Edition of 06:00 CETबुधवार, 1 जुलाई 2026
311 स्रोत · 17 भाषाएँआज 513 ब्रीफिंग
ताज़ा खबर
बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती के बीच वैश्विक चुनौतियाँ: भारत में तनाव परीक्षण, रूस में निराशा, इंडोनेशिया में बदलावफ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से रौंदा, एमबाप्पे के दो गोल; मेस्सी के रिकॉर्ड से बस एक कदम दूरबेल्जियम-सेनेगल नॉकआउट: ग्रुप चरण की निराशा के बाद दोनों टीमों के सामने करो या मरो की चुनौतीयूक्रेन को 16 ग्रिपेन ई लड़ाकू विमानों की खरीद का करार, स्वीडन 16 पुराने विमान भी देगागर्मी में ठंडा पानी और जल्दबाजी का भोजन क्यों हैं नुकसानदेहट्रंप ने ईरान पर पूर्ण युद्ध के विकल्प पर विचार किया, फिलहाल कूटनीति पर जोरईरान में खामेनेई की अंत्येष्टि चार जुलाई से, छह दिन चलेगा राष्ट्रीय आयोजनईरान के सीधी बातचीत से इनकार से कच्चे तेल में तेजी, ब्रेंट 73 डॉलर के पारबैंकिंग क्षेत्र की मजबूती के बीच वैश्विक चुनौतियाँ: भारत में तनाव परीक्षण, रूस में निराशा, इंडोनेशिया में बदलावफ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से रौंदा, एमबाप्पे के दो गोल; मेस्सी के रिकॉर्ड से बस एक कदम दूरबेल्जियम-सेनेगल नॉकआउट: ग्रुप चरण की निराशा के बाद दोनों टीमों के सामने करो या मरो की चुनौतीयूक्रेन को 16 ग्रिपेन ई लड़ाकू विमानों की खरीद का करार, स्वीडन 16 पुराने विमान भी देगागर्मी में ठंडा पानी और जल्दबाजी का भोजन क्यों हैं नुकसानदेहट्रंप ने ईरान पर पूर्ण युद्ध के विकल्प पर विचार किया, फिलहाल कूटनीति पर जोरईरान में खामेनेई की अंत्येष्टि चार जुलाई से, छह दिन चलेगा राष्ट्रीय आयोजनईरान के सीधी बातचीत से इनकार से कच्चे तेल में तेजी, ब्रेंट 73 डॉलर के पार
रक्षा एवं सुरक्षामंगलवार, 30 जून 2026

दक्षिण लेबनान में नेतन्याहू की मौजूदगी, हिजबुल्लाह खत्म होने तक वापसी से इनकार

इज़रायली प्रधानमंत्री ने सुरक्षा क्षेत्र का दौरा कर कहा कि हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण तक सेना दक्षिण लेबनान में बनी रहेगी, जिसे अमेरिकी-मध्यस्थता वाले ढांचागत समझौते की व्यवहार्यता पर प्रश्नचिह्न माना जा रहा है।

इज़रायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को दक्षिण लेबनान में इज़रायली सेना द्वारा घोषित सुरक्षा क्षेत्र का दौरा किया और स्पष्ट किया कि जब तक हिजबुल्लाह से खतरा बना रहेगा, इज़रायली सेना वहाँ से नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री इज़रायल कात्स के साथ गए इस दौरे में उन्होंने सैनिकों को निर्देश दिया कि किसी भी खतरे की आशंका पर तुरंत कार्रवाई करें। यह बयान पिछले शुक्रवार को अमेरिकी मध्यस्थता में हुए लेबनान-इज़रायल ढांचागत समझौते के ठीक बाद आया, जिसके तहत दो पायलट क्षेत्रों से इज़रायली सेना की वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती की योजना है।

समझौते के केंद्र में हिजबुल्लाह का सत्यापित निरस्त्रीकरण है, जिसे इज़रायली पक्ष पूर्ण वापसी की शर्त मानता है। इज़रायली सैन्य सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 9,000 हिजबुल्लाह लड़ाके मारे जा चुके हैं और समूह के 150,000 रॉकेटों के भंडार का केवल 8 प्रतिशत ही बचा है। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने समझौते को संप्रभुता बहाली की दिशा में पहला कदम बताते हुए सेना को पूर्ण समर्थन दिया, जबकि संसद अध्यक्ष नबीह बेरी और हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इसे ‘थोपा गया समझौता’ और ‘अपमानजनक’ करार देते हुए लागू करने से इनकार कर दिया। अमेरिका ने इसी बीच हिजबुल्लाह की वित्तीय इकाइयों और 16 व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाकर दबाव बढ़ाया है।

