
रूस में ईंधन संकट: पुतिन ने स्वीकारी कमी, आयात और घटिया मानकों पर विचार
यूक्रेनी ड्रोन हमलों से तेल रिफाइनरियां ठप, रूस को पहली बार विदेशों से पेट्रोल-डीज़ल मंगाने की मजबूरी; 40 से अधिक क्षेत्रों में राशनिंग लागू।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण देश में ईंधन की कमी हो रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्रीमिया से लेकर मॉस्को तक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और कई क्षेत्रों में प्रति वाहन 15-20 लीटर तक की राशनिंग आम हो गई है। प्रशासन ने तीन क्षेत्रों में आपातकाल जैसी स्थिति घोषित कर दी है, जिससे चुनाव स्थगित करने का कानूनी रास्ता भी खुल गया है।
इस संकट की जड़ यूक्रेन द्वारा पिछले कुछ हफ्तों में रूसी तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो और पाइपलाइनों पर किए गए लगातार लंबी दूरी के ड्रोन हमले हैं। अनुमानों के अनुसार, इन हमलों से रूस का पेट्रोल उत्पादन लगभग 25 प्रतिशत गिर गया है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश के लिए यह एक असामान्य स्थिति है, क्योंकि उसकी रिफाइनिंग क्षमता निर्यातोन्मुखी है और घरेलू मांग में अचानक आए अंतर को पाटने में असमर्थ साबित हो रही है।
क्रेमलिन ने स्थिति से निपटने के लिए कई असाधारण कदम उठाए हैं। उप-प्रधानमंत्री अलेक्ज़ांदर नोवाक प्रतिदिन 'मैनुअल मोड' में बाज़ार की निगरानी कर रहे हैं। सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल के निर्यात पर रोक लगा दी है और अब विदेशों से ईंधन आयात करने की संभावना तलाश रही है। प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने पुष्टि की कि कज़ाकिस्तान सहित अन्य देशों से लगभग 50,000 टन पेट्रोल मंगाने के लिए बातचीत चल रही है, हालांकि अस्ताना ने अभी तक औपचारिक अनुरोध मिलने से इनकार किया है। साथ ही, घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए 2013 में प्रतिबंधित हो चुके 'यूरो-2' जैसे निम्न गुणवत्ता मानकों को अस्थायी रूप से वापस लाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, जिससे आधुनिक वाहनों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है।
यूक्रेन की इस रणनीति का उद्देश्य रूस की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को कमज़ोर करना और जनता में असंतोष पैदा करना है। कीव ने 40-दिवसीय विशेष अभियान की घोषणा की है, जिसके तहत रूसी बुनियादी ढांचे पर हमले तेज़ किए जाएंगे। दूसरी ओर, पुतिन ने शांति वार्ता के लिए तत्परता दिखाई है, लेकिन उनकी शर्तें—चार क्षेत्रों से यूक्रेनी सेना की वापसी और नाटो सदस्यता का त्याग—अपरिवर्तित हैं। यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को ड्रोन खरीद के लिए 3.9 अरब यूरो की पहली किस्त जारी कर दी है।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए यह संकट एक नई अनिश्चितता लेकर आया है। हालांकि भारत मुख्यतः रूसी कच्चे तेल का आयात करता है, रिफाइंड उत्पादों का नहीं, फिर भी यदि रूस अपने कच्चे तेल को घरेलू रिफाइनिंग की ओर मोड़ता है या बड़े पैमाने पर उत्पाद आयात करता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और कीमतों पर पड़ सकता है। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव कज़ाकिस्तान के साथ आयात समझौते की प्रगति और 'यूरो-2' मानकों पर अंतिम निर्णय होगा, जिससे यह तय होगा कि रूस इस गर्मी में कृषि और पर्यटन सीज़न की मांग को पूरा कर पाता है या नहीं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पुतिन का ईंधन की कमी को स्वीकार करना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि रूस युद्ध हार रहा है। रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमले रूसी युद्ध मशीन को पंगु बना रहे हैं, और पश्चिम को इस अवसर का लाभ उठाकर दबाव बढ़ाना चाहिए और मास्को की सेना के पतन को मजबूर करना चाहिए।
रूस में ईंधन की कमी, जिसे पुतिन ने स्वीकार किया, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर यूक्रेनी हमलों के प्रभाव को उजागर करती है। क्रेमलिन गंभीरता को कम करके आंकता है, लेकिन उसे आयात और पर्यावरण मानकों में ढील देने पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है—कीव के लिए एक प्रतीकात्मक जीत जिसके दीर्घकालिक प्रभाव अभी भी अनिश्चित हैं।
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