
रोज़ाना थोड़ी हरकत और हफ़्ते में दो घंटे की कसरत: सेहत पर बड़ा असर
नए अध्ययन बताते हैं कि नियमित छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से दिल की बीमारी, शुगर के उतार-चढ़ाव और मांसपेशियों की कमज़ोरी का ख़तरा काफ़ी हद तक कम हो सकता है।
एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में 1,17,025 महिलाओं पर 14.5 साल तक नज़र रखी गई। जो महिलाएँ हफ़्ते में कम-से-कम दो घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती थीं, उनमें दिल की गंभीर बीमारियों का जोखिम 20 फ़ीसदी और दिल के दौरे का ख़तरा 44 फ़ीसदी तक कम पाया गया। यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ़ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ कार्डियोलॉजी' में छपा है और हालाँकि यह प्रेक्षणात्मक है, लेकिन इससे हर हफ़्ते अतिरिक्त एक घंटे की कसरत के साथ जोखिम में और गिरावट का रुझान दिखा। दूसरी ओर, 19,000 से अधिक लोगों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि हर घंटे सिर्फ़ पाँच मिनट की सैर करने से मूड बेहतर हुआ और थकान घटी। ये नतीजे बताते हैं कि लगातार बैठे रहने के नुकसान को कम करने के लिए दिन भर में छोटी-छोटी हरकतें अहम हैं।
लंबे समय तक बैठने से शरीर में शुगर और वसा को नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाएँ धीमी पड़ जाती हैं, जिससे मेटाबॉलिज़्म प्रभावित होता है और मांसपेशियाँ कमज़ोर होने लगती हैं। यात्रा के दौरान समय क्षेत्र बदलने, खाना छोड़ने, तनाव और नींद की कमी से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है, ख़ासकर डायबिटीज़ वालों के लिए। पोषण विशेषज्ञ लीसा यंग सलाह देती हैं कि सफ़र में नट्स, कम वसा वाला पनीर या सब्ज़ियों के टुकड़े जैसे सेहतमंद स्नैक्स साथ रखें और पानी की बोतल बार-बार भरकर पिएँ ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
फ़िज़ियोथेरेपिस्ट वैनेसा आंद्रादे 60 साल से ऊपर के लोगों के लिए कुर्सी के सहारे पिलाटेस की चार एक्सरसाइज़ बताती हैं: सहारे वाली स्क्वॉट, साइड लेग रेज़, पिंडली उठाना और बैठे-बैठे पैर सीधा करना। ये क्रमशः जाँघों, कूल्हों और पिंडलियों को मज़बूत करते हैं और गिरने का डर घटाते हैं। वहीं, कोच डैनी जेम्स के अनुसार, स्क्वॉट करने से प्लैंक के मुक़ाबले ज़्यादा कैलोरी खर्च होती है क्योंकि इसमें बड़े मांसपेशी समूह सक्रिय होते हैं। सही तकनीक अपनाना ज़रूरी है: पैर कूल्हे जितने खुले, घुटने पंजों से आगे न बढ़ें, वज़न एड़ियों पर रहे और कमर सीधी रहे।
विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि सिर्फ़ एक घंटे की कसरत से पूरे दिन की निष्क्रियता का असर ख़त्म नहीं होता। इसलिए हर घंटे पाँच मिनट टहलने, फ़ोन पर बात करते वक्त चलने, लिफ़्ट की बजाय सीढ़ियाँ लेने और डेस्क से उठकर सहकर्मी के पास जाने जैसी आदतें फ़ायदेमंद हैं। स्टैंडिंग डेस्क भी बिना हरकत के पूरा हल नहीं हैं। हफ़्ते में दो-तीन बार रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग करने से हड्डियों का घनत्व बढ़ता है और जोड़ों की सुरक्षा होती है।
अगला क़दम है इन आदतों को दिनचर्या में शामिल करना। शुरुआत में पाँच मिनट की सैर और हल्की स्क्वॉट से आगे बढ़ें। जिन्हें पहले से घुटने या संतुलन की समस्या है, वे डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई नई कसरत शुरू करें। नियमितता और छोटे-छोटे क़दम ही लंबी उम्र तक सक्रिय और स्वस्थ रहने की कुंजी हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एक लाख से अधिक महिलाओं पर किए गए बड़े विश्लेषण से पता चलता है कि सप्ताह में दो घंटे का शक्ति प्रशिक्षण दिल के दौरे के जोखिम को 44% तक कम कर देता है। सहनशक्ति व्यायाम के साथ मिलाने पर यह सुरक्षात्मक प्रभाव और भी बढ़ जाता है। ये निष्कर्ष दो अमेरिकी दीर्घकालिक अध्ययनों से आए हैं और एक शीर्ष हृदय रोग पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
शक्ति प्रशिक्षण को मृत्यु जोखिम कम करने के एक तरीके के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें यात्रा के दौरान रक्त शर्करा के उतार-चढ़ाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि समय क्षेत्र में बदलाव, अनियमित भोजन और तनाव ग्लूकोज स्तर को अस्थिर कर सकते हैं, और वे चयापचय संतुलन बनाए रखने के लिए छोटे व्यायाम दिनचर्या की सलाह देते हैं।
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