
न्यूयॉर्क टाइम्स ने एयर फोर्स वन लीक मामले में पत्रकारों को भेजे समन को अदालत में चुनौती दी
अमेरिकी न्याय विभाग ने एयर फोर्स वन की सुरक्षा खामियों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को ग्रैंड जूरी के समक्ष गवाही देने का समन भेजा, जिसे न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रेस स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए अदालत में चुनौती दी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने बुधवार को अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा अपने तीन पत्रकारों को भेजे गए समन को रद्द करने के लिए दक्षिणी न्यूयॉर्क जिला अदालत में एक मोहरबंद याचिका दायर की। ये समन पत्रकारों को एक संघीय ग्रैंड जूरी के समक्ष उस रिपोर्टिंग के स्रोतों का खुलासा करने के लिए गवाही देने को बाध्य करते हैं, जो कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए एयर फोर्स वन विमान की सुरक्षा खामियों पर केंद्रित थी। अखबार के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डेविड मैकक्रॉ ने इन समन को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताते हुए कहा कि ये अखबार और पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
न्याय विभाग ने अपने बयान में कहा कि पत्रकार जांच के निशाना नहीं, बल्कि ‘भौतिक गवाह’ हैं और विभाग यह जानना चाहता है कि वर्गीकृत जानकारी किसने लीक की। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने सीनेट की सुनवाई में कहा कि पत्रकारों से पूछा जाने वाला सवाल यह नहीं कि उनके स्रोत कौन हैं, बल्कि यह कि ‘उन्हें वर्गीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा जानकारी किसने प्रदान की।’ डेमोक्रेटिक सीनेटर पीटर वेल्च ने इसे स्रोतों का खुलासा कराने के समान बताया। न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि यह प्रशासन द्वारा प्रेस को भयभीत करने का प्रयास है।
यह घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन की लीक के खिलाफ सख्ती की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसी वर्ष एफबीआई ने वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्टर के घर की तलाशी ली थी। अप्रैल 2025 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने बाइडन युग की उस नीति को समाप्त कर दिया जो लीक जांच में पत्रकारों के फोन रिकॉर्ड की गुप्त जब्ती से रोकती थी। विवादित विमान कतर द्वारा उपहार में दिया गया बोइंग 747-8 है, जिसका रेट्रोफिट किया जा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीक्रेट सर्विस ने राष्ट्रपति ट्रंप को इस विमान के इस्तेमाल से इसलिए रोका क्योंकि इसमें एंटी-मिसाइल क्षमता सहित उन्नत सुरक्षा प्रणालियां नहीं थीं, जिसके चलते ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के लिए पुराने विमान का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सुरक्षा चिंताओं से इनकार किया।
यह कानूनी लड़ाई वैश्विक स्तर पर प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकार-स्रोत गोपनीयता के लिए एक अहम परीक्षण मानी जा रही है। भारत जैसे लोकतंत्रों में भी सरकारी दबाव और स्रोत संरक्षण को लेकर बहस जारी है, और इस मामले का नतीजा अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल याचिका मोहरबंद है और अदालत में सुनवाई होनी है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई की घोषणा की है, जबकि न्याय विभाग ने राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता को दोहराया है। आने वाले दिनों में अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि वर्गीकृत जानकारी के लीक मामलों में सरकार पत्रकारों को स्रोत उजागर करने के लिए कितनी दूर तक बाध्य कर सकती है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
न्यूयॉर्क टाइम्स बुरी नीयत से काम करने वाली सरकार के खिलाफ प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
सरकार की 'बुरी नीयत' और संवैधानिक उल्लंघनों का बार-बार हवाला देकर, ब्लॉक समन को पत्रकारिता पर एक अवैध हमले के रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे कानूनी चुनौती एक नैतिक अनिवार्यता बन जाती है।
न्यूयॉर्क टाइम्स अपने पत्रकारों की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई करता है, समन चुनौती को न्यायिक प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा बताता है।
अखबार के अपने वकील को उद्धृत करके और प्रक्रियात्मक दाखिल पर ध्यान केंद्रित करके, ब्लॉक संघर्ष को सामान्य बनाता है, टाइम्स को एक जिम्मेदार संस्थान के रूप में चित्रित करता है जो अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ट्रम्प प्रशासन के समन को चुनौती देते हुए गवाही देने से इनकार करता है।
'बुरी नीयत' के आरोप को छोड़कर और केवल इनकार की रिपोर्ट करके, ब्लॉक सरकारी अतिक्रमण का संकेत देता है बिना स्पष्ट रूप से निंदा किए, पाठक को संघर्ष का अनुमान लगाने के लिए छोड़ देता है।
ब्लॉक न्यूयॉर्क टाइम्स के उस आरोप का उल्लेख नहीं करता कि समन बुरी नीयत से जारी किए गए थे, जिसने टकराव को तीव्र किया होता।
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