
रूसी तेल आयात पर रोक: बाल्टिक देशों का यूरोपीय संघ से शीघ्र कार्रवाई का आग्रह
एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया ने अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ऊर्जा संकट की आशंका कम होने का हवाला देते हुए यूरोपीय संघ से रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया तेज़ करने को कहा है।
एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया ने 26 जून को यूरोपीय संघ के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में रूसी कच्चे तेल के आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध के प्रस्ताव को शीघ्र प्रस्तुत करने का आह्वान किया। फाइनेंशियल टाइम्स के सूत्रों के अनुसार, यह मांग ऐसे समय में उठी जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन से होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में आए व्यवधान के दूर होने की संभावना है। इससे पहले, अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद जलडमरूमध्य बंद होने से ऊर्जा संकट की आशंका के चलते यूरोपीय आयोग ने मार्च में इस प्रस्ताव को अपनी प्रारंभिक कार्यसूची से हटा दिया था।
बाल्टिक देशों की इस पहल को पोलैंड का भी समर्थन मिला। पोलैंड के ऊर्जा मंत्री वोयचेक व्रोहना ने कहा कि वर्ष के अंत तक रूसी तेल आपूर्ति से पूर्ण अलगाव आवश्यक है, भले ही इससे कीमतों और प्रतिस्पर्धात्मकता पर दबाव पड़े। यूरोपीय आयुक्त डैन जोर्गेनसन ने बंद कमरे की बैठक में इस मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन बाद में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यूरोप में विमान ईंधन की कमी से बचा जा सकेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी समझौते की स्थिति में भी तेल बाज़ार को सामान्य होने में कई महीने और गैस बाज़ार को कई वर्ष लग सकते हैं।
प्रतिबंध के रास्ते में हंगरी और स्लोवाकिया जैसे सदस्य देशों का विरोध संभावित बाधा है, जो रूसी तेल पर अत्यधिक निर्भर हैं और ऊंची ऊर्जा कीमतों से जूझ रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ की निर्णय प्रक्रिया में कोई एक देश इस प्रतिबंध पर वीटो नहीं लगा सकता, फिर भी राजनीतिक प्रतिरोध मजबूत है। इसी बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन हंगरी और स्लोवाकिया के साथ रूसी ऊर्जा आयात समाप्त करने पर चर्चा करेगा। दोनों देश पहले ही रूसी गैस आयात पर लगे प्रतिबंध को यूरोपीय न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा कर चुके हैं।
यूरोपीय संघ पहले ही रूसी एलएनजी पर 2027 से और पाइपलाइन गैस पर सितंबर 2027 से पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका है, जबकि समुद्री मार्ग से रूसी तेल पर मूल्य सीमा 60 डॉलर प्रति बैरल से घटाकर 44.1 डॉलर कर दी गई है। तेल आयात पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव अप्रैल में चर्चा के लिए आना था, लेकिन मार्च में इसे स्थगित कर दिया गया। अब बाल्टिक देशों के दबाव और अमेरिका-ईरान वार्ता से उपजी नई परिस्थितियों के बीच यह मुद्दा पुनः सक्रिय हुआ है, हालांकि अभी तक कोई नई तिथि तय नहीं की गई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
खाड़ी में युद्धविराम के बाद, बाल्टिक देश ब्रसेल्स पर रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध की स्थगित योजना को पुनर्जीवित करने का दबाव डाल रहे हैं। ऊर्जा संकट की आशंकाओं के कारण यह प्रस्ताव टाल दिया गया था, लेकिन अब तीनों देश यूरोपीय संघ से कार्रवाई का आग्रह कर रहे हैं।
बाल्टिक देश खाड़ी में अस्थायी शांति का फायदा उठाकर रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यूरोपीय संघ गहराई से विभाजित है। हंगरी और स्लोवाकिया इस उपाय का विरोध करते हैं, और यूरोपीय आयोग चुप है। यह पहल एक नए ऊर्जा संकट के वास्तविक जोखिम और रूसी आपूर्ति को बदलने की जटिलता को नजरअंदाज करती है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
यूरोपीय संघ और चीन के बीच व्यापार असंतुलन पर तीन महीने की बातचीत, अक्टूबर तक 'ठोस नतीजों' की समयसीमा
8 भाषाएँ · 16 स्रोत
Technology सेWhatsApp में अब बिना नंबर चैट: यूज़रनेम रिज़र्वेशन शुरू, भारतीय सीईओ ने दी जानकारी
7 भाषाएँ · 36 स्रोत
Science & Health सेकांगो में इबोला का चौथे प्रांत में विस्तार, फ्रांस में पहला मामला; बुंदिबुग्यो स्ट्रेन पर नियंत्रण की चुनौती
6 भाषाएँ · 12 स्रोत