
डेनमार्क के तट पर पुतिन की सुपरयॉट ग्रेसफुल का काफिला: रूसी युद्धपोतों के साथ इस्तांबुल की ओर रवाना
रूसी राष्ट्रपति से जुड़ी 82 मीटर लंबी लक्ज़री नौका ग्रेसफुल, जिसका ट्रांसपोंडर अगस्त 2022 से बंद था, सोमवार को डेनमार्क के जलक्षेत्र में एक विध्वंसक और गश्ती नौका के साथ दिखी।
सोमवार को डेनमार्क के समुद्री क्षेत्र में रूसी युद्धपोतों के साथ चल रही एक सुपरयॉट की मौजूदगी ने यूरोपीय निगरानी एजेंसियों का ध्यान खींचा। समुद्री यातायात डेटा और तट से ली गई तस्वीरों के अनुसार, 82 मीटर लंबी नौका 'ग्रेसफुल', जिसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का निजी जहाज बताता है, एक रूसी विध्वंसक और गश्ती नौका 'वोएवोद' के साथ कट्टेगाट जलडमरूमध्य से गुज़री। इसका ट्रांसपोंडर 30 अगस्त 2022 से बंद था, जिसके बाद यह पहली बार रडार पर दिखाई दी। समुद्री खुफिया प्लेटफॉर्म स्टारबोर्ड मैरीटाइम के अनुसार, जहाज का गंतव्य इस्तांबुल दर्शाया गया है।
डेनमार्क की रक्षा कमान ने पुष्टि की कि उसके और जर्मन तटरक्षक बल के पोत रविवार सुबह से बारी-बारी से इस काफिले की निगरानी कर रहे हैं। डेनमार्क का गश्ती पोत P521 'फ्रेया' फिलहाल इन जहाजों के पीछे चल रहा है। रूसी पक्ष की ओर से इस काफिले के उद्देश्य या गंतव्य पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। नाटो स्रोतों के अनुसार, यह असामान्य काफिला बाल्टिक सागर से उत्तरी सागर की ओर बढ़ रहा है, और इसकी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
ग्रेसफुल का इतिहास प्रतिबंधों और गोपनीयता से जुड़ा रहा है। अमेरिकी वित्त विभाग ने जून 2022 में इसे उन चार नौकाओं में शामिल किया था जिन पर प्रतिबंध लगाए गए, क्योंकि ये रूसी राष्ट्रपति से जुड़ी थीं। यूरोपीय संघ के दस्तावेजों के अनुसार, यूक्रेन पर हमले से ठीक पहले फरवरी 2022 में इस नौका को जर्मनी के हैम्बर्ग शिपयार्ड से निकालकर कलिनिनग्राद ले जाया गया था। अलेक्सी नवलनी की भ्रष्टाचार विरोधी जांच टीम ने दावा किया था कि बाद में इसका नाम बदलकर 'कोसाटका' कर दिया गया। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह नौका अक्टूबर 2022 में एस्टोनिया के तट के पास सेंट पीटर्सबर्ग की ओर जाते हुए देखी गई थी। 100-120 मिलियन डॉलर की अनुमानित कीमत वाली यह नौका पुतिन की दूसरी सबसे बड़ी नौका मानी जाती है, और इसे पहले सोची में उनकी मौजूदगी के दौरान कई बार देखा गया था।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य से, यह घटना रूस की समुद्री संपत्तियों की आवाजाही और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच तनाव को रेखांकित करती है। भारत, जो रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंध बनाए हुए है, के लिए ऐसे घटनाक्रम अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे वैश्विक समुद्री निगरानी और प्रतिबंध व्यवस्थाओं के विकास को दर्शाते हैं। यह पहली बार नहीं है जब पुतिन से जुड़ी किसी नौका ने सुर्खियाँ बटोरी हैं; मई 2022 में इटली में 'शेहरज़ादे' नामक एक अन्य सुपरयॉट को हिरासत में लिया गया था, जिसके मालिक के रूसी सत्ता प्रतिष्ठान से संबंध होने की बात इतालवी जांचकर्ताओं ने कही थी। फिलहाल, डेनमार्क और नाटो की निगरानी जारी है, और काफिले के स्कागन पहुँचने के बाद उसके अगले कदम पर सभी की नज़र है। रूसी अधिकारियों की चुप्पी इस मामले को और रहस्यमय बनाए हुए है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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लगभग तीन वर्षों तक अपना ट्रांसपोंडर बंद रखने के बाद, राष्ट्रपति पुतिन से जुड़ी सुपरयॉट डेनमार्क के जलक्षेत्र में एक रूसी विध्वंसक और गश्ती नौका के साथ फिर से नज़र आई है। यह जहाज इस्तांबुल की ओर बढ़ रहा है जबकि डेनमार्क और जर्मनी के समुद्री अधिकारी इसकी गतिविधियों पर नज़र रखे हुए हैं। इसकी पुनः उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध के बावजूद विलासिता संपत्तियों के निरंतर उपयोग को उजागर करती है।
राष्ट्रपति यॉट ग्रेसफुल सहित एक रूसी काफिला रात में डेनमार्क की जलडमरूमध्य से गुज़रा और आज दोपहर स्केगन का चक्कर लगाने की उम्मीद है। डेनमार्क और जर्मनी के तटरक्षक इस यात्रा पर नज़र रख रहे हैं, लेकिन अंतिम गंतव्य स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट सत्यापित ट्रैकिंग डेटा और आधिकारिक अवलोकनों पर आधारित है।
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