
विश्व कप 2026: पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी और नीदरलैंड्स बाहर, पराग्वे-मोरक्को ने रचा इतिहास
पहली बार एक ही नॉकआउट दौर में दो शीर्ष-10 टीमें बाहर, पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो पेनल्टी बचाकर जर्मनी को स्तब्ध किया।
मैसाचुसेट्स के जिलेट स्टेडियम में सोमवार रात पराग्वे ने चार बार के विश्व चैंपियन जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर अंतिम-16 में जगह बना ली। 120 मिनट तक 1-1 की बराबरी के बाद गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने काई हैवर्ट्ज़ और निक वोल्टेमाडे के प्रयास विफल किए, जबकि जोस मारिया कानाले ने छठे पेनल्टी पर निर्णायक गोल दागा। यह जर्मनी की विश्व कप इतिहास में पहली पेनल्टी शूटआउट हार है; इससे पहले टीम ने चारों मौकों पर जीत दर्ज की थी।
पराग्वे ने 16 साल बाद विश्व कप में वापसी करते हुए शुरुआती झटके में जूलियो एनसिसो के हेडर से बढ़त ली। दूसरे हाफ में हैवर्ट्ज़ ने 54वें मिनट में बराबरी दिलाई, जिसके बाद जर्मनी का दबदबा रहा। अतिरिक्त समय के 102वें मिनट में जोनाथन टाह के हेडर को वीएआर ने गिल के साथ बाधा डालने का हवाला देकर रद्द कर दिया। कोच गुस्तावो अल्फारो ने इसे “मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत” बताया और कहा कि टीम ने “26 योद्धाओं की तरह प्रवेश किया और किंवदंती बनकर बाहर निकली।” उन्होंने यह भी आगाह किया कि इस जीत को ज़रूरत से ज़्यादा तौलना ग़लत होगा, क्योंकि आगे और भी कठिन मुक़ाबले हैं।
इसी दौर में मोरक्को ने भी नीदरलैंड्स को पेनल्टी पर 3-2 से हराकर बाहर किया। कोडी गाकपो के 72वें मिनट के गोल के बाद इस्सा डियोप ने 91वें मिनट में बराबरी दिलाई। गोलकीपर यासीन बोनू ने क्रिसेन्सियो समरविले का पेनल्टी रोका और इस्माइल सैबारी ने जीत पक्की की। यह पहला अवसर है जब विश्व कप के शुरुआती नॉकआउट दौर में फीफा रैंकिंग की दो शीर्ष-10 टीमें—जर्मनी (10वीं) और नीदरलैंड्स (8वीं)—एक साथ बाहर हुई हैं।
जर्मनी की यह हार 2014 ख़िताब के बाद लगातार तीसरे विश्व कप में निराशा को दर्शाती है; 2018 और 2022 में टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थी। दूसरी ओर, पराग्वे ने 2010 के बाद पहली बार अंतिम-16 में प्रवेश किया है और अब उसका सामना 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया में फ्रांस बनाम स्वीडन मुक़ाबले के विजेता से होगा। मोरक्को की टीम भी क्वार्टर फाइनल की दावेदार बनकर उभरी है।
दक्षिण एशियाई फुटबॉल प्रशंसकों के लिए ये नतीजे इस बात की याद दिलाते हैं कि वैश्विक मंच पर अब कोई भी टीम अजेय नहीं है। भारत में भी विश्व कप की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, और ऐसे उलटफेर खेल के विस्तार और प्रतिस्पर्धा के नए आयामों को रेखांकित करते हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पराग्वे के लिए एक ऐतिहासिक रात, जिसने अपने फुटबॉल इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय लिखा। आंसुओं से भरे कोच अल्फारो के नेतृत्व में अल्बिरोहा ने जर्मन दिग्गज को पेनल्टी पर हराया, जिसमें गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो पेनल्टी रोककर वीरता दिखाई। यह सभी पूर्वानुमानों को धता बताने वाली आस्था और आत्मविश्वास की जीत थी।
जर्मनी की नवीनतम विश्व कप विफलता नाटकीय रूप ले चुकी है: पैराग्वे द्वारा 32 के दौर में बाहर किए जाने से नॉकआउट जीत का सूखा बारह वर्षों तक बढ़ गया। पेनल्टी का दुःस्वप्न, जो पहले कभी विश्व कप में नहीं हारा था, और एक मामूली प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ एक से अधिक गोल करने में असमर्थता राष्ट्रीय टीम के संरचनात्मक संकट पर बहस को फिर से हवा देती है।
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