपहरण की चेतावनी जारी करता है।

फिलहाल प्रशासन के पास टीपीएस समाप्त करने की कानूनी मंजूरी है, लेकिन स्पष्ट समयसीमा घोषित नहीं की गई है। लेबनान जैसे कुछ देशों के लिए नवंबर 2026 तक विस्तार दिया गया है, लेकिन हाईती और सीरिया के लाखों प्रवासियों के वर्क परमिट तेजी से समाप्त हो रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञ प्रभावित लोगों को तुरंत वैकल्पिक आप्रवासन रास्ते तलाशने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले महीनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गर्मा सकता है, खासकर तब जब कुछ शहर संघीय आदेशों की अवहेलना की धमकी दे रहे हैं।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 4 स्रोत · 3 भाषाएँ

0%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

निंदक100%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
संदेहव्यावहारिकता

अमेरिकी राजनीतिक प्रतिष्ठान हाईटियन और सीरियाई प्रवासियों के लिए अस्थायी संरक्षित स्थिति (टीपीएस) को समाप्त करने की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीव्र रूप से विभाजित है। जहां कुछ रिपब्लिकन नेता मानवीय चिंताओं और स्थानीय हितों के मद्देनजर प्रशासन से पुनर्विचार करने का आग्रह करते हैं, वहीं होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी इस बात पर जोर देते हैं कि टीपीएस धारकों को या तो स्थायी निवास की मांग करनी चाहिए या चले जाना चाहिए। यह विवाद संवैधानिक सवाल भी खड़ा करता है क्योंकि फैसले की अवज्ञा की डेमोक्रेटिक चेतावनियाँ कानून के शासन पर नई बहस छेड़ती हैं।

लैटिन अमेरिकी प्रेस
चेतावनीसंदेह

सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन 17 से अधिक देशों की अरक्षितता को उजागर करता है जिनके नागरिक संयुक्त राज्य अमेरिका में अस्थायी संरक्षित स्थिति पर निर्भर हैं। इस फैसले का सीधा असर हजारों हाईटियन और सीरियाई लोगों पर पड़ता है, लेकिन यह अन्य टीपीएस पदनामों को भी खतरे में डालता है, जिससे संभावित रूप से सैकड़ों हजारों प्रवासी प्रभावित हो सकते हैं। लैटिन अमेरिकी दृष्टिकोण से, यह फैसला अमेरिकी आव्रजन नीति के सख्त होने का संकेत है जिसका क्षेत्र पर अस्थिर करने वाला प्रभाव पड़ सकता है।

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