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विज्ञान और स्वास्थ्यमंगलवार, 30 जून 2026

महिला स्वास्थ्य में नया नज़रिया: किशोरावस्था से रजोनिवृत्ति तक एकीकृत देखभाल की पहल

इटली में रजोनिवृत्ति पर रूढ़ियाँ तोड़ने का राष्ट्रीय अभियान शुरू, जबकि दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों में बांझपन और जटिल गर्भधारण पर जागरूकता बढ़ी।

महिलाओं के स्वास्थ्य को जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर जोड़कर देखने की सोच अब वैश्विक स्वास्थ्य चर्चा के केंद्र में है। इटली की संसद में हाल ही में ‘मेनोपॉज़ा, रिस्क्रिवियामो ले रेगोले’ (रजोनिवृत्ति, नियम फिर से लिखें) अभियान की शुरुआत हुई, जिसका लक्ष्य इस अवस्था को यौनिकता और व्यक्तिगत संभावनाओं के अंत के रूप में देखने वाली धारणाओं को चुनौती देना है। नेपल्स विश्वविद्यालय की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट अन्नामारिया कोलाओ के अनुसार, रजोनिवृत्ति और उसके बाद का समय एक महिला के जीवन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हो सकता है, इसलिए इस दौरान हृदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस और कैंसर जैसी स्थितियों की रोकथाम के लिए जानकारी और स्क्रीनिंग ज़रूरी है। इसी महीने जून को वैश्विक स्तर पर बांझपन जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है, और बांग्लादेश के विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि प्रजनन समस्याओं के लिए केवल महिला को परामर्श देना पर्याप्त नहीं, बल्कि परिवार और समाज को भी संवेदनशील बनाना होगा।

हार्मोनल बदलावों की यह शृंखला किशोरावस्था से शुरू होती है। संयुक्त अरब अमीरात के बुर्जील मेडिकल सिटी की डॉ. राया फराह बताती हैं कि किशोरियों में मज़बूत हड्डियाँ बनाने, मासिक धर्म स्वास्थ्य और एचपीवी टीकाकरण पर ध्यान देना भविष्य की बीमारियों का जोखिम घटाता है। वहीं, मेडकेयर अस्पताल शारजाह की डॉ. सबीना सादात का कहना है कि अत्यधिक दर्दनाक या अनियमित मासिक धर्म को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पीसीओएस या एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों का संकेत हो सकता है। इटली में कोलाओ इसी तरह रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन में गिरावट को कई पुरानी बीमारियों का कारण बताती हैं, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित करती हैं कि आज प्रभावी रोकथाम और प्रबंधन के उपकरण मौजूद हैं।

दक्षिण एशिया में प्रजनन स्वास्थ्य पर बातचीत में जीवनशैली और मानसिक दबाव की भूमिका प्रमुखता से उभरी है। बांग्लादेश के इनफर्टिलिटी केयर सेंटर की प्रोफ़ेसर राशिदा बेगम ने एक ऑनलाइन परिचर्चा में कहा कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए वज़न नियंत्रण और नियमित व्यायाम से हार्मोन संतुलन में सुधार हो सकता है, और कुछ मामलों में स्वाभाविक डिंबोत्सर्ग भी शुरू हो सकता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बांझपन के लिए केवल महिला को ज़िम्मेदार ठहराने की सोच गलत है, क्योंकि लगभग एक-तिहाई मामलों में समस्या पुरुषों में होती है। मलेशिया में डॉ. शरीफ़ा नजवा सैयद अमीन हुसैनी ने बर्नामा को बताया कि करियर कारणों से मातृत्व टालने और मोटापे की बढ़ती दरों के चलते गर्भधारण अब चिकित्सकीय रूप से अधिक जटिल हो गए हैं, जिसके लिए गर्भधारण से तीन-छह महीने पहले से योजना बनाना और पुरानी बीमारियों पर नियंत्रण ज़रूरी है।

इटली के ऑन्कोलॉजिस्ट मास्सिमो दी माइयो ने रजोनिवृत्ति के बाद स्तन, कोलोरेक्टल और फेफड़ों के कैंसर की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की अहमियत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि कैंसर उपचार से प्रेरित रजोनिवृत्ति के लक्षणों, जैसे हॉट फ्लैश और नींद की गड़बड़ी, को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ये जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इस बीच, इटली में शुरू हुए अभियान के तहत एक राष्ट्रीय सम्मेलन, एक समर्पित पोर्टल और ‘एम कम मेनोपॉज़ा’ नामक पुस्तक का प्रकाशन शामिल है, जो स्वास्थ्य पेशेवरों और आम महिलाओं के बीच संवाद बढ़ाने का प्रयास करेगा। कोलाओ ने स्कूली शिक्षा में स्वास्थ्य के निर्धारकों को शामिल करने की वकालत की ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर समझ सकें।

