
ट्रंप की पेट्रोल पंपों को दो टूक: दाम घटाओ वरना 'बड़ी मुसीबत' आएगी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुदरा विक्रेताओं को तत्काल मूल्य घटाकर 2.50 डॉलर प्रति गैलन पर लाने की चेतावनी दी, साथ ही न्याय विभाग को जांच के आदेश दिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर घोषणा की कि पेट्रोल पंप संचालकों को 'तुरंत' कीमतें कम करनी होंगी, अन्यथा 'बड़ी समस्याएं' खड़ी होंगी। उन्होंने लक्ष्य तय किया कि खुदरा दाम लगभग 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाए जाएं। यह बयान तब आया जब राष्ट्रीय औसत मूल्य 3.86 डॉलर प्रति गैलन पर बना हुआ है, जबकि कच्चे तेल का भाव गिरकर 68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है। ट्रंप ने इसे 'अवैध मुनाफाखोरी' करार देते हुए कहा कि कंपनियां कच्चे तेल की गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा रही हैं।
यह दबाव ऐसे समय में बढ़ा है जब फरवरी में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाबी हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। युद्ध के चरम पर अप्रैल के अंत में ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया था, जिससे अमेरिका में पेट्रोल का औसत मई में 4.56 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुंचा। हालांकि, अप्रैल में युद्धविराम और उसके विस्तार के बाद वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें लगभग युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आई हैं, लेकिन पंपों पर कीमतें अपेक्षाकृत धीमी गति से नीचे आ रही हैं।
प्रशासन के भीतर से भी संकेत मिले हैं कि मूल्य अंतर का एक राजनीतिक आयाम है। आंतरिक सचिव डग बर्गम ने फॉक्स न्यूज पर कहा कि 'लाल राज्यों' (रिपब्लिकन शासित) में पेट्रोल 'नीले राज्यों' (डेमोक्रेट शासित) की तुलना में औसतन 53 सेंट प्रति गैलन सस्ता है, और लोगों को वहीं ईंधन भरने की सलाह दी। कैलिफोर्निया जैसे राज्य, जहां गैस कर 63.4 सेंट प्रति गैलन तक बढ़ने वाला है, वहां कीमतें 5.45 डॉलर से ऊपर बनी हुई हैं। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कैलिफोर्निया से 'भारी कर' हटाने को कहा।
उपभोक्ताओं की नाराजगी और नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा व्हाइट हाउस के लिए संवेदनशील बना हुआ है। वाशिंगटन में एक रैली में शामिल ट्रंप समर्थकों ने कीमतों की मार स्वीकार की, लेकिन इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल की मुद्रास्फीति और ईरान संघर्ष को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने पिछले सप्ताह ही न्याय विभाग को तेल कंपनियों की जांच के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर, शेवरॉन जैसी कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर पंप तक पहुंचने में समय लगता है।
अगला ठोस कदम 30 जून को दोहा, कतर में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता है, जिसका उद्देश्य सैन्य टकराव को रोकना और युद्धविराम को स्थायी बनाना है। इसके अलावा, न्याय विभाग की जांच का दायरा और कैलिफोर्निया में कर वृद्धि का विरोध आने वाले हफ्तों में कीमतों की दिशा तय करेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
Trump's demand to lower gasoline prices to $2.50 is a populist gesture that ignores market dynamics and the energy transition. Progressive media see this move as a dangerous threat to the economy and the environment, accusing the former president of prioritizing electoral approval over responsibility. The threat of 'big problems' is interpreted as authoritarian blackmail.
Trump's demand is seen as further proof of the chaos and hypocrisy of the American system, which tries to buy consent with unattainable promises. Iranian media highlight how the US, while preaching free markets, directly intervenes on prices when convenient. The threat of 'big problems' is read as a symptom of structural US weakness.
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