क्षेत्रीय विश्लेषकों और लेबनानी राजनेताओं के अनुसार, यह समझौता संरचनात्मक रूप से कमज़ोर है क्योंकि लेबनानी राज्य के पास हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने की न तो क्षमता है और न ही राजनीतिक सहमति। बेरूत स्थित एक विश्लेषक माइकल यंग का कहना है कि इसने सारा बोझ लेबनान पर डाल दिया है और इज़रायल को अनिश्चितकाल तक दक्षिणी लेबनान में बने रहने का राजनीतिक कवच दे दिया है। लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स के विद्वान फवाज़ गर्गेस ने समझौते को ‘जन्म से ही मृत’ बताते हुए कहा कि इज़रायल ने सीमा पर लगभग 10 किलोमीटर गहरा बफर ज़ोन पहले ही स्थापित कर लिया है, जिसे कूटनीतिक वैधता मिलने का खतरा है।

यह संघर्ष फरवरी में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद 2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा एकजुटता में इज़रायल पर रॉकेट दागे जाने से शुरू हुआ। तब से लेबनान में 4,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और दस लाख से अधिक विस्थापित हुए हैं। ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम वार्ता में लेबनान से इज़रायली वापसी की मांग कर रहा है, लेकिन इज़रायल ने दोनों संघर्षों को जोड़ने का विरोध किया है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में अस्थिरता के विस्तार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर संभावित प्रभाव का संकेत है, हालाँकि नई दिल्ली ने अभी तक इस समझौते पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

फिलहाल, पायलट क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होने वाली है, लेकिन पूर्ण वापसी की कोई समय-सीमा तय नहीं है। अमेरिकी कमांड सेंट्रल के अधिकारी कार्यान्वयन की निगरानी के लिए बेरूत में मौजूद हैं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने लेबनान की यात्रा पर लगी रोक हटाकर सकारात्मक संकेत दिया है। हालाँकि, हिजबुल्लाह के कड़े विरोध और लेबनानी राजनीति के गहरे विभाजन के बीच यह डोज़ियर गतिरोध की ओर बढ़ता दिख रहा है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ

48%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
इज़राइली प्रेसईरानी और संबद्ध प्रेस
इज़राइली प्रेस/ आलोचनात्मक
संदेहव्यावहारिकता

इज़राइल और लेबनान के बीच सुरक्षा समझौता संघर्ष को सुलझाने के बजाय स्थिर कर सकता है, क्योंकि यह इज़राइली वापसी को हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर निर्भर करता है, जिसे अवास्तविक माना जाता है। विश्लेषकों का तर्क है कि इससे इज़राइल को दक्षिणी लेबनान में दीर्घकालिक सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के लिए राजनीतिक आवरण मिलता है।

ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
आक्रोशचेतावनीप्रतिशोधवाद

ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री ने कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्र में बेखौफ होकर प्रवेश किया, एक ऐसे ढांचागत समझौते की अवहेलना करते हुए जिसे संप्रभुता को मान्यता देनी थी। उनका यह बयान कि जब तक हिज़्बुल्लाह मौजूद है, कब्ज़ा करने वाली सेनाएँ रहेंगी, इस समझौते को एक दिखावा और निरंतर आक्रामकता का बहाना साबित करता है।

