
भारत में ऋण-जमा अनुपात 62 वर्षों के शिखर पर, ब्राज़ील-अर्जेंटीना में चूक दर बढ़ने से आर्थिक दबाव गहराया
भारतीय बैंकों का ऋण-जमा अनुपात 82.6% पहुंचा जबकि दक्षिण अमेरिकी देशों में उच्च ब्याज दरें और गिरती क्रयशक्ति के कारण परिवारों की ऋण अदायगी क्षमता कमज़ोर हो रही है।
भारत में वाणिज्यिक बैंकों का ऋण-जमा अनुपात वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 82.6% पर पहुंच गया, जो 62 वर्षों का उच्चतम स्तर है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार, ऋण वृद्धि दर 18.6% रही जबकि जमा वृद्धि 13.3% तक सीमित रही, जिससे दोनों के बीच का अंतर 5 प्रतिशत अंक तक पहुंच गया—जो वित्त वर्ष 2024 की जून तिमाही के बाद सर्वाधिक है। विश्लेषक इसका कारण बैंकों द्वारा अतिरिक्त निवेश को ऋण में परिवर्तित करने और बैंक पूंजी के उच्च स्तर को बताते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिसंबर 2025 में रेपो दर घटाकर 5.25% कर दी थी और तब से इसे स्थिर रखा है, जिससे व्यापक ऋण वृद्धि की उम्मीद बनी हुई है। हालांकि, बैंकरों का मानना है कि घरेलू बचतकर्ता अभी भी जमा को प्राथमिकता देते हैं, किंतु निम्न ब्याज दरों के कारण निवेश प्राथमिकताएं स्थानांतरित हो रही हैं।
दूसरी ओर, ब्राज़ील में ब्याज दरें 14.25% पर बनी हुई हैं, जिससे निवेशक रूढ़िवादी परिसंपत्तियों की ओर पलायन कर रहे हैं। एक्सपर्ट एक्सपी 2026 कार्यक्रम में बीटीजी एसेट के कार्यकारी ने कहा कि उच्च सेलिक दर नए वित्तीय उत्पादों के सृजन में बाधक बन रही है और जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों की मांग घटी है। इसी दौरान, जीवेमाउआ के मुख्य निवेश अधिकारी ने चेतावनी दी कि बेरोज़गारी न बढ़ने के बावजूद चूक दर में तेज़ी चिंताजनक है, क्योंकि परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में जा रहा है और उपभोग क्षमता घट रही है। ब्राज़ीलियाई केंद्रीय बैंक के अनुसार मई में कुल ऋण चूक दर 4.7% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि पारिवारिक ऋणग्रस्तता 49.8% और आय प्रतिबद्धता 28.2% दर्ज की गई। सुलअमेरिका के सीईओ ने जोर देकर कहा कि बिना राजकोषीय अनुशासन के ब्याज दरों में स्थायी कमी संभव नहीं है और अगली सरकार को कठोर समायोजन करना होगा।
अर्जेंटीना में स्थिति और विकट है। सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिटी अर्जेंटीना (सीईपीए) की केंद्रीय बैंक के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट बताती है कि मई में बैंकों के साथ निजी क्षेत्र की चूक दर 7.6% और आभासी वॉलेटों के साथ 29.6% तक पहुंच गई, जो लगातार 19 महीनों की वृद्धि का परिणाम है। पारिवारिक चूक दर बैंकों में 12.3% और कंपनियों में 3% रही, जबकि क्रेडिट कार्ड पर 12.5% और व्यक्तिगत ऋणों पर 14.9% की अनियमितता दर्ज हुई। आभासी वॉलेटों में चूक नवंबर 2024 के 7.3% से बढ़कर मई 2026 में 29.6% हो गई, जो महामारी के चरम 27.1% को पार कर गया। संपूर्ण वित्तीय प्रणाली की चूक दर 15.5% पर पहुंच गई, जिसमें 58 लाख देनदार शामिल हैं। रिपोर्ट इस गिरावट को क्रयशक्ति में कमी और मौजूदा आर्थिक ढांचे से जोड़ती है। संसद में परिवारों के ऋणमोचन के लिए एएनएसईएस द्वारा 15 लाख पेसो तक के ऋण देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। यह स्थिति 2001 के संकट के बाद के स्तरों की याद दिलाती है और संकेत देती है कि उभरते बाज़ारों में घरेलू वित्तीय तनाव गहरा रहा है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में जमा की तुलना में ऋण की तेज़ वृद्धि और उच्च ब्याज दरों के बीच परिवारों की चुकौती क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव भारतीय रिज़र्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा, ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव और संभावित राजकोषीय सुधारों की दिशा, तथा अर्जेंटीना में ऋण राहत विधेयक पर संसदीय निर्णय होंगे।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.60 | critical |
भारतीय बैंकिंग प्रणाली में क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 62 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो संभावित क्रेडिट तनाव का संकेत देता है।
रिपोर्ट पूरी तरह से CMIE डेटा पर आधारित है, बिना गुणात्मक विश्लेषण या अंतर्राष्ट्रीय तुलना के आंकड़े प्रस्तुत करती है।
लेख में शीर्षक में उल्लिखित अर्जेंटीना और ब्राजील के क्रेडिट तनावों का कोई संदर्भ नहीं है, जिससे भारतीय मीट्रिक अलग-थलग हो जाता है।
अर्जेंटीना के परिवार कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं, डिफॉल्ट दरें ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं; ब्राजील के परिवार उच्च ब्याज दरों के कारण समान दबाव झेल रहे हैं।
CEPA और केंद्रीय बैंक के आंकड़ों का उपयोग सामाजिक प्रभाव को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो संकट को मौद्रिक नीति का प्रत्यक्ष परिणाम बताता है।
मौद्रिक प्राधिकरणों का दृष्टिकोण अनुपस्थित है, जो तर्क दे सकते हैं कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए उच्च दरें आवश्यक हैं।
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