
करीम खान की बर्खास्तगी से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में उथल-पुथल, इज़रायल ने स्वागत किया, संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ ने चिंता जताई
मुख्य अभियोजक करीम खान को यौन दुराचार के आरोपों में हटाए जाने पर अमेरिका-इज़रायल ने प्रसन्नता जताई, जबकि संयुक्त राष्ट्र प्रतिवेदक ने इसे नेतन्याहू के विरुद्ध वारंट रद्द करने की कोशिशों से जोड़कर देखा।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के सदस्य देशों ने शुक्रवार को मुख्य अभियोजक करीम खान को 'गंभीर कदाचार और कर्तव्य का गंभीर उल्लंघन' के आरोप में पद से हटा दिया। 125 सदस्यीय असेम्बली में 82 देशों ने बंद लिफाफे से मतदान में बर्खास्तगी का समर्थन किया। खान पर एक पूर्व महिला सहकर्मी ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जिन्हें वे लगातार नकारते रहे हैं। यह 24 वर्षीय न्यायालय के इतिहास में पहला अवसर है जब किसी मुख्य अभियोजक को पद से हटाया गया है।
इस फैसले पर प्रतिक्रियाओं का दायरा व्यापक रहा। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज़ पर खान को 'धोखाधड़ी' करार दिया और आरोप लगाया कि खान ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों से ध्यान हटाने के लिए इज़रायल के खिलाफ युद्ध अपराध के झूठे मामले बनाए। इज़रायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे 'भ्रष्ट अभियोजक का नैतिक दिवालियापन' कहा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने न्यायालय को 'आशाहीन रूप से भ्रष्ट संस्था' बताते हुए इसे भंग करने के प्रयास जारी रखने की बात दोहराई। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक फ्रांसेस्का अल्बनीज़ ने खान की बर्खास्तगी की आलोचना करते हुए कहा कि यह नेतन्याहू के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट को रद्द कराने की लड़ाई से पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने दुनिया भर के वकीलों से न्याय के प्रयास दोगुने करने का आग्रह किया।
विश्लेषकों के अनुसार, खान के हटने से इज़रायल के विरुद्ध युद्ध अपराध के मामले अपने आप समाप्त नहीं हो जाएंगे। यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़रायली रणनीतिकार दो खेमों में बंटे हैं: एक पक्ष आईसीसी को अपूरणीय मानता है और खान के पतन को बड़ी जीत के रूप में देखता है, जबकि दूसरा पक्ष क्षेत्राधिकार और सबूतों पर कानूनी लड़ाई जारी रखने के पक्ष में है। इस बीच, वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ ने रोम संविधि से बाहर निकलने की घोषणा की, जिसका अमेरिका ने स्वागत करते हुए सभी सदस्यों से ऐसा ही करने का आह्वान किया।
पृष्ठभूमि में, खान ने 2024 में नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गाज़ा युद्ध के दौरान कथित युद्ध अपराधों और मानवता विरुद्ध अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करवाए थे, जिससे नेतन्याहू की अधिकांश सदस्य देशों की यात्रा जटिल हो गई। न्यूयॉर्क के महापौर ज़ोहरान ममदानी ने इस आधार पर नेतन्याहू के शहर आने पर गिरफ्तारी की इच्छा जताई, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि उनके पास ऐसा अधिकार नहीं है। नेतन्याहू ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने की पुष्टि की है। खान के वकील ने बर्खास्तगी के खिलाफ सभी उपलब्ध कानूनी उपाय करने की घोषणा की है, जबकि आईसीसी अंतरिम नेतृत्व की तलाश कर रहा है। मामला अब वैश्विक न्यायिक विश्वसनीयता और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन की कसौटी बनता जा रहा है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −1.00 | critical |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +1.00 | aligned |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| इज़राइली प्रेस | +0.20 | neutral |
The international community must defend justice from political attack.
The special rapporteur's condemnation is presented as unequivocal proof of a conspiracy against international law, contrasting the ideal of impartial justice with the reality of political pressure.
Does not mention the sexual misconduct allegations against Khan that led to his dismissal.
Israel triumphs over international bias and exposes the falseness of The Hague's accusations.
Khan's dismissal is presented as a result of his personal scandals, which absolves Israel from any accusations and supports the narrative that the court is politicized.
Omits the details of the sexual misconduct allegations and any discussion of the ICC's internal issues.
The International Criminal Court faces a test that threatens its credibility and independence.
By presenting the case as a moral crisis of the ICC, the structural vulnerability of the court to political pressure is emphasized without taking sides.
Does not report Netanyahu's welcoming statement or the UN rapporteur's criticism.
Israel must continue its legal battle with pragmatism, exploiting every vulnerability of the ICC.
The analysis distinguishes between two currents of thought within the pro-Israel coalition, presenting the more pragmatic position as the sensible way forward.
Omits the UN rapporteur's condemnation and the narrative that the dismissal undermines international law.
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