
अल नीनो की तीव्र वापसी: सूखा, बाढ़ और फसल बर्बादी की आशंका
प्रशांत महासागर के गर्म होने से उपजा अल नीनो 2026-27 में अत्यंत प्रबल रहने का अनुमान, इंडोनेशिया से अर्जेंटीना तक सरकारें मुस्तैद।
अमेरिकी राष्ट्रीय समुद्रीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) ने 11 जून को पुष्टि की कि ग्रह अल नीनो के सक्रिय चरण में प्रवेश कर चुका है, और इसके नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच ‘अत्यंत प्रबल’ श्रेणी तक पहुंचने की 63 प्रतिशत संभावना है। इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एजेंसी बीएमकेजी के अनुसार, इसका सर्वाधिक प्रभाव जुलाई से अक्टूबर 2026 के शुष्क मौसम में महसूस होगा। इन आकलनों के मद्देनजर इंडोनेशिया के गृह मंत्री ने सभी क्षेत्रीय प्रमुखों को वन एवं भूमि अग्नि, जल संकट तथा कृषि-ऊर्जा व्यवधानों से निपटने के लिए तत्काल समन्वय बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। कोलंबिया के जलवायु संस्थान आइडेआम ने भी चेतावनी दी है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच अत्यधिक सूखे की आशंका है, जिससे नदियों का जलस्तर घटेगा और जलाशयों पर दबाव बढ़ेगा।
कृषि क्षेत्र पर क्षेत्रीय प्रभाव की अलग-अलग तस्वीर उभर रही है। फिच सॉल्यूशंस के विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम अफ्रीका में कोको उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा: कोट डी आइवर में 2026-27 का उत्पादन 17.5 प्रतिशत गिरकर 17 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि घाना का उत्पादन स्थिर रह सकता है। संस्था ने छोटे किसानों की सीमित सिंचाई क्षमता, वृद्ध वृक्ष भंडार और उर्वरक की ऊंची कीमतों को संकट गहराने वाले कारक बताया है। दक्षिण अमेरिका में अर्जेंटीना के कोरिएंतेस प्रांत के लोक निर्माण मंत्री ने अगस्त से शुरू होने वाली भारी वर्षा और बाढ़ की चेतावनी दी है, जिससे 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हो सकता है और पशुधन को बचाने के लिए आपातकालीन नीलामी जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं।
ऊर्जा और जल आपूर्ति पर भी दबाव के संकेत स्पष्ट हैं। ब्राजील की मौसम विज्ञान कंपनी टेंपो ओके के सीईओ के विश्लेषण में कहा गया है कि दक्षिणी ब्राजील में औसत से अधिक वर्षा से जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन उत्तर-पूर्व में कम बारिश और पूरे देश में तापमान बढ़ने से बिजली की मांग बढ़ेगी, जिससे ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कोलंबिया में इस समय जलाशय 74 प्रतिशत भरे हुए हैं, जो जनवरी की असामान्य बारिश का परिणाम है, लेकिन आइडेआम ने आगाह किया है कि लंबे सूखे से यह भंडार तेजी से घट सकता है और पेयजल, सिंचाई तथा पनबिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इंडोनेशिया में भी कृषि मंत्रालय सिंचाई और पंप प्रणाली मजबूत कर रहा है, जबकि आपदा एजेंसी बीएनपीबी आवश्यकतानुसार कृत्रिम वर्षा कराएगी।
एनओएए के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, 1950 के बाद से अब तक के सबसे तीव्र अल नीनो घटनाक्रमों—1982-83, 1997-98, 2015-16 और 2023-24—की श्रृंखला में यह नया चक्र जुड़ सकता है, जो चरम मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति को रेखांकित करता है। वैश्विक स्तर पर अगले कदमों में इंडोनेशिया में क्षेत्रीय आपदा एजेंसियों, कृषि विभागों और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बैठकें, कोलंबिया में जल संकट आकस्मिक योजनाओं की समीक्षा, तथा अर्जेंटीना में बुनियादी ढांचे की मरम्मत और पशुधन प्रबंधन प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देना शामिल है। सभी प्रभावित देशों में स्थानीय प्रशासन को आंकड़ों पर आधारित तैयारी और जन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अल नीनो के चरम महीनों से पहले नुकसान को सीमित किया जा सके।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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सरकार क्षेत्रीय नेताओं को आगामी अल नीनो के खिलाफ शमन उपायों को मजबूत करने का निर्देश दे रही है। ध्यान जंगल की आग, पानी की कमी और कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में व्यवधानों को रोकने पर है। दृष्टिकोण व्यावहारिक और तैयारी-उन्मुख है, शुष्क मौसम से पहले समन्वय पर जोर देता है।
अल नीनो से पूरे क्षेत्र में विपरीत प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, कुछ क्षेत्रों में भीषण सूखे से लेकर अन्य में अत्यधिक बाढ़ तक। ऊर्जा बाजार, कृषि और जलाशय खतरे में हैं, गंभीर जटिलताओं की चेतावनी के साथ। कथा आर्थिक चिंता को तत्काल अनुकूलन के आह्वान के साथ मिलाती है।
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