
डिमेंशिया के 45% मामले रोके जा सकते हैं: डब्ल्यूएचओ की नई गाइडलाइन और लैटिन अमेरिकी अध्ययन से उम्मीद
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार वायु प्रदूषण और श्रवण हानि को जोखिम कारकों के रूप में शामिल किया, जबकि 11 देशों के एक क्लिनिकल परीक्षण में पांच आदतों से संज्ञानात्मक क्षमता में 55% अधिक सुधार देखा गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को अद्यतन वैश्विक दिशानिर्देश जारी कर कहा कि डिमेंशिया के 45 प्रतिशत तक मामलों को रोका या विलंबित किया जा सकता है। यह आकलन तम्बाकू, अल्कोहल, शारीरिक निष्क्रियता, सामाजिक अलगाव, वायु प्रदूषण और उच्च रक्तचाप व मधुमेह जैसी गैर-संचारी बीमारियों जैसे परिवर्तनीय जोखिम कारकों पर आधारित है। 2019 के बाद पहली बार अद्यतन इन सिफारिशों में श्रवण यंत्रों के उपयोग और वायु प्रदूषण में कमी को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जबकि विटामिन बी, ई और ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स को बिना निदानित कमी के लेने की सलाह नहीं दी गई है।
इसी सप्ताह, लैटिन अमेरिका के 11 देशों के 1,065 प्रतिभागियों पर किए गए पहले बहुकेंद्रीय यादृच्छिक क्लिनिकल परीक्षण लैटएम-फिंगर्स के परिणाम द लैंसेट में प्रकाशित हुए। 60 से 77 वर्ष की आयु के ऐसे वयस्क जिनमें जोखिम कारक थे लेकिन डिमेंशिया नहीं था, उन्हें दो वर्षों तक शारीरिक गतिविधि, भूमध्यसागरीय आहार, संज्ञानात्मक प्रशिक्षण, हृदय संबंधी नियंत्रण और सामाजिक मेलजोल का संरचित कार्यक्रम दिया गया। इस समूह में सामान्य स्वास्थ्य सलाह पाने वाले समूह की तुलना में वैश्विक संज्ञान, स्मृति और कार्यकारी कार्यों में 55 प्रतिशत अधिक सुधार दर्ज किया गया। कोलंबिया के मेडेलिन और सबानेटा में 100 प्रतिभागियों का अनुसरण करने वाले एंटिओक्विया विश्वविद्यालय के तंत्रिका विज्ञान समूह ने बताया कि यह मॉडल विविध सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में लागू किया जा सकता है।
मस्तिष्क पर जोखिम कारकों के जैविक प्रभाव को समझने के लिए स्वीडन के कारोलिंस्का संस्थान ने 27,000 से अधिक लोगों के मस्तिष्क स्कैन और रक्त नमूनों का अवलोकन किया। अध्ययन में पाया गया कि मेटाबोलिक सिंड्रोम के तीन कारकों (पेट की चर्बी, उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, ट्राइग्लिसराइड्स या कम एचडीएल) वाले व्यक्तियों का मस्तिष्क वास्तविक आयु से एक वर्ष अधिक बूढ़ा था; पांचों कारक होने पर यह अंतर 2.3 वर्ष तक पहुंच गया। शोधकर्ता अबीगेल डव के अनुसार, यह दीर्घकालिक सूजन पैदा कर सकता है जो रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचाकर डिमेंशिया का मार्ग प्रशस्त करती है।
अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चल रहे प्रारंभिक शोध से संकेत मिलता है कि गंध प्रशिक्षण (बार-बार विभिन्न सुगंधों को सूंघना) न केवल घ्राण क्षमता बहाल कर सकता है, बल्कि सामान्य घ्राण वाले लोगों में भी मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ा सकता है। अल्जाइमर एवं पार्किंसंस के 85-90 प्रतिशत प्रारंभिक रोगियों में गंध की हानि पहला लक्षण होती है, इसलिए इसे बायोमार्कर के रूप में विकसित किया जा रहा है। फॉक्स न्यूज पर पांच अमेरिकी रोगियों ने बताया कि शीघ्र निदान और नई एंटी-एमिलॉयड दवाओं से उनकी संज्ञानात्मक गिरावट धीमी हुई और वे पुनः सामुदायिक जीवन में लौट सके।
डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर डिमेंशिया का वार्षिक बोझ 1.3 ट्रिलियन डॉलर है, जिसका आधा हिस्सा परिवारजनों की अवैतनिक देखभाल से आता है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 2026 में लंदन में होने वाला अल्जाइमर्स एसोसिएशन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन है, जहां लैटएम-फिंगर्स के पूर्ण परिणाम प्रस्तुत किए जाएंगे और विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों में इस हस्तक्षेप को अपनाने की रूपरेखा पर चर्चा होगी।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.30 | aligned |
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| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.20 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Continental Europe promotes a proactive clinical approach, emphasizing the role of early diagnosis and management of risk factors.
By citing prominent neurologists, the bloc lends scientific authority to the narrative, making prevention a concrete medical issue.
The bloc omits mentioning that there is no cure for dementia, focusing solely on prevention.
Sub-Saharan Africa adopts the WHO guidelines as a public health imperative, stressing the urgency of addressing modifiable risk factors.
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