
रूसी साइबर हमलों पर यूरोपीय संघ और ब्रिटेन का संयुक्त प्रतिबंध, एफएसबी और जीआरयू अधिकारी निशाने पर
यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने पहली बार संयुक्त साइबर प्रतिबंध पैकेज लागू करते हुए रूसी खुफिया एजेंसियों और साइबर अपराधियों पर कार्रवाई की, जिसके बाद फ्रांस और जर्मनी ने अपने-अपने यहां रूसी राजदूतों को तलब किया।
यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन ने सोमवार को रूस के खिलाफ समन्वित प्रतिबंधों की घोषणा की, जिसमें मॉस्को की खुफिया एजेंसी एफएसबी और सैन्य खुफिया निदेशालय जीआरयू से जुड़े अधिकारियों, साइबर अपराधियों और निजी कंपनियों को निशाना बनाया गया। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, यह पहला संयुक्त साइबर प्रतिबंध पैकेज है, जो “पूरे यूरोप में अराजकता और विभाजन फैलाने के रूसी राज्य के लगातार और तेजी से लापरवाह प्रयासों” को लक्षित करता है। ब्रुसेल्स ने नौ व्यक्तियों और चार संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए, जबकि लंदन ने 24 नामों को अपनी काली सूची में शामिल किया। इन कदमों के तहत संपत्ति जब्त करने और वीजा प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की गई है।
पश्चिमी देशों की ओर से जारी बयानों में इन साइबर हमलों को रूस की व्यापक “हाइब्रिड” रणनीति का हिस्सा बताया गया, जो यूक्रेन युद्ध के चार वर्षों के दौरान यूरोप को अस्थिर करने के लिए तेज की गई है। ब्रिटिश विदेश कार्यालय ने कहा कि एफएसबी के सेंटर 16 द्वारा पोलैंड के ऊर्जा ग्रिड पर किए गए साइबर हमले को विफल कर दिया गया, लेकिन यदि सफल होता तो “कड़ाके की सर्दी में 5 लाख नागरिक बिजली से वंचित हो सकते थे।” फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि ये हमले सरकारी मंत्रालयों, कंपनियों और सेवा संचालकों को निशाना बनाकर “सूचना हासिल करने या रेल बुनियादी ढांचे जैसे परिचालनों को तोड़फोड़ करने” के उद्देश्य से किए गए। जर्मनी और नीदरलैंड ने भी अपने यहां रूसी राजदूतों को तलब कर विरोध दर्ज कराया।
यूरोपीय संघ के अनुसार, एफएसबी का सेंटर 16 वर्ष 2010 से फ्रांस में रणनीतिक सरकारी संस्थाओं के खिलाफ साइबर जासूसी कर रहा है और हाल के वर्षों में जर्मनी, पोलैंड, साइप्रस, नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, रोमानिया और फिनलैंड सहित कम से कम नौ देशों को प्रभावित कर चुका है। ब्रिटिश पक्ष ने बताया कि रूस ने ‘लूमा स्टीलर’ जैसे मैलवेयर का इस्तेमाल कर वैश्विक स्तर पर साइबर जासूसी अभियान चलाए, जिससे अकेले ब्रिटेन में पिछले छह महीनों में कम से कम 2,100 पीड़ित सामने आए। साथ ही, रूसी राज्य द्वारा संसाधित मीडिया कंपनी रायबार एलएलसी पर भी प्रतिबंध लगाए गए, जिस पर मोल्दोवा और आर्मेनिया के चुