
इज़राइल ने लेबनान से सेना हटाने से इनकार किया, ट्रंप के बयान को ख़ारिज किया
रक्षा मंत्री काट्ज़ ने कहा कि हिज़्बुल्लाह के पूर्ण निरस्त्रीकरण तक सेना दक्षिण लेबनान में बनी रहेगी, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने वार्ता के ज़रिए समाधान की उम्मीद जताई।
इज़राइल के रक्षा मंत्री यिसराइल काट्ज़ ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को स्पष्ट रूप से ख़ारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इज़राइल जल्द ही दक्षिण लेबनान से अपनी सेना हटा लेगा। काट्ज़ ने कहा, “हमने लेबनान में प्रवेश के लिए किसी से अनुमति नहीं मांगी थी और हमें वहाँ रहने के लिए भी किसी की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है।” उन्होंने घोषणा की कि इज़राइली सेना तब तक दक्षिण लेबनान में बने ‘सुरक्षा क्षेत्र’ में मौजूद रहेगी, जब तक हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह निरस्त्र नहीं कर दिया जाता।
इज़राइली नेतृत्व की ओर से यह रुख़ लगातार दोहराया जा रहा है। प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी कहा है कि जब तक ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह से ख़तरा बना रहेगा, सेना दक्षिण लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में हिज़्बुल्लाह की अधिकांश सैन्य क्षमता और उसके नेतृत्व को कुचल दिया गया है, और अब समुद्र से लेकर माउंट हेर्मोन तक एक मज़बूत सुरक्षा पट्टी स्थापित कर ली गई है। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि दक्षिण लेबनान के कुछ ईसाई गाँवों ने हिज़्बुल्लाह से सुरक्षा के लिए इज़राइल में शामिल होने की इच्छा जताई है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से इस मुद्दे पर बात की है और उन्हें लगता है कि इज़राइल सेना हटाना चाहता है। ट्रंप ने इज़राइल और लेबनान के बीच हाल में हस्ताक्षरित एक ढाँचागत समझौते का हवाला देते हुए कहा कि “यह बहुत अच्छे से काम करेगा।” व्हाइट हाउस के एक सूत्र के अनुसार, लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ़ आउन को 21 जुलाई को वाशिंगटन आमंत्रित किया गया है, जहाँ लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर चर्चा होगी। इसके अलावा, अमेरिका ने एक प्रस्ताव रखा है जिसके तहत लेबनानी सेना की इकाइयों की जाँच कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनमें हिज़्बुल्लाह के तत्व या समर्थक मौजूद न हों।
लेबनानी पक्ष और हिज़्बुल्लाह की स्थिति इस मामले को जटिल बनाती है। हिज़्बुल्लाह से जुड़े सूत्रों ने इज़राइली अख़बार हारेत्ज़ को बताया कि दक्षिण लेबनान में संगठन की ओर से फ़िलहाल सैन्य कार्रवाई न करना कोई रणनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि यह दिखाने की एक चाल है कि इज़राइल ही समझौते के क्रियान्वयन में बाधा डाल रहा है। हिज़्बुल्लाह ने 26 जून को हस्ताक्षरित उस ढाँचागत समझौते को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और दो ‘पायलट’ क्षेत्रों से इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी का प्रावधान है। इस बीच, इज़राइली सेना दक्षिण लेबनान में लगातार सक्रिय है—ख़ियाम और तैयबेह जैसे क़स्बों में विस्फोट और तोपख़ाने की गोलाबारी की ख़बरें हैं।
अगले कूटनीतिक क़दमों के तहत 14-15 जुलाई को रोम में इज़राइल और लेबनान के बीच विशेषज्ञ-स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसके बाद राष्ट्रपति आउन की वाशिंगटन यात्रा होगी। फ़िलहाल, इज़राइल ने किसी समय-सीमा का संकेत नहीं दिया है और उसका कहना है कि जब तक हिज़्बुल्लाह का ख़तरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, सेना दक्षिण लेबनान में डटी रहेगी।
| इज़राइली प्रेस | +0.30 | aligned |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.50 | critical |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.60 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
Israel asserts its sovereign right to remain in Lebanon to protect its citizens, rejecting any external interference.
It presents Hezbollah as an existential and ineradicable threat, thereby justifying the military presence as a necessary and non-negotiable self-defense measure.
Omits the Israeli ambassador's statements to the UN suggesting a long-term withdrawal.
The Israeli government systematically violates Lebanese sovereignty and international agreements, refusing any compromise.
It frames the Israeli presence as a violation of international law and ongoing negotiations, delegitimizing Israel's position through the language of 'violations' and 'infiltrations'.
Does not report Trump's statement that he believes Israel will withdraw.
The Zionist regime shows its true aggressive and provocative nature, rejecting any external authority.
It portrays Israel as an irrational and belligerent actor that defies even its main ally, reinforcing the narrative of a permanent threat to the region.
Does not mention Trump's statements indicating a possible Israeli withdrawal.
Israel sends mixed signals: on one hand Katz's hard line, on the other the ambassador's caution at the UN.
It juxtaposes two divergent official Israeli statements to suggest that the final position is still evolving and that Katz's words may not be definitive.
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