
व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर भारत में अटका, सरकार ने सुरक्षा आकलन तक रोक लगाई
नए प्राइवेसी अपडेट से ऑनलाइन धोखाधड़ी बढ़ने की आशंका पर भारत ने रोलआउट रोकने का निर्देश दिया, कंपनी ने सुरक्षा उपायों का दावा किया।
व्हाट्सएप ने एक साथ दो बड़े बदलावों की तैयारी की है—फोन नंबर की जगह यूजरनेम से संपर्क की सुविधा और आईओएस पर हरे बिंदु से ऑनलाइन स्थिति दिखाने वाला संकेतक—लेकिन इनमें से यूजरनेम फीचर को भारत में फिलहाल रोक दिया गया है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी को निर्देश दिया है कि जब तक इस बात का आकलन नहीं हो जाता कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और प्रतिरूपण के मामले नहीं बढ़ेंगे, तब तक इस सुविधा को देश में लॉन्च न किया जाए। 85 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ भारत व्हाट्सएप का सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए यह कदम वैश्विक रोलआउट की रफ्तार को भी प्रभावित कर सकता है।
यूजरनेम फीचर का मकसद गोपनीयता को मजबूत करना है। इसके तहत उपयोगकर्ता एक विशिष्ट नाम चुन सकेंगे, जिसे जानकर कोई भी व्यक्ति बिना फोन नंबर साझा किए बातचीत शुरू कर सकेगा। फोन नंबर अब भी खाता पंजीकरण और सुरक्षा प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य रहेगा, लेकिन नई बातचीत में वह अपने आप दिखाई नहीं देगा। मेटा ने इस सुविधा को टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्मों की तर्ज पर विकसित किया है, जहां पहले से यूजरनेम का उपयोग होता है। तकनीकी नियमों के अनुसार यूजरनेम तीन से तीस अक्षरों का होगा, वेब पते की नकल नहीं कर सकेगा और कोई सार्वजनिक निर्देशिका नहीं होगी। दूसरी ओर, आईओएस बीटा संस्करण 26.26.10.72 में परीक्षणाधीन हरा बिंदु संकेतक संपर्क सूची के ‘जानकारी’ पृष्ठ पर वास्तविक समय में ऑनलाइन स्थिति दर्शाएगा, जो ‘अंतिम बार देखा गया’ जैसी गोपनीयता सेटिंग का सम्मान करेगा।
भारत सरकार की चिंता मुख्यतः इस बात को लेकर है कि फोन नंबर छुप जाने से धोखेबाजों की पहचान करना कठिन हो जाएगा और फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट घोटाले तथा प्रतिरूपण हमले बढ़ सकते हैं। मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों का हवाला देते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्लेटफॉर्म उचित सावधानी नहीं बरतते तो वे उपयोगकर्ता-जनित सामग्री के लिए कानूनी संरक्षण खो सकते हैं। व्हाट्सएप प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा अभी लाइव नहीं हुई है और इसे धीरे-धीरे इस वर्ष के अंत में शुरू किया जाएगा। कंपनी ने दावा किया कि उसने प्रतिरूपण रोकने के लिए हाई-प्रोफाइल नामों को आरक्षित रखा है, नए खातों से संपर्क की सीमा तय की है और बार-बार यूजरनेम अनुमान लगाने के प्रयासों को रोकने की व्यवस्था बनाई है।
डिजिटल अधिकार समूहों ने सरकार के इस निर्देश पर सवाल उठाए हैं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन जैसे संगठनों का कहना है कि मौजूदा कानून सरकार को किसी उत्पाद सुविधा को लॉन्च से पहले मंजूरी देने या रोकने का अधिकार नहीं देते। यह घटनाक्रम भारत में बड़ी टेक कंपनियों पर बढ़ती निगरानी की श्रृंखला का हिस्सा है—हाल ही में टेलीग्राम के खिलाफ कार्रवाई और एक्स के साथ सामग्री मॉडरेशन को लेकर लंबे नियामकीय विवाद इसकी पृष्ठभूमि में हैं। व्हाट्सएप के लिए भारत का रणनीतिक महत्व इसी से समझा जा सकता है कि मेटा ने हाल ही में सीआरईडी के संस्थापक कुणाल शाह को व्हाट्सएप का वैश्विक प्रमुख नियुक्त किया है।
अगला ठोस पड़ाव सरकार द्वारा दी गई तीन दिन की समयसीमा के भीतर व्हाट्सएप का जवाब और उसके बाद होने वाली परामर्श प्रक्रिया होगी। इस बीच, हरा बिंदु संकेतक का परीक्षण जारी रहेगा, जिसके व्यापक रोलआउट की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.70 | aligned |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
भारत ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम को रोकने के लिए व्हाट्सएप को उपयोगकर्ता नाम रोलआउट रोकने का आदेश दिया।
कहानी खतरों का एक पदानुक्रम बनाती है जिसमें नई सुविधा को तत्काल खतरे के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, राज्य के हस्तक्षेप को एकमात्र बचाव के रूप में वैध ठहराती है।
यह उल्लेख नहीं करता कि उपयोगकर्ता नाम सुविधा पहले से अन्य देशों में बिना किसी रिपोर्ट की गई समस्या के लॉन्च की गई थी, न ही उपयोगकर्ताओं के लिए संभावित गोपनीयता लाभ।
व्हाट्सएप उपयोगकर्ता नामों के साथ मैसेजिंग में क्रांति लाता है, उपयोगकर्ताओं को फोन नंबर की बाध्यता से मुक्त करता है।
कहानी सुविधा के लॉन्च को एक अपरिहार्य तकनीकी प्रगति के रूप में सार्वभौमिक बनाती है, सकारात्मक और नवीन स्वर बनाए रखने के लिए स्थानीय विवादों को छोड़ देती है।
यह भारत द्वारा लगाए गए निलंबन और धोखाधड़ी और स्कैम के बारे में चिंताओं को पूरी तरह से छोड़ देता है, जो अटलांटिक और अफ्रीकी कवरेज में केंद्रीय हैं।
व्हाट्सएप ऑनलाइन स्थिति के लिए एक हरा संकेतक पेश करता है और बताता है कि सूचनाएं देर से क्यों आती हैं।
कहानी भारतीय विवाद पर किसी भी रुख से बचते हुए, मुख्य समाचार को तकनीकी, तटस्थ सामग्री से बदलकर कमजोर करती है।
यह उपयोगकर्ता नाम निलंबन और सुरक्षा चिंताओं की खबर को पूरी तरह से छोड़ देता है, जबकि यह व्हाट्सएप के लिए वैश्विक रूप से प्रासंगिक घटना है।
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