
रूसी गैस टैंकर पर पहली बार भारी हथियार, बाल्टिक में बढ़ा तनाव
गैज़प्रोम के टैंकर 'मार्शल वासिलेव्स्की' पर दो बड़ी मशीनगनें और सैन्यकर्मी मौजूद, पश्चिमी देशों के लिए नया संकेत।
रूसी ऊर्जा कंपनी गैज़प्रोम के स्वामित्व वाले गैस टैंकर 'मार्शल वासिलेव्स्की' पर पहली बार भारी सैन्य हथियार लगाए गए हैं। मई 2026 में एस्टोनियाई सीमा रक्षक विमान से ली गई तस्वीरों में जहाज़ के ब्रिज पर दो 12.7 मिमी कॉर्ड मशीनगनें और सुरक्षा के लिए रेत के बोरे दिखाई दिए। यह पहला ज्ञात मामला है जब किसी रूसी नागरिक पोत को इस तरह हथियारों से लैस किया गया हो। जहाज़ बाल्टिक सागर में रूसी मुख्यभूमि से कालिनिनग्राद तक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति करता है और यह रूस की एकमात्र तैरती रीगैसीकरण इकाई भी है।
एस्टोनियाई अधिकारियों और पत्रकारीय जांच समूहों के अनुसार, अगस्त 2025 से इस जहाज़ पर 50 यात्री सवार हुए, जिनमें से कम से कम 22 रूसी सेना, एफ़एसबी या रोसग्वार्दिया में सेवारत थे। बाल्टिक क्षेत्र की एक खुफिया एजेंसी के सूत्र ने बताया कि यह हथियार '50 प्रतिशत यूक्रेनी समुद्री ड्रोनों से बचाव और 50 प्रतिशत पश्चिम को संकेत' के लिए हैं। पश्चिमी सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन मशीनगनों का मुख्य उद्देश्य नाटो देशों द्वारा जहाज़ को रोकने या उस पर चढ़ने की किसी कार्रवाई को हतोत्साहित करना है, क्योंकि ऐसी स्थिति में चेतावनी भरी गोलीबारी से तनाव बढ़ सकता है।
कानूनी रूप से यह मामला धूसर क्षेत्र में है। समुद्री कानून के जानकारों के अनुसार, किसी व्यापारिक जहाज़ पर हथियार होना अपने आप में अवैध नहीं है, बशर्ते जहाज़ शांतिपूर्ण मार्ग का पालन कर रहा हो। 'मार्शल वासिलेव्स्की' किसी प्रतिबंध के दायरे में नहीं है और रूसी ध्वज के साथ खुलेआम संचालित होता है, इसलिए नाटो सदस्यों के पास इसे रोकने का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। फिर भी, बाल्टिक सागर में पिछले कुछ महीनों में समुद्री केबलों को नुकसान पहुँचाने की संदिग्ध घटनाओं के बाद नाटो ने गश्त बढ़ा दी है, और स्वीडन व अन्य देशों ने रूसी शैडो बेड़े के कई जहाज़ों को हिरासत में लिया है।
यह घटनाक्रम मार्च 2026 में भूमध्य सागर में एक अन्य रूसी एलएनजी टैंकर 'आर्कटिक मेटागाज़' पर हुए संदिग्ध यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद सामने आया है, जिसमें जहाज़ को भारी क्षति पहुँची थी। हालाँकि विशेषज्ञ इस बात पर संदेह जताते हैं कि बाल्टिक सागर में यूक्रेनी समुद्री ड्रोनों का इस्तेमाल संभव है, क्योंकि इसके लिए किसी तटवर्ती नाटो देश का क्षेत्र इस्तेमाल करना होगा। रूसी अधिकारियों ने अभी तक इस हथियारबंदी पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। गैज़प्रोम ने भी पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया। फ़िलहाल, नाटो देश स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं और किसी ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पश्चिमी मीडिया ने एक रूसी नागरिक जहाज पर हथियारों की तस्वीरें प्रसारित कीं, लेकिन यह ऊर्जा माल की सुरक्षा के लिए एक रक्षात्मक कदम है। रूस बाल्टिक में अपने जहाजों के खिलाफ बार-बार निरीक्षण और धमकियों का जवाब दे रहा है।
रूस बाल्टिक में एक खतरनाक वृद्धि करते हुए अपने नागरिक गैस टैंकरों को भारी मशीनगनों और सैन्य कर्मियों से लैस कर रहा है। नाटो निरीक्षणों के बाद यह अभूतपूर्व कदम नागरिक शिपिंग के सैन्यीकरण के बारे में गंभीर चिंताएँ पैदा करता है।
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