
अमेरिका ने 2025 में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन वृद्धि का नेतृत्व किया, कोयले की ओर वापसी
गैस की ऊंची कीमतों ने अमेरिकी बिजली उत्पादकों को कोयले की ओर धकेला, जिससे वैश्विक उत्सर्जन में एक तिहाई हिस्सा अमेरिका का रहा।
एनर्जी इंस्टीट्यूट की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन 1.1 प्रतिशत बढ़कर 35,806 मिलियन टन हो गया, जिसमें अकेले अमेरिका का योगदान लगभग एक-तिहाई रहा। अमेरिका में कोयले की खपत 10 प्रतिशत उछली, क्योंकि प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों ने बिजली उत्पादकों को सस्ते कोयले की ओर लौटने पर मजबूर किया। यह उछाल उत्तरी अमेरिका के पिछले दस वर्षों के 0.7 प्रतिशत वार्षिक उत्सर्जन गिरावट के रुझान को उलटने वाला साबित हुआ।
इसके विपरीत, चीन का उत्सर्जन केवल 0.7 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन उसकी नवीनतम पंचवर्षीय ऊर्जा योजना एक दोहरी रणनीति दिखाती है। एक ओर, 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली उत्पादन का लक्ष्य है, जिसके लिए पवन और सौर क्षमता को 2,700 गीगावाट से ऊपर ले जाना है। दूसरी ओर, कोयला उत्पादन 2025 में 4.82 अरब टन के रिकॉर्ड स्तर पर रहा, और रसायन व तरल ईंधन के लिए कोयले का उपयोग 2005 के 2 करोड़ टन से बढ़कर अनुमानित 32-38 करोड़ टन तक पहुंच गया है। यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा की चिंता से प्रेरित है, खासकर तब जब ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से चीन का मई 2026 में कच्चे तेल का आयात आठ साल के निचले स्तर 77.9 लाख बैरल प्रतिदिन पर गिर गया।
यूरोप का ऊर्जा उत्सर्जन 0.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि वैश्विक बिजली मांग में 3 प्रतिशत की वृद्धि इलेक्ट्रिक वाहनों, डेटा सेंटरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण हुई। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन 9.1 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें सौर ऊर्जा में 30 प्रतिशत की छलांग शामिल है। फिर भी, वैश्विक तेल खपत 1.3 प्रतिशत बढ़कर 10.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन पहुंच गई, और गैस की मांग यूरोप, मध्य पूर्व व उत्तरी अमेरिका में केंद्रित रही। यूरोपीय टिप्पणीकार रेखांकित करते हैं कि सभी ऊर्जा स्रोतों का विस्तार हो रहा है, लेकिन नवीकरणीय स्रोतों की दक्षता अधिक है क्योंकि जीवाश्म ईंधन या परमाणु ऊर्जा की तुलना में इनमें ऊष्मा के रूप में व्यर्थ होने वाली ऊर्जा काफी कम है।
रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि स्वच्छ ऊर्जा अभी भी जीवाश्म ईंधनों की पूरक बनी हुई है, हालांकि संरचनात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं जहां वह उनका स्थान लेने लगेगी। चीन की योजना में कोयला खपत 2030 तक चरम पर होने की बात दोहराई गई है, लेकिन कोई ठोस सीमा तय नहीं की गई। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव: 2026 की दूसरी छमाही में चीन का कोयला उत्पादन शांक्सी खदान दुर्घटना के बाद कितना पलटाव करता है, और क्या उसका कच्चे तेल का आयात स्थायी रूप से शिखर पार कर चुका है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ
चीन के तकनीकी क्षेत्र का तेज़ विस्तार ऊर्जा खपत के पैटर्न को बदल रहा है, जिससे मांग के पूर्वानुमान तेजी से अनिश्चित होते जा रहे हैं। यह संरचनात्मक बदलाव वैश्विक उत्सर्जन पर नज़र रखने और उसे रोकने के प्रयासों को जटिल बनाता है, क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता औद्योगिक विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
अमेरिकी उत्सर्जन में फिर से वृद्धि एक झटका है, लेकिन असली कहानी वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की गति है। चीन नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है जबकि अभी भी कोयले पर निर्भर है, और यूरोप को हीटवेव संकट का उपयोग जीवाश्म ईंधन से अपने बदलाव को तेज़ करने के लिए करना चाहिए।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
ट्रंप ने दोहा में ईरान से बैठक की घोषणा की, तेहरान ने किया इनकार
7 भाषाएँ · 15 स्रोत
Economy & Markets सेरूस में ईंधन संकट: पुतिन ने स्वीकारी कमी, आयात और घटिया मानकों पर विचार
4 भाषाएँ · 14 स्रोत
Technology सेWhatsApp में अब बिना नंबर चैट: यूज़रनेम रिज़र्वेशन शुरू, भारतीय सीईओ ने दी जानकारी
10 भाषाएँ · 30 स्रोत