अपना नज़रिया बढ़ाएँ

और पढ़ें
अंतिम समाचार
बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती के बीच वैश्विक चुनौतियाँ: भारत में तनाव परीक्षण, रूस में निराशा, इंडोनेशिया में बदलाव·फ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से रौंदा, एमबाप्पे के दो गोल; मेस्सी के रिकॉर्ड से बस एक कदम दूर·बेल्जियम-सेनेगल नॉकआउट: ग्रुप चरण की निराशा के बाद दोनों टीमों के सामने करो या मरो की चुनौती·यूक्रेन को 16 ग्रिपेन ई लड़ाकू विमानों की खरीद का करार, स्वीडन 16 पुराने विमान भी देगा·गर्मी में ठंडा पानी और जल्दबाजी का भोजन क्यों हैं नुकसानदेह·ट्रंप ने ईरान पर पूर्ण युद्ध के विकल्प पर विचार किया, फिलहाल कूटनीति पर जोर·ईरान में खामेनेई की अंत्येष्टि चार जुलाई से, छह दिन चलेगा राष्ट्रीय आयोजन·ईरान के सीधी बातचीत से इनकार से कच्चे तेल में तेजी, ब्रेंट 73 डॉलर के पार·बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती के बीच वैश्विक चुनौतियाँ: भारत में तनाव परीक्षण, रूस में निराशा, इंडोनेशिया में बदलाव·फ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से रौंदा, एमबाप्पे के दो गोल; मेस्सी के रिकॉर्ड से बस एक कदम दूर·बेल्जियम-सेनेगल नॉकआउट: ग्रुप चरण की निराशा के बाद दोनों टीमों के सामने करो या मरो की चुनौती·यूक्रेन को 16 ग्रिपेन ई लड़ाकू विमानों की खरीद का करार, स्वीडन 16 पुराने विमान भी देगा·गर्मी में ठंडा पानी और जल्दबाजी का भोजन क्यों हैं नुकसानदेह·ट्रंप ने ईरान पर पूर्ण युद्ध के विकल्प पर विचार किया, फिलहाल कूटनीति पर जोर·ईरान में खामेनेई की अंत्येष्टि चार जुलाई से, छह दिन चलेगा राष्ट्रीय आयोजन·ईरान के सीधी बातचीत से इनकार से कच्चे तेल में तेजी, ब्रेंट 73 डॉलर के पार·
अपडेट 05:41 pm4 भाषाएँ · 7 स्रोत
पिछलारक्षा एवं सुरक्षाअगला
7 स्रोत|4 भाषाएँ|3 मिनट पढ़ना
मंगलवार, 30 जून 2026

दक्षिण लेबनान में नेतन्याहू की मौजूदगी, हिजबुल्लाह खत्म होने तक वापसी से इनकार

इज़रायली प्रधानमंत्री ने सुरक्षा क्षेत्र का दौरा कर कहा कि हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण तक सेना दक्षिण लेबनान में बनी रहेगी, जिसे अमेरिकी-मध्यस्थता वाले ढांचागत समझौते की व्यवहार्यता पर प्रश्नचिह्न माना जा रहा है।

इज़रायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को दक्षिण लेबनान में इज़रायली सेना द्वारा घोषित सुरक्षा क्षेत्र का दौरा किया और स्पष्ट किया कि जब तक हिजबुल्लाह से खतरा बना रहेगा, इज़रायली सेना वहाँ से नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री इज़रायल कात्स के साथ गए इस दौरे में उन्होंने सैनिकों को निर्देश दिया कि किसी भी खतरे की आशंका पर तुरंत कार्रवाई करें। यह बयान पिछले शुक्रवार को अमेरिकी मध्यस्थता में हुए लेबनान-इज़रायल ढांचागत समझौते के ठीक बाद आया, जिसके तहत दो पायलट क्षेत्रों से इज़रायली सेना की वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती की योजना है।

समझौते के केंद्र में हिजबुल्लाह का सत्यापित निरस्त्रीकरण है, जिसे इज़रायली पक्ष पूर्ण वापसी की शर्त मानता है। इज़रायली सैन्य सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 9,000 हिजबुल्लाह लड़ाके मारे जा चुके हैं और समूह के 150,000 रॉकेटों के भंडार का केवल 8 प्रतिशत ही बचा है। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने समझौते को संप्रभुता बहाली की दिशा में पहला कदम बताते हुए सेना को पूर्ण समर्थन दिया, जबकि संसद अध्यक्ष नबीह बेरी और हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इसे ‘थोपा गया समझौता’ और ‘अपमानजनक’ करार देते हुए लागू करने से इनकार कर दिया। अमेरिका ने इसी बीच हिजबुल्लाह की वित्तीय इकाइयों और 16 व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाकर दबाव बढ़ाया है।

