
हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण तक दक्षिण लीबनान से नहीं हटेगा इज़राइल: रक्षा मंत्री काट्ज़
अमेरिकी मध्यस्थता में हुए समझौते को इज़राइल ने ईरानी गठबंधन पर रणनीतिक प्रहार बताया, जबकि हिज़्बुल्लाह और ईरान ने इसे अस्वीकार कर दिया।
इज़राइली रक्षा मंत्री यिसराइल काट्ज़ ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और लेबनान के साथ हस्ताक्षरित समझौता एक "ऐतिहासिक घटना" है और यह इज़राइल के लिए राजनीतिक व सुरक्षा उपलब्धि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पूरे लेबनान में हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र नहीं किया जाता, इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी और बुफ़ोर क़िले सहित सुरक्षा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखेगी। काट्ज़ के अनुसार, यह क्षेत्र आबादी और हिज़्बुल्लाह के भूमिगत व ज़मीनी बुनियादी ढाँचे से खाली रहेगा, और किसी भी ख़तरे को विफल करने के लिए इज़राइली सेना को सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता हासिल होगी।
इज़राइली रक्षा मंत्री के बयान के अनुसार, यह समझौता ईरानी गठबंधन के लिए एक रणनीतिक झटका है, क्योंकि तेहरान ने अमेरिका पर दबाव डालकर इज़राइल की वापसी सुनिश्चित करने का प्रयास किया था, लेकिन असफल रहा। दूसरी ओर, लेबनानी सरकार ने शुक्रवार को वाशिंगटन में इस प्रारंभिक ढाँचे पर हस्ताक्षर किए, जिसे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहला क़दम बताते हुए कहा कि अभी बहुत काम बाकी है। हालाँकि, हिज़्बुल्लाह के महासचिव नईम क़ासिम ने इस समझौते को "बातिल" और लेबनानी सरकार का आत्मसमर्पण करार दिया। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी इसे अमेरिका और इज़राइल की साजिश बताया, जिसका उद्देश्य "प्रतिरोध की धुरी" को कमज़ोर करना और हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करना है।
पश्चिम एशियाई विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता दशकों बाद उत्तरी सीमा पर एक नई सुरक्षा वास्तविकता स्थापित कर सकता है, लेकिन हिज़्बुल्लाह और ईरान के कड़े विरोध के कारण इसका कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा। इज़राइल ने स्पष्ट किया है कि वह सुरक्षा क्षेत्र को आबादी और हिज़्बुल्लाह के बुनियादी ढाँचे से खाली रखेगा और किसी भी ख़तरे को विफल करने के लिए सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता बनाए रखेगा। यह शर्त हिज़्बुल्लाह के लिए अस्वीकार्य है, जो लेबनानी राजनीति और सुरक्षा ढाँचे में गहराई से शामिल है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए उपयुक्त है जो बाहरी हस्तक्षेपों से पीड़ित रहे हैं, लेकिन अभी कई दौर की बातचीत और कार्यान्वयन की परीक्षा बाकी है। इज़राइली रक्षा मंत्री ने भी स्वीकार किया कि समझौते के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ हैं और सेना को सुरक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक रहने की तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, ईरान को किसी भी हस्तक्षेप पर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी गई है। फ़िलहाल, यह समझौता एक प्रारंभिक रूपरेखा है, और अंतिम शांति समझौते की दिशा में अगले क़दमों की घोषणा अपेक्षित है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.20 | neutral |
Lebanon denounces the agreement as a surrender imposed by Israel and the United States, while religious authorities warn it undermines national sovereignty.
Religious authority is invoked to delegitimize the agreement, presenting it as a violation of national and Islamic principles, and Hezbollah's own perspective is omitted.
Hezbollah's direct position and the details of Israeli security guarantees that motivate the refusal to withdraw are absent.
The Lebanese government reaffirms its sovereignty by removing Iranian symbols, signaling that Lebanon comes first, not foreign interests.
A symbolic event (poster removal) is selected to represent a policy shift, avoiding discussion of Israeli conditions for withdrawal and the disarmament of Hezbollah.
The Israeli demand for Hezbollah's disarmament as a condition for withdrawal is omitted, as is the context of the ongoing occupation.
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