
गुआडालाजारा में स्पेन से हार, उरुग्वे का विश्व कप से बाहर; बिएल्सा बोले- कुछ नहीं छोड़ा
एक के बाद एक गलतियाँ, कप्तान की जगह बदलाव, और रद्द चार्टर्ड उड़ान; मार्सेलो बिएल्सा के विवादास्पद कार्यकाल का नाटकीय अंत हुआ।
गुआडालाजारा के अकरोन स्टेडियम में शनिवार की रात उरुग्वे का विश्व कप 2026 अभियान 0-1 की हार के साथ समाप्त हुआ। स्पेन के खिलाफ निर्णायक मुकाबले में गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा की गलती ने एलेक्स बाएना को 41वें मिनट में गोल करने का मौका दिया, जो अंततः विजयी साबित हुआ। इस हार के साथ उरुग्वे को ग्रुप एच में दो ड्रॉ (सऊदी अरब और केप वर्डे से) और एक हार से मात्र दो अंक मिले, जो टूर्नामेंट से बाहर होने के लिए पर्याप्त नहीं था। यह प्रदर्शन उरुग्वे के लिए लगातार दूसरा विश्व कप है जिसमें वह ग्रुप चरण पार नहीं कर सका। क़तर 2022 के बाद अब मेक्सिको-अमेरिका-कनाडा 2026 में भी वही हश्र हुआ, जिससे दो बार के चैंपियन की छवि धूमिल हुई।
मैच के बाद मुस्लेरा ने स्वीकार किया कि वह ‘कभी इतना दुखी नहीं हुए’ और ड्रेसिंग रूम में साथियों से माफी मांगी। ऑप्टा के आंकड़ों के अनुसार, 1966 के बाद से किसी गोलकीपर ने एक विश्व कप में तीन गलतियाँ नहीं की थीं, जो सीधे गोल में बदलीं। मुस्लेरा ने खुद ही हाफटाइम पर बदले जाने का अनुरोध किया, जिसे कोच मार्सेलो बिएल्सा ने माना। लेकिन उरुग्वे शिविर की समस्या सिर्फ गोलकीपर तक सीमित नहीं थी। कोपा अमेरिका 2024 के बाद से टीम में खिंचाव बढ़ता गया, जब दिग्गज लुइस सुआरेज़ ने बिएल्सा के सख्त नियमों और अलगावपूर्ण व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। बिएल्सा ने तब ‘बहुत अच्छे’ कह कर बात खत्म की, लेकिन सुआरेज़ के संन्यास के बाद भी माहौल सुधरा नहीं। इस विश्व कप से पहले सुआरेज़ ने वापसी की इच्छा जताई, पर बिएल्सा ने एक शब्द में इनकार कर दिया। नहीतान नांदेज़ और मातियास वेसीनो जैसे खिलाड़ियों को भी बाहर रखा गया, जिससे ड्रेसिंग रूम बंटा रहा।
स्पेन के खिलाफ मैच में भी यह तनाव दिखा। बिएल्सा ने 55वें मिनट में कप्तान फ़ेदेरिको वाल्वेर्दे को बाहर कर दिया, और दोनों के बीच कोई नज़रें नहीं मिलीं। रिपोर्टों के अनुसार, एक दिन पहले कोच के तरीकों को लेकर खिलाड़ियों ने मोर्चा खोल दिया था, जिसके जवाब में यह फैसले हुए। मैच के बाद बिएल्सा अकेले ही स्टेडियम से निकले, पानी की टंकी पर बैठे खुद से बुदबुदाए और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा: ‘मैंने उरुग्वे के फुटबॉल को कुछ नहीं दिया।’ दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने इसे ‘दक्षिण अमेरिका की निराशा’ करार दिया। पूर्व डिफेंडर डिएगो लुगानो ने कहा, ‘बिएल्सा ने माहौल दूषित किया और करोड़ों के अनुबंध से चिपके रहे।’ वहीं, दिएगो फोर्लान ने वाल्वेर्दे के प्रतिस्थापन पर हैरानी जताई। जर्मनी के ‘बिल्ड’ ने इस पूरे प्रकरण को ‘दंडात्मक कार्रवाई’ के रूप में देखा, जबकि स्पेन और इंडोनेशिया के आउटलेट्स ने बिएल्सा की आत्म-आलोचना को रेखांकित किया।
उरुग्वे फुटबॉल संघ ने हार के तुरंत बाद टीम की चार्टर्ड उड़ान रद्द कर दी, और खिलाड़ी वाणिज्यिक उड़ानों से स्वदेश लौटे। बिएल्सा का कार्यकाल अब खत्म माना जा रहा है। लगातार दूसरे ग्रुप-चरण निकास ने ला सेलेस्ते की पहचान को संकट में डाल दिया है, और टीम को नई दिशा तलाशनी होगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Latin American media portrayed Uruguay's elimination as Bielsa's personal failure, describing a toxic environment and fierce criticism from former players. The coach was accused of contaminating the dressing room and being more focused on his million-dollar contract than on the team. Goalkeeper Muslera's error was just the last straw in a situation already full of tensions.
Continental European media highlighted the punishment imposed by the Uruguayan federation, which canceled the players' private return flight after the disappointing World Cup. The tone is between ironic and scandalized, emphasizing the drastic reaction to poor performance. The disciplinary aspect is highlighted more than the game dynamics.
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