
इज़राइल-लेबनान समझौते पर हिज़्बुल्लाह का विरोध, सीमा पर तनाव बरकरार
अमेरिका की मध्यस्थता वाले ढांचागत समझौते को हिज़्बुल्लाह ने संप्रभुता का आत्मसमर्पण बताकर खारिज कर दिया, जबकि इज़राइल ने दक्षिण लेबनान में सैनिकों की लंबी मौजूदगी के संकेत दिए हैं।
वाशिंगटन में शुक्रवार को हस्ताक्षरित अमेरिकी-मध्यस्थता वाले इज़राइल-लेबनान समझौते पर शनिवार को हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘शून्य और अमान्य’ घोषित कर दिया। समझौते के एक दिन बाद ही इज़राइली ड्रोन हमले में दक्षिण लेबनान के नबातिएह अल-फौका में एक व्यक्ति की मौत ने संघर्ष विराम की नाजुकता को रेखांकित किया।
हिज़्बुल्लाह के अनुसार, समझौते की शर्तें लेबनानी संप्रभुता को कमज़ोर करती हैं और इज़राइली सुरक्षा क्षेत्र को वैधता प्रदान करती हैं। कासिम ने कहा कि समझौता ‘अपमानजनक, शर्मनाक और संप्रभुता का आत्मसमर्पण’ है, और उन्होंने मांग की कि इसके स्थान पर ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन लागू किया जाए। दूसरी ओर, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ‘ईरान और हिज़्बुल्लाह के लिए झटका’ बताया और स्पष्ट किया कि जब तक हिज़्बुल्लाह पूरी तरह निरस्त्र नहीं होता, इज़राइली सेनाएं लेबनान में 10 किलोमीटर तक के सुरक्षा क्षेत्र में बनी रहेंगी।
चार-सूत्रीय ढांचे के तहत इज़राइल को दक्षिण लितानी क्षेत्र से हटने और लेबनानी सेना को नियंत्रण सौंपने की योजना है, लेकिन साथ ही इज़राइल को विस्तारित सुरक्षा क्षेत्र में रहने की अनुमति है। समझौते में हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण को वापसी से जोड़ा गया है, जिसे समूह ‘लाल रेखाओं’ का उल्लंघन मानता है। इस बीच इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने सेना को सुरक्षा क्षेत्र में ‘विस्तारित प्रवास’ के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है, और धमकी दी है कि समझौते के क्रियान्वयन में बाधा डालने पर ईरान के ख़िलाफ़ ‘बड़ी ताक़त’ से जवाब दिया जाएगा।
यह संघर्ष 2 मार्च 2026 को तब भड़का जब हिज़्बुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के प्रतिशोध में इज़राइल पर रॉकेट दागे। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार तब से इज़राइली हमलों में कम से कम 4,192 लोग मारे गए और 12 लाख से अधिक विस्थापित हुए। 16 अप्रैल और जून के संघर्ष विराम प्रयास विफल रहे, लेकिन पिछले सप्ताह ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन के बाद हिंसा में कमी आई थी। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए पश्चिम एशिया में स्थिरता ऊर्जा आयात, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
फ़िलहाल, समझौते के तहत चयनित पायलट क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होनी है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त भिन्न है। हिज़्बुल्लाह ने सशस्त्र प्रतिरोध जारी रखने की घोषणा की है और बेरूत में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। यूरोपीय संघ और फ्रांस ने समझौते का स्वागत करते हुए ग़ैर-राज्य समूहों के निरस्त्रीकरण पर ज़ोर दिया है, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इसे ‘शुरुआत की शुरुआत’ कहा है। अगले ठोस क़दम के रूप में इज़राइली वापसी का परीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था का क्रियान्वयन अपेक्षित है, पर व्यापक संदेह बना हुआ है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Netanyahu presents the deal as a historic victory that strengthens Israel and weakens Hezbollah and Iran, reaffirming Israel's right to maintain a security zone in southern Lebanon until disarmament. The strike is portrayed as a necessary defensive action against a threat.
Hezbollah's leader rejects the US-brokered deal as a humiliating surrender that legitimizes Israeli occupation and violates Lebanese sovereignty. The group vows to continue resistance until full Israeli withdrawal, dismissing the framework as null and void.
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