
निर्माण लागत-मूल्य अंतर और किराया नियमों से वैश्विक आवास बाजार दबाव में
अर्जेंटीना में निर्माण लागत 21.75% बढ़ी जबकि पुरानी संपत्तियों के दाम पीछे, फ्रांस में बिक्री 40% गिरी, और स्पेन-स्विट्जरलैंड-भारत के नियामक किरायेदारी को नया आकार दे रहे हैं।
अर्जेंटीना के ला प्लाता क्षेत्र में निर्माण लागत सूचकांक वार्षिक आधार पर 21.75% चढ़कर 2,162,556 पेसो प्रति वर्ग मीटर (लगभग 1,450 अमेरिकी डॉलर) हो गया है, जबकि इस्तेमालशुदा आवास का बाजार मूल्य 1,300-1,500 डॉलर प्रति वर्ग मीटर पर स्थिर है। नई इमारत की प्रतिस्थापन लागत 1,700-1,800 डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे विकासकर्ता या तो लंबी वित्तीय योजनाएं (निर्माण के 24 महीने बाद 36-48 किस्तें) दे रहे हैं या सस्ती सामग्री और डिजाइन बदलाव अपना रहे हैं। इस बीच, फ्रांस में मौजूदा आवास की बिक्री तिमाही-दर-तिमाही 40% से अधिक लुढ़क गई, पर कीमतों में केवल 0.4% की गिरावट आई—उत्पादन लागत और श्रम की कमी नए मकानों के दाम ऊंचे बनाए हुए है, हालांकि सरकारी योजनाएं मांग को सहारा दे रही हैं।
दोनों बाजारों में प्रतिस्थापन लागत बाजार मूल्य से ऊपर होने का विरूपण निवेशकों को सस्ते भूखंड खरीदने और भविष्य के आर्थिक बदलाव पर दांव लगाने को प्रेरित कर रहा है, जैसा अर्जेंटीना में देखा गया जहां पिछले 20 वर्षों में लॉट की कीमतें न्यूनतम स्तर पर हैं। वहीं परिधीय क्षेत्रों में बने नए मकान नियमितीकरण के अभाव में बैंक ऋण के योग्य नहीं हैं, जिससे उनकी बिक्री बाधित हो रही है। फ्रांस में विकासकर्ता और परिवार दोनों दबाव में हैं क्योंकि क्रय क्षमता और प्रस्तावित कीमतों का अंतराल पाटा नहीं जा सका।
नियामक मोर्चे पर, स्पेन में कानून किरायेदार को न्यूनतम पाँच वर्ष (कंपनी मकान मालिक होने पर सात वर्ष) तक बने रहने का अधिकार देता है, भले ही अनुबंध छोटी अवधि का हो, और मकान मालिक केवल स्वयं के उपयोग जैसे पूर्व-उल्लिखित कारणों से ही जल्दी कब्जा पा सकता है। स्विट्जरलैंड में, कम ब्याज दरों के चलते ‘बाय टू लेट’ निवेशकों को किराया कानून की जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है—नया किरायेदार प्रारंभिक किराए को चुनौती दे सकता है यदि वह पिछले किराए से 10% अधिक है, और ‘स्थानीय प्रचलन’ साबित करने के लिए पाँच तुलनीय संपत्तियां प्रशासनिक क्वार्टर के भीतर दिखानी होती हैं, जो लगभग असंभव साबित हुआ है। भारत का मॉडल टेनेंसी एक्ट भी किराया अदालत के बिना निष्कासन पर रोक लगाता है और अवैध कब्जे पर दंड का प्रावधान करता है।
इन विनियमों से किरायेदारों को संरक्षण मिलता है, लेकिन ये निवेशकों के लिए अनिश्चितता पैदा करते हैं, जिससे किराये की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। स्विस रेंट कोर्ट में सालाना 1,300 से अधिक मामले दर्ज होते हैं, जिनमें अकेले ज्यूरिख में 400 मामले आते हैं, और निर्णय में वर्षों लग जाते हैं। भारत में करदाताओं को पुरानी व्यवस्था में एचआरए छूट का लाभ मिलता है, पर नई व्यवस्था में यह संभव नहीं, जिससे किराये के आवास की मांग पर मिलाजुला असर हो रहा है।
अगला पड़ाव: अर्जेंटीना में व्यापक आर्थिक स्थिरता की ओर इशारा करने वाले संकेतकों पर नज़र है, जो लागत-मूल्य के बीच की खाई को कम कर सकते हैं। फ्रांस में कीमतों में सुधार की संभावना और नीतिगत हस्तक्षेप का इंतजार है। स्विट्जरलैंड में किराया तुलना मानकों को आधुनिक बनाने की मांग उठ रही है, जिससे बाजार सहभागी अद्यतन नियमों की प्रतीक्षा में हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The Indian real estate market is viewed through the lens of tax benefits for rentals. Practical advice is given to optimize taxes, ignoring the gap between new constructions and secondary housing. The approach is pragmatic and taxpayer-oriented.
Spanish law guarantees tenants a minimum stay of 5 years, protecting them from market volatility. Housing stability is emphasized as a fundamental right, without considering the effect on the new construction market. The narrative is pro-regulation.
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