
फ्रांस बनाम स्वीडन: नॉकआउट की असली परीक्षा में उतरेगी एमबापे की सेना
ग्रुप चरण में शत-प्रतिशत जीत के बाद फ्रांस का सामना स्वीडन से, जहां एक चूक सीधे विश्व कप से बाहर कर देगी।
न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में मंगलवार शाम जब फ्रांस और स्वीडन की टीमें मैदान पर उतरीं, तो यह सिर्फ एक प्री-क्वार्टर फाइनल नहीं था, बल्कि दो बिल्कुल विपरीत सफरों का आमना-सामना था। एक तरफ उपविजेता फ्रांस, जिसने सेनेगल, इराक और नॉर्वे को ध्वस्त करते हुए 10 गोल दागे और सिर्फ दो खाए; दूसरी ओर स्वीडन, जो ट्यूनीशिया पर 5-1 की धमाकेदार जीत के बाद नीदरलैंड्स से 1-5 से ढह गया और फिर जापान से 1-1 ड्रॉ कर किसी तरह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीम के रूप में नॉकआउट में पहुंचा।
फ्रांसीसी खेमे की ताकत उसकी आक्रामक तिकड़ी में निहित है। किलियन एमबापे ने चार गोल के साथ विश्व कप में अपने कुल 16 गोल पूरे कर लिए हैं और कोच दिदिएर देशां ने स्पष्ट किया कि उनका कप्तान “एक मिशन पर है”। उनके साथ ओस्मान डेम्बेले भी चार गोल से लैस हैं, जिन्होंने नॉर्वे के खिलाफ हैट्रिक जमाई। यूरोपीय मीडिया इस आक्रमण को टूर्नामेंट की सबसे घातक इकाई मान रहा है, हालांकि देशां ने बचाव में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। अपनी मां के निधन के बाद टीम में लौटे देशां ने कहा, “हमारे पास खतरा पैदा करने और विपक्षी को चोट पहुंचाने की क्षमता है, यही हमारी ताकत है।”
स्वीडन की कहानी एक रोलरकोस्टर जैसी रही है। ग्राहम पॉटर की टीम ने सात गोल किए, लेकिन सात ही खाए। अलेक्जेंडर इसाक और विक्टर ग्योकेरस की जोड़ी किसी भी रक्षा पंक्ति को छलनी कर सकती है। इसाक के तीन असिस्ट और एक गोल, तथा एंथनी एलांगा और यासिन अयारी के दो-दो गोल इस बात का सबूत हैं कि स्कैंडिनेवियाई टीम पलटवार में उतनी ही तेज है जितनी फ्रांस। लैटिन अमेरिकी विशेषज्ञों ने स्वीडन की अप्रत्याशितता को ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी बताया है, जबकि एशियाई मीडिया ने इसे एमबापे बनाम इसाक की व्यक्तिगत भिड़ंत के रूप में देखा।
रणनीतिक रूप से फ्रांस को स्वीडन की गति और सेट-पीस पर विशेष ध्यान देना होगा। देशां ने स्वीकारा कि “स्वीडन के पास खोने के लिए कुछ नहीं है और वे हमारे लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।” मार्कस थुराम चोट के कारण बाहर हैं, जबकि एन’गोलो कांते की फिटनेस पर संदेह है। दूसरी ओर, स्वीडन के कोच पॉटर ने कहा कि उनकी टीम को “ऐसे खेलना होगा जैसे हमारी जिंदगी इस पर निर्भर हो।”
इस मुकाबले का विजेता अगले दौर में पैराग्वे से भिड़ेगा, जो जर्मनी को पेनल्टी पर हराकर पहले ही क्वार्टर फाइनल की ओर बढ़ चुका है। फ्रांस के लिए फाइनल से कम कुछ भी विफलता माना जाएगा, जबकि स्वीडन 2018 के बाद पहली बार अंतिम आठ में जगह बनाने के इरादे से उतरा है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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फ्रांस स्पष्ट रूप से पसंदीदा है, लेकिन स्वीडन के खतरनाक आक्रमण को देखते हुए वे सतर्क हैं। इस मुकाबले को एक उच्च-वोल्टेज द्वंद्व के रूप में देखा जा रहा है, जहां एमबाप्पे की प्रतिभा निर्णायक हो सकती है, लेकिन स्वीडन के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।
फ्रांस को स्वीडन को हराने के लिए भारी पसंदीदा माना जा रहा है, जिसमें एमबाप्पे के नेतृत्व की उम्मीद है। तीसरे स्थान से क्वालीफाई करने वाली स्वीडन के सामने शानदार फॉर्म में चल रही टीम के खिलाफ कड़ी चुनौती है। विश्लेषण ग्रुप चरण के आंकड़ों और फ्रांस की जीत की संभावना पर केंद्रित है।
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