
खून से सनी स्कार्प और पाँच सेट की जंग: सिनर ने विम्बलडन में बचाई लाज
गत चैंपियन यानिक सिनर पहले दौर में सर्बिया के केचमानोविच के ख़िलाफ़ दो बार पिछड़े, गिरने से पैर लहूलुहान हुआ, फिर भी पाँच सेट तक चले मुक़ाबले में जीत दर्ज की।
सेंटर कोर्ट पर डिफेंडिंग चैंपियन का पहला क़दम ही लड़खड़ा गया, लेकिन यानिक सिनर ने हिम्मत नहीं हारी। विश्व के नंबर एक खिलाड़ी ने सोमवार को विम्बलडन के शुरुआती मुक़ाबले में सर्बिया के मिओमिर केचमानोविच को 4-6, 6-3, 6-7(6), 6-2, 6-3 से हराया। तीन घंटे तीस मिनट तक चली इस टक्कर में सिनर दो बार एक सेट से पिछड़े, तीसरे सेट में बुरी तरह फिसले और उनके दाएँ जूते पर खून का धब्बा फैलता गया। बावजूद इसके, उन्होंने आख़िरी दो सेटों में दबदबा बनाते हुए जीत पक्की की और दूसरे दौर में जगह बनाई।
मैच का रुख़ शुरू से ही उलटबाँस भरा रहा। पहले सेट में सिनर 4-4 पर 40-0 से आगे थे, तभी दो डबल फ़ॉल्ट समेत लगातार अंक गँवाकर ब्रेक दे बैठे और सेट 6-4 से हार गए। दूसरे सेट में उन्होंने तुरंत ब्रेक लेकर 3-0 की बढ़त बनाई और 6-3 से बराबरी कर ली। तीसरा सेट टाईब्रेक तक खिंचा, जहाँ सिनर के पास सेट प्वाइंट था, लेकिन केचमानोविच ने शानदार बचाव करते हुए उसे बचाया और 8-6 से सेट जीत लिया। इसी सेट के दौरान 2-2 पर सिनर पीछे की ओर दौड़ते हुए फिसलकर गिरे, बायाँ घुटना मुड़ गया और वे कुछ पल ज़मीन पर ही रहे। इसी गिरावट से दाएँ पैर की उँगली का नाखून टूट गया, जिससे सफ़ेद जूते पर लाल धब्बा उभर आया।
इससे पहले सिनर लगातार पाँच पाँच-सेटीय मुक़ाबले हार चुके थे और ग्रैंड स्लैम में उनका पाँच सेटों का रिकॉर्ड 6-11 का कमज़ोर था। पिछले महीने रोलाँ गैरों में दूसरे दौर में आर्जेंटीना के सेरुंदोलो से मिली हार के बाद यह उनका पहला प्रतिस्पर्धी मैच था। तब गर्मी और शारीरिक कमज़ोरी के चलते वे दो सेट और 5-1 की बढ़त गँवा बैठे थे। इस बीच उन्होंने कोई वॉर्म-अप टूर्नामेंट नहीं खेला, बल्कि मिलान के अस्पताल में जाँच करवाई और मोंटे कार्लो में हार्ड कोर्ट पर अभ्यास किया। विम्बलडन में कार्लोस अल्काराज़ की अनुपस्थिति ने सिनर को प्रबल दावेदार बना दिया था, लेकिन पहले ही मैच ने याद दिला दिया कि घास पर लय पकड़ना आसान नहीं होता।
मैच के बाद सिनर ने कहा, “शुरुआत में मैं थोड़ा तनाव में था, अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस नहीं खेल पाया। यह इस साल घास पर मेरा पहला आधिकारिक मैच था।” खून के धब्बे पर उन्होंने हल्के अंदाज़ में कहा, “यह दिखने में जितना बुरा लगता है, उतना है नहीं—बस एक नाखून है। मुझे हैरानी है कि मुझे खेलने दिया गया, क्योंकि सफ़ेद पोशाक का नियम टूट गया था।” उन्होंने यह भी बताया कि वे केचमानोविच का ताल बिगाड़ना नहीं चाहते थे, इसलिए मेडिकल टाइम-आउट नहीं लिया।
इस जीत के साथ सिनर ने इटली के निकोला पीत्रांजेली के 94 टूर-स्तरीय जीतों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। अब उनका सामना दूसरे दौर में पुर्तगाल के नूनो बोर्जेस से होगा, जिन्होंने अमेरिकी क्वालीफ़ायर ट्रिस्टन बॉयर को सीधे सेटों में हराया। सिनर के लिए यह मैच सिर्फ़ अगले चरण का टिकट नहीं, बल्कि लय और आत्मविश्वास की तलाश का अगला पड़ाव होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जैनिक सिनर ने विंबलडन में दर्दनाक शुरुआत की, गिरने और पैर में चोट लगने से उनके जूते पर खून लग गया। दर्द और डर के बावजूद, उन्होंने दो सेट से पिछड़ने के बाद पाँच सेटों में जीत हासिल की, एक सच्चे योद्धा का दिल दिखाया। जूते पर लाल धब्बा संघर्षपूर्ण जीत का प्रतीक बन गया।
गत विजेता ने गलत किस्म का इतिहास रचने का जोखिम उठाया, एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ पहले दो सेट गंवा दिए जिसने पहले कभी उनसे एक भी सेट नहीं जीता था। अंततः उन्होंने जल्दी बाहर होने से बच निकले, लेकिन इस प्रदर्शन ने पेरिस में स्वास्थ्य संबंधी हार के बाद उनकी फॉर्म पर नए सवाल खड़े कर दिए।
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