
उरुग्वे का विश्व कप सपना टूटा: स्पेन से हार के बाद बिएल्सा ने ली पूरी जिम्मेदारी
ग्वाडलजारा में स्पेन के खिलाफ 1-0 की हार ने उरुग्वे को लगातार दूसरे विश्व कप के ग्रुप चरण से बाहर कर दिया, जिसके बाद कोच मार्सेलो बिएल्सा ने खुद को 'निराशा का जिम्मेदार' बताया।
ग्वाडलजारा के मैदान पर शनिवार रात उरुग्वे का विश्व कप 2026 अभियान स्पेन के हाथों 1-0 की हार के साथ समाप्त हुआ। गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा की एक चूक से पहले हाफ में एलेक्स बाएना ने स्पेन के लिए निर्णायक गोल किया। दूसरे हाफ में उरुग्वे ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन कप्तान फेडेरिको वाल्वेर्डे को 55वें मिनट में बाहर कर फेडेरिको विनास को उतारने का बिएल्सा का दांव हमले को धार नहीं दे सका। मैच के बाद बिएल्सा ने बताया कि मुस्लेरा ने खुद हाफ टाइम पर बाहर जाने का फैसला किया, जबकि वाल्वेर्डे का प्रतिस्थापन आक्रमण को अधिक शक्ति देने के लिए किया गया था।
यह हार उरुग्वे के लिए पूरे ग्रुप चरण की निराशा का अंतिम अध्याय थी। टीम ने ग्रुप एच में सऊदी अरब और केप वर्डे के साथ ड्रॉ खेलकर केवल दो अंक बटोरे, और तीसरे स्थान पर रहते हुए अगले दौर की दौड़ से बाहर हो गई। यह लगातार दूसरा विश्व कप है जब उरुग्वे पहले दौर से आगे नहीं बढ़ सका। बिएल्सा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैं इस निराशा का जिम्मेदार हूं,” और स्वीकार किया कि तीन साल का उनका काम बिना सकारात्मक परिणाम के व्यर्थ है। उन्होंने यह भी कहा, “मैंने उरुग्वे के फुटबॉल को कुछ नहीं दिया,” और माना कि टीम ने सात अंक के लायक खेल खेला लेकिन सिर्फ दो ही हासिल कर सकी।
बिएल्सा का गुस्सा मैच खत्म होते ही दिखा जब उन्होंने टीवी प्रोड्यूसरों पर चिल्लाते हुए कहा, “डेल, दे उना वेज़!” (जल्दी करो!)। दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने इस दृश्य को व्यापक रूप से दिखाया। उरुग्वे के पूर्व खिलाड़ियों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। पूर्व डिफेंडर डिएगो लुगानो ने कहा कि बिएल्सा ने “माहौल को दूषित कर दिया” और वह कभी समझ ही नहीं पाए कि वह कहां हैं। डिएगो फोर्लान ने वाल्वेर्डे को बाहर करने के फैसले पर सवाल उठाया, जबकि उरुग्वे के अखबारों ने इसे “पिछले 50 सालों का सबसे खराब प्रदर्शन” और “दक्षिण अमेरिका की निराशा” करार दिया।
टीम के भीतर तनाव पहले से चल रहा था। कोपा अमेरिका 2024 के दौरान लुइस सुआरेज़ और बिएल्सा के बीच खेमे के नियमों को लेकर मतभेद सामने आए थे, और सुआरेज़ ने बाद में सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। बिएल्सा ने सुआरेज़ को विश्व कप टीम में शामिल नहीं किया, जिससे खिलाड़ियों के बीच विभाजन की खबरें आईं। उरुग्वे फुटबॉल संघ ने कथित तौर पर चार्टर्ड वापसी उड़ान रद्द कर दी, जिससे खिलाड़ियों को वाणिज्यिक विमानों से लौटना पड़ा।
इस हार के साथ ही बिएल्सा का उरुग्वे के कोच के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया, जिसमें 37 मैचों में 14 जीत, 15 ड्रॉ और 8 हार शामिल रहीं। उरुग्वे अब अगले विश्व कप चक्र की तैयारी की ओर देखेगा, जबकि बिएल्सा ने स्पष्ट कर दिया कि वह पद छोड़ रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस ने उरुग्वे के बाहर होने को शांत, तथ्यात्मक लहजे में कवर किया, जिसमें बिएल्सा की आत्म-आलोचना पर जोर दिया गया। कोच खुले तौर पर खुद को दोषी ठहराते हैं और कहते हैं कि उन्होंने उरुग्वे फुटबॉल के लिए कुछ भी सार्थक नहीं छोड़ा। इस खबर को बिना किसी विवादास्पद गर्मी के एक सीधी खेल रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
लैटिन अमेरिकी प्रेस उरुग्वे के बाहर होने को अराजकता और गुस्से के दृश्य के रूप में चित्रित करती है, जिसमें बिएल्सा पत्रकारों पर क्रोधित हैं और पूर्व खिलाड़ियों द्वारा उनकी कड़ी आलोचना की गई है। ड्रेसिंग रूम के माहौल को जहरीला बताया गया है, जबकि कोच पर एक आकर्षक अनुबंध से चिपके रहने का आरोप लगाया गया है। इस विफलता को चिंताजनक स्वर और नैतिक निंदा के साथ एक गहरे संकट के रूप में पेश किया गया है।
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