
होर्मुज प्रबंधन पर ईरान-ओमान की पहली बैठक: टोल का विरोध, सेवा शुल्क पर चर्चा की गुंजाइश
ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के भावी प्रशासन पर पहली संयुक्त समिति की बैठक हुई, जिसमें ओमान ने जहाजों से मार्ग-कर वसूलने का विरोध किया लेकिन समुद्री सेवाओं के शुल्क पर बातचीत के लिए सहमति जताई।
ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन पर पहली औपचारिक बैठक मस्कट में आयोजित की। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसईदी ने सोमवार को रेडियो मोंटे कार्लो से कहा कि उनका देश जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों पर कोई टोल या मार्ग-कर लगाए जाने का समर्थन नहीं करता, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत होगा। साथ ही उन्होंने यह संभावना खोली कि नौवहन सुरक्षा बढ़ाने, प्रदूषण से निपटने और आपातकालीन तैयारियों जैसी ठोस समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिए जाने पर चर्चा हो सकती है। ईरानी उप विदेश मंत्री काज़िम ग़रीबाबादी ने इसी बैठक के बाद स्पष्ट किया कि जलडमरूमध्य का प्रबंधन अब पुरानी स्थिति में नहीं लौटेगा और तटीय राज्यों के संप्रभु अधिकारों के तहत नई व्यवस्था बनेगी।
दोनों पक्षों के बयानों में एक बुनियादी अंतर उभरकर सामने आया है। ओमान ने समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि जलडमरूमध्य में आवाजाही सबके लिए सुरक्षित और मुक्त रहनी चाहिए। ओमानी विदेश मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि कोई भी भावी सहमति अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर नहीं जा सकती। दूसरी ओर, ईरानी उप विदेश मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि जलडमरूमध्य पर संप्रभुता का अधिकार ईरान को है और वह 1968 में तय किए गए नौवहन मार्गों को बदलना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरंग-सफ़ाई की ज़िम्मेदारी पूरी तरह ईरान की है और किसी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी दौरान ओमान ने संयुक्त राष्ट्र के समन्वय से एक अस्थायी समुद्री गलियारा खोला था, जिसे ईरान ने खारिज करते हुए केवल अपने तट के निकट वाले मार्ग को ही मान्यता दी।
यह मतभेद एक ऐसे समय सामने आया है जब इस्लामाबाद ज्ञापन के तहत 60 दिनों की अंतरिम अवधि के बाद स्थायी प्रबंधन ढाँचा तय किया जाना है। ज्ञापन के पैरा पाँच के अनुसार, ईरान इस दौरान बिना किसी शुल्क के वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा और फिर ओमान के साथ भावी प्रशासन व समुद्री सेवाओं पर बातचीत करेगा। होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से अहम है, और हाल के दिनों में दो टैंकरों पर हमलों तथा अमेरिकी कार्रवाइयों के बाद यहाँ नौवहन में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हुए किसी भी तरह के टोल का विरोध करता है, जबकि ईरान UNCLOS का पक्षकार नहीं है और सेवा-शुल्क को अपना संप्रभु अधिकार बताता है।
फ़िलहाल दोनों देशों ने अगले सात-आठ दिनों में तकनीकी समितियों की बैठक शुरू करने का निर्णय लिया है, जो नौवहन मार्गों में बदलाव और प्रबंधन की बारीकियों पर काम करेंगी। ईरान ने इस सप्ताह क़तर में अमेरिकी तकनीकी दल के साथ किसी बैठक की ख़बरों का खंडन किया है। संयुक्त समिति अन्य तटीय देशों से भी विचार-विमर्श जारी रखेगी। इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा तय करेगा कि 60 दिनों की अंतरिम व्यवस्था के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन का स्वरूप क्या होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Oman's rejection of tolls is framed as a legitimate assertion of sovereignty against external pressure. The move is portrayed as a pragmatic step to protect national interests without escalating tensions. Iran is shown as supporting Oman's right to control its waters.
Gulf media report Oman's decision with a focus on its economic and legal implications. The tone is measured, highlighting the distinction between tolls and service fees. The coverage emphasizes the need for stability in the Strait of Hormuz.
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