
ट्रम्प ने ईरान से 100% मांगें पूरी न होने पर पूर्ण युद्ध की चेतावनी दी, ओमान की मध्यस्थता से समझौते की उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर वाशिंगटन को बातचीत में अपनी सभी मांगें नहीं मिलीं तो बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होगी, जबकि सूत्रों के अनुसार मौजूदा ठहराव कूटनीति के लिए एक सामरिक अवसर है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने एक फ्रांसीसी टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि यदि ईरान के साथ जारी वार्ता में अमेरिका को अपनी ‘सौ प्रतिशत’ मांगें नहीं मिलती हैं तो वह ‘निश्चित रूप से’ पूर्ण पैमाने पर युद्ध फिर से शुरू कर देगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेना ने, समाचार वेबसाइट एक्सियोस के सूत्रों के हवाले से, तेरह दिनों के लगातार हमलों के बाद ईरान पर नई बड़ी कार्रवाइयों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। व्हाइट हाउस के करीबी एक सूत्र ने इस ठहराव को ‘सामरिक विराम’ बताया, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के जरिए ईरान की प्रतिक्रिया का परीक्षण करना है।
वाशिंगटन की मंशा को लेकर इज़राइली प्रसारण प्राधिकरण के एक सूत्र ने दावा किया कि ट्रम्प ने शुक्रवार-शनिवार की रात के लिए नियोजित एक बड़े हमले को स्थगित किया ताकि ईरान को वार्ता की मेज पर लौटने का एक और मौका दिया जा सके। इसी बीच, अमेरिकी सेना एक्सियोस के अनुसार बड़े पैमाने पर अभियानों की योजनाएँ तैयार कर रही है और आदेश मिलने पर अपेक्षाकृत कम समय में सेना एकत्र कर सकती है। दूसरी ओर, ईरानी पक्ष से जुड़ी खबरों में कहा गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक प्रवक्ता ने अमेरिका द्वारा पूर्व समझौते के उल्लंघन के बाद से 200 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है।
क्षेत्रीय कूटनीति में ओमान एक सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान में बातचीत कर रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर सप्ताहांत तक एक समझौता होने की संभावना है। इज़राइली सूत्रों का कहना है कि ईरानी सर्वोच्च नेता के बेटे मुजतबा खामेनेई बातचीत में सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिससे किसी समझ तक पहुँचना कठिन हो सकता है। इसके विपरीत, ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि ‘ईरान अभी हमारे साथ बातचीत कर रहा है’ और वे एक समझौता चाहते हैं, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि वे तैयार हैं या नहीं, इस पर उन्हें संदेह है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार की एक महत्वपूर्ण धमनी है, जहाँ से भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों को आपूर्ति होती है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और ईरानी जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। अभी तक अमेरिकी प्रशासन ने कोई नया हमला शुरू नहीं किया है और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन ट्रम्प की स्पष्ट चेतावनी से संकेत मिलता है कि यदि ओमान की मध्यस्थता वाली यह पहल अमेरिकी माँगों पर सहमति नहीं बना पाई तो सैन्य तनाव तेज़ी से बढ़ सकता है।
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