
कांगो के घने जंगलों में नारंगी होंठों वाली नई बंदर प्रजाति की पुष्टि
आनुवंशिक, शारीरिक और ध्वनि विश्लेषण के बाद वैज्ञानिकों ने कोलोबस कांगोएन्सिस को अफ्रीका की 75 वर्षों में खोजी गई केवल पांचवीं नई बंदर प्रजाति के रूप में मान्यता दी।
लोमामी राष्ट्रीय उद्यान के सुदूर वन क्षेत्र में पहली बार 2008 में एक धुंधली तस्वीर में दिखा यह प्राइमेट अब एक पृथक प्रजाति के रूप में सामने आया है। अमेरिका, कांगो और जर्मनी के शोधकर्ताओं की अंतरराष्ट्रीय टीम ने पीएलओएस वन पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में बताया कि तीन जब्त नमूनों के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए, खोपड़ी संरचना और ध्वनि रिकॉर्डिंग के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि यह बंदर अपने निकटतम ज्ञात संबंधी कोलोबस सैटानस से लगभग 40-50 लाख वर्ष पहले विकासक्रम में अलग हुआ था।
स्थानीय बलांगा समुदाय इसे 'लिकवेली' कहता है, लेकिन 52 गांवों में किए गए सर्वेक्षण में केवल आठ गांवों के लोगों ने ही इसे देखने की पुष्टि की। शोधकर्ताओं के अनुसार इसका सीमित वितरण क्षेत्र लोमामी और लुआलाबा नदियों के बीच मात्र 1,700 वर्ग किलोमीटर में सिमटा है, जहाँ यह सफेद रेत वाले वनों की बजाय धूसर मृदा वाले वृक्षों को प्राथमिकता देता है। इसका वजन लगभग 7 किलोग्राम है, जो अन्य कोलोबस प्रजातियों की तुलना में कम है, और चेहरे पर नारंगी-गुलाबी धब्बा तथा गुदा के पास सफेद बाल इसे आसानी से पहचान योग्य बनाते हैं।
फ्लोरिडा अटलांटिक विश्वविद्यालय की जीवविज्ञानी केट डेटवाइलर के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में 2018 से 2022 के बीच 114 बार इस प्रजाति को देखा गया। टीम ने भोर के समय रिकॉर्ड की गई गुर्राने जैसी आवाजों की तुलना कर यह पाया कि इनकी ध्वनि संरचना अन्य कोलोबस प्रजातियों से भिन्न है। हालांकि यह क्षेत्र औपचारिक रूप से संरक्षित है, फिर भी अवैध शिकार और 2015 से 2023 के बीच बफर जोन में 15 नए गांवों के जुड़ने से आवास क्षति की चिंता बढ़ी है।
शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में इसे संकटग्रस्त श्रेणी में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव रखा है। अगला कदम जनसंख्या का सटीक आकलन करने और इसके व्यवहार का गहन अध्ययन करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण का है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विज्ञान की नजर में आने के साथ ही यह दुर्लभ प्रजाति विलुप्ति की ओर न बढ़ जाए।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.10 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
We are witnessing a sobering reminder that rare species may vanish before we know them. Conservation must act now.
The bloc uses a narrative of impending loss and wonder to create urgency, framing the discovery as a race against extinction.
The atlantic bloc omits the statistical context of being the fifth African monkey species in 75 years, which would temper the alarm by showing that such discoveries are rare but not unprecedented.
We report the confirmation of a strange monkey species after nearly two decades of observation.
The bloc uses a neutral chronological narrative that emphasizes the long wait and the local name, presenting the discovery as a scientific achievement without alarm.
The continental European bloc omits the distinctive snort and the endangered conservation status, present in other blocs.
We present the discovery of a new monkey species, Colobus congoensis, with orange lips and characteristic snorts, as published in PLOS One.
The bloc uses a scientific journalistic style, citing the study and providing taxonomic details, lending credibility and neutrality.
The Latin American bloc omits the local name Likweli and the history of sightings since 2008, present in the continental European bloc.
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