क्षेत्रीय विश्लेषकों और लेबनानी राजनेताओं के अनुसार, यह समझौता संरचनात्मक रूप से कमज़ोर है क्योंकि लेबनानी राज्य के पास हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने की न तो क्षमता है और न ही राजनीतिक सहमति। बेरूत स्थित एक विश्लेषक माइकल यंग का कहना है कि इसने सारा बोझ लेबनान पर डाल दिया है और इज़रायल को अनिश्चितकाल तक दक्षिणी लेबनान में बने रहने का राजनीतिक कवच दे दिया है। लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स के विद्वान फवाज़ गर्गेस ने समझौते को ‘जन्म से ही मृत’ बताते हुए कहा कि इज़रायल ने सीमा पर लगभग 10 किलोमीटर गहरा बफर ज़ोन पहले ही स्थापित कर लिया है, जिसे कूटनीतिक वैधता मिलने का खतरा है।

यह संघर्ष फरवरी में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद 2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा एकजुटता में इज़रायल पर रॉकेट दागे जाने से शुरू हुआ। तब से लेबनान में 4,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और दस लाख से अधिक विस्थापित हुए हैं। ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम वार्ता में लेबनान से इज़रायली वापसी की मांग कर रहा है, लेकिन इज़रायल ने दोनों संघर्षों को जोड़ने का विरोध किया है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में अस्थिरता के विस्तार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर संभावित प्रभाव का संकेत है, हालाँकि नई दिल्ली ने अभी तक इस समझौते पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

फिलहाल, पायलट क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होने वाली है, लेकिन पूर्ण वापसी की कोई समय-सीमा तय नहीं है। अमेरिकी कमांड सेंट्रल के अधिकारी कार्यान्वयन की निगरानी के लिए बेरूत में मौजूद हैं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने लेबनान की यात्रा पर लगी रोक हटाकर सकारात्मक संकेत दिया है। हालाँकि, हिजबुल्लाह के कड़े विरोध और लेबनानी राजनीति के गहरे विभाजन के बीच यह डोज़ियर गतिरोध की ओर बढ़ता दिख रहा है।

स्रोतों में मतभेद

रक्षा एवं सुरक्षा · 7 स्रोत · 4 भाषाएँ

48%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र40%
निंदक60%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
इज़राइली प्रेसईरानी और संबद्ध प्रेस
इज़राइली प्रेस/ आलोचनात्मक
संदेहव्यावहारिकता

इज़राइल और लेबनान के बीच सुरक्षा समझौता संघर्ष को सुलझाने के बजाय स्थिर कर सकता है, क्योंकि यह इज़राइली वापसी को हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर निर्भर करता है, जिसे अवास्तविक माना जाता है। विश्लेषकों का तर्क है कि इससे इज़राइल को दक्षिणी लेबनान में दीर्घकालिक सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के लिए राजनीतिक आवरण मिलता है।

ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
आक्रोशचेतावनीप्रतिशोधवाद

ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री ने कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्र में बेखौफ होकर प्रवेश किया, एक ऐसे ढांचागत समझौते की अवहेलना करते हुए जिसे संप्रभुता को मान्यता देनी थी। उनका यह बयान कि जब तक हिज़्बुल्लाह मौजूद है, कब्ज़ा करने वाली सेनाएँ रहेंगी, इस समझौते को एक दिखावा और निरंतर आक्रामकता का बहाना साबित करता है।

यह समाचार यहाँ छपा

7 स्रोत · 4 भाषाएँ

अपना नज़रिया बढ़ाएँ

Geopolitics & Politics से

दोहा में अमेरिका-ईरान वार्ता पर असमंजस, सीधी बातचीत से तेहरान का इनकार

5 भाषाएँ · 13 स्रोत

Economy & Markets से

अमेरिका नहीं बढ़ाएगा टी-मेक की अवधि, 2036 तक उलटी गिनती शुरू; मेक्सिको-कनाडा ने 16 साल के विस्तार का समर्थन किया

3 भाषाएँ · 12 स्रोत

Technology से

WhatsApp में अब बिना नंबर चैट: यूज़रनेम रिज़र्वेशन शुरू, भारतीय सीईओ ने दी जानकारी

5 भाषाएँ · 7 स्रोत

और पढ़ें