अगला ठोस कदम इटली में होने वाला राष्ट्रीय सम्मेलन है, जो स्त्री रोग विशेषज्ञों, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट को एक मंच पर लाएगा। साथ ही, मलेशिया और खाड़ी देशों में गर्भधारण-पूर्व परामर्श को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करने की माँग उठ रही है, जो महिला स्वास्थ्य को खंडित न देखकर जीवनपर्यंत देखभाल के रूप में देखने की दिशा में एक ठोस बदलाव का संकेत है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

50%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसमहाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
व्यावहारिकतासंरक्षणवाद

दक्षिण एशियाई कवरेज इस कहानी को बांझपन जागरूकता के नजरिए से देखती है, इस बात पर जोर देते हुए कि बांझपन राह का अंत नहीं है और उचित चिकित्सा मार्गदर्शन से मातृत्व संभव है। यह ऑनलाइन जानकारी के आधार पर स्व-दवा के खिलाफ चेतावनी देती है और परिवार-व्यापी परामर्श और जीवनशैली में बदलाव का आह्वान करती है।

महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
अत्यावश्यकताव्यावहारिकता

महाद्वीपीय यूरोपीय मीडिया इस कहानी को रजोनिवृत्ति की वर्जनाओं को तोड़ने के अभियान के रूप में पेश करती है, यह देखते हुए कि यह चरण और पोस्ट-मेनोपॉज़ मिलकर एक महिला के जीवन का एक तिहाई हिस्सा हो सकते हैं। यह पहल हार्मोनल परिवर्तनों से निपटने के लिए बेहतर जानकारी पर जोर देती है और 50 वर्ष की आयु के बाद कैंसर की रोकथाम और जांच के महत्व पर बल देती है।

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मंगलवार, 30 जून 2026

महिला स्वास्थ्य में नया नज़रिया: किशोरावस्था से रजोनिवृत्ति तक एकीकृत देखभाल की पहल

इटली में रजोनिवृत्ति पर रूढ़ियाँ तोड़ने का राष्ट्रीय अभियान शुरू, जबकि दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों में बांझपन और जटिल गर्भधारण पर जागरूकता बढ़ी।

महिलाओं के स्वास्थ्य को जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर जोड़कर देखने की सोच अब वैश्विक स्वास्थ्य चर्चा के केंद्र में है। इटली की संसद में हाल ही में ‘मेनोपॉज़ा, रिस्क्रिवियामो ले रेगोले’ (रजोनिवृत्ति, नियम फिर से लिखें) अभियान की शुरुआत हुई, जिसका लक्ष्य इस अवस्था को यौनिकता और व्यक्तिगत संभावनाओं के अंत के रूप में देखने वाली धारणाओं को चुनौती देना है। नेपल्स विश्वविद्यालय की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट अन्नामारिया कोलाओ के अनुसार, रजोनिवृत्ति और उसके बाद का समय एक महिला के जीवन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हो सकता है, इसलिए इस दौरान हृदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस और कैंसर जैसी स्थितियों की रोकथाम के लिए जानकारी और स्क्रीनिंग ज़रूरी है। इसी महीने जून को वैश्विक स्तर पर बांझपन जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है, और बांग्लादेश के विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि प्रजनन समस्याओं के लिए केवल महिला को परामर्श देना पर्याप्त नहीं, बल्कि परिवार और समाज को भी संवेदनशील बनाना होगा।

हार्मोनल बदलावों की यह शृंखला किशोरावस्था से शुरू होती है। संयुक्त अरब अमीरात के बुर्जील मेडिकल सिटी की डॉ. राया फराह बताती हैं कि किशोरियों में मज़बूत हड्डियाँ बनाने, मासिक धर्म स्वास्थ्य और एचपीवी टीकाकरण पर ध्यान देना भविष्य की बीमारियों का जोखिम घटाता है। वहीं, मेडकेयर अस्पताल शारजाह की डॉ. सबीना सादात का कहना है कि अत्यधिक दर्दनाक या अनियमित मासिक धर्म को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पीसीओएस या एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों का संकेत हो सकता है। इटली में कोलाओ इसी तरह रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन में गिरावट को कई पुरानी बीमारियों का कारण बताती हैं, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित करती हैं कि आज प्रभावी रोकथाम और प्रबंधन के उपकरण मौजूद हैं।

दक्षिण एशिया में प्रजनन स्वास्थ्य पर बातचीत में जीवनशैली और मानसिक दबाव की भूमिका प्रमुखता से उभरी है। बांग्लादेश के इनफर्टिलिटी केयर सेंटर की प्रोफ़ेसर राशिदा बेगम ने एक ऑनलाइन परिचर्चा में कहा कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए वज़न नियंत्रण और नियमित व्यायाम से हार्मोन संतुलन में सुधार हो सकता है, और कुछ मामलों में स्वाभाविक डिंबोत्सर्ग भी शुरू हो सकता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बांझपन के लिए केवल महिला को ज़िम्मेदार ठहराने की सोच गलत है, क्योंकि लगभग एक-तिहाई मामलों में समस्या पुरुषों में होती है। मलेशिया में डॉ. शरीफ़ा नजवा सैयद अमीन हुसैनी ने बर्नामा को बताया कि करियर कारणों से मातृत्व टालने और मोटापे की बढ़ती दरों के चलते गर्भधारण अब चिकित्सकीय रूप से अधिक जटिल हो गए हैं, जिसके लिए गर्भधारण से तीन-छह महीने पहले से योजना बनाना और पुरानी बीमारियों पर नियंत्रण ज़रूरी है।

इटली के ऑन्कोलॉजिस्ट मास्सिमो दी माइयो ने रजोनिवृत्ति के बाद स्तन, कोलोरेक्टल और फेफड़ों के कैंसर की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की अहमियत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि कैंसर उपचार से प्रेरित रजोनिवृत्ति के लक्षणों, जैसे हॉट फ्लैश और नींद की गड़बड़ी, को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ये जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इस बीच, इटली में शुरू हुए अभियान के तहत एक राष्ट्रीय सम्मेलन, एक समर्पित पोर्टल और ‘एम कम मेनोपॉज़ा’ नामक पुस्तक का प्रकाशन शामिल है, जो स्वास्थ्य पेशेवरों और आम महिलाओं के बीच संवाद बढ़ाने का प्रयास करेगा। कोलाओ ने स्कूली शिक्षा में स्वास्थ्य के निर्धारकों को शामिल करने की वकालत की ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर समझ सकें।

अगला ठोस कदम इटली में होने वाला राष्ट्रीय सम्मेलन है, जो स्त्री रोग विशेषज्ञों, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट को एक मंच पर लाएगा। साथ ही, मलेशिया और खाड़ी देशों में गर्भधारण-पूर्व परामर्श को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करने की माँग उठ रही है, जो महिला स्वास्थ्य को खंडित न देखकर जीवनपर्यंत देखभाल के रूप में देखने की दिशा में एक ठोस बदलाव का संकेत है।

स्रोतों में मतभेद

विज्ञान और स्वास्थ्य · 3 स्रोत · 3 भाषाएँ

50%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक50%
न्यूनत्र50%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसमहाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
व्यावहारिकतासंरक्षणवाद

दक्षिण एशियाई कवरेज इस कहानी को बांझपन जागरूकता के नजरिए से देखती है, इस बात पर जोर देते हुए कि बांझपन राह का अंत नहीं है और उचित चिकित्सा मार्गदर्शन से मातृत्व संभव है। यह ऑनलाइन जानकारी के आधार पर स्व-दवा के खिलाफ चेतावनी देती है और परिवार-व्यापी परामर्श और जीवनशैली में बदलाव का आह्वान करती है।

महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
अत्यावश्यकताव्यावहारिकता

महाद्वीपीय यूरोपीय मीडिया इस कहानी को रजोनिवृत्ति की वर्जनाओं को तोड़ने के अभियान के रूप में पेश करती है, यह देखते हुए कि यह चरण और पोस्ट-मेनोपॉज़ मिलकर एक महिला के जीवन का एक तिहाई हिस्सा हो सकते हैं। यह पहल हार्मोनल परिवर्तनों से निपटने के लिए बेहतर जानकारी पर जोर देती है और 50 वर्ष की आयु के बाद कैंसर की रोकथाम और जांच के महत्व पर बल देती है।

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