
अल्जीरिया-ऑस्ट्रिया ड्रामे में आखिरी सांस पर टूटा ईरान का सपना, दोनों टीमें अगले दौर में
कैनसस सिटी में 3-3 की रोमांचक बराबरी ने ईरान को बाहर किया; 1982 के 'गिजोन अपमान' की यादें ताजा हुईं, लेकिन दोनों कोचों ने सांठगांठ से इनकार किया।
कैनसस सिटी के एरोहेड स्टेडियम में शनिवार रात वो हुआ जिसका डर ईरानी खेमे को शुरू से था। मैच के 93वें मिनट में रियाद महरेज़ ने अल्जीरिया को 3-2 से आगे कर दिया तो मेक्सिको के तिजुआना होटल में बैठे ईरानी खिलाड़ी जश्न में झूम उठे—यह गोल उन्हें सीधे अंतिम-32 में पहुंचा रहा था। लेकिन ठीक 150 सेकंड बाद, छठे मिनट के इंजरी टाइम में ऑस्ट्रिया के सासा कालाइदज़िच ने हेडर से गेंद जाल में पहुंचाकर स्कोर 3-3 कर दिया। यह गोल ईरान के लिए विश्व कप से विदाई का सन्नाटा बन गया, जबकि ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया दोनों एक साथ अगले दौर में पहुंच गए।
यह मुकाबला शुरू से ही अजीब समीकरणों से घिरा था। ग्रुप जे में अर्जेंटीना पहले ही शीर्ष पर रहते हुए क्वालीफाई कर चुका था। ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया जानते थे कि एक ड्रॉ दोनों को आगे ले जाएगा—ऑस्ट्रिया दूसरे स्थान पर और अल्जीरिया सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में। ईरान केवल तभी आगे बढ़ सकता था यदि इस मैच का कोई विजेता निकलता। पहले घंटे तक खेल में रोमांच बना रहा: मार्को अर्नाटोविच (28') और मार्सेल साबित्ज़र (55') ने ऑस्ट्रिया को बढ़त दिलाई, लेकिन रफ़ीक बेलग़ाली (45') और महरेज़ (60') ने अल्जीरिया को हर बार बराबरी पर ला दिया। इसके बाद खेल ने अचानक करवट ली। 2-2 की स्थिति में दोनों टीमों ने जोखिम लेना छोड़ दिया। अल्जीरिया ने लगातार 110 से अधिक पास खेले, जबकि ऑस्ट्रिया ने प्रेसिंग लगभग बंद कर दी। स्टेडियम में बैठे दर्शक हूटिंग करने लगे।
यह नजारा 1982 के विश्व कप के 'गिजोन अपमान' की याद दिला रहा था, जब पश्चिम जर्मनी और ऑस्ट्रिया ने एक ऐसा नतीजा निकाला था जिसने अल्जीरिया को बाहर कर दिया था। इस बार अल्जीरिया उसी समीकरण के दूसरी तरफ खड़ा था। ईरानी मीडिया और सोशल मीडिया पर सांठगांठ के आरोप तेज़ी से फैले। ईरानी खिलाड़ियों के होटल से आए वीडियो में पहले जश्न और फिर मायूसी साफ दिखी। एक खिलाड़ी ने अल्जीरिया के गोल के बाद कहा था, “देखो, मैंने कहा था ये लोग सांठगांठ नहीं कर रहे,” लेकिन ऑस्ट्रिया के बराबरी के गोल के बाद वह चुपचाप अपने कमरे में चला गया।
हालांकि, दोनों कोचों ने किसी भी पूर्व-निर्धारित परिणाम से साफ इनकार किया। ऑस्ट्रिया के राल्फ रांगनिक ने कहा, “3-3 के स्कोर और आखिरी 90 सेकंड में जो हुआ, उसे देखकर कोई नहीं मान सकता कि यह सब तय था।” अल्जीरिया के व्लादिमीर पेटकोविच ने भी जोर देकर कहा कि “अंत में फुटबॉल जीता।” यूरोपीय मीडिया ने रांगनिक के गेगेनप्रेसिंग दर्शन और टीम की कभी हार न मानने वाली मानसिकता को रेखांकित किया, जबकि अरब और अल्जीरियाई मीडिया ने ‘रेगिस्तानी लोमड़ियों’ की ऐतिहासिक वापसी का जश्न मनाया। ईरानी विशेषज्ञों ने अपनी टीम की कमजोर शुरुआत—न्यूजीलैंड के खिलाफ ड्रॉ और बेल्जियम के खिलाफ 10 खिलाड़ियों के बावजूद जीत न निकाल पाने—को भी हार का बड़ा कारण बताया।
अब ऑस्ट्रिया का सामना 2 जुलाई को लॉस एंजिलिस में स्पेन से होगा, जबकि अल्जीरिया 3 जुलाई को वैंकूवर में स्विट्ज़रलैंड से भिड़ेगा। ईरान के लिए यह पहला 48-टीम विश्व कप ग्रुप चरण में ही खत्म हो गया, लेकिन कैनसस सिटी की वह रात लंबे समय तक बहस का विषय बनी रहेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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लैटिन अमेरिकी मीडिया ने ईरान को बाहर करने के लिए अल्जीरिया और ऑस्ट्रिया के बीच सांठगांठ का तीव्र संदेह जताया है, जो 1982 के 'गिजोन कलंक' की याद दिलाता है। ऑस्ट्रिया के बराबरी के गोल पर अल्जीरियाई प्रशंसकों के जश्न के वीडियो विवाद को हवा देते हैं, और संकेत दिया जाता है कि फीफा को नियामक खामी को दूर करना चाहिए। लहजा चिंताजनक और खुलेआम आरोप लगाने वाला है, जो टूर्नामेंट की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाता है।
दक्षिण पूर्व एशियाई मीडिया इस विवाद को संदेह और अलगाव के मिश्रण से कवर करता है, सवाल उठाता है कि क्या ईरान का बाहर होना किसी साजिश का नतीजा था। 'गिजोन कलंक' को ऐतिहासिक मिसाल के रूप में उद्धृत किया जाता है, लेकिन दोनों टीमों के आधिकारिक खंडन को भी जगह दी जाती है। रुख आरोप लगाने से अधिक वर्णनात्मक है, जो पाठक पर निर्णय छोड़ता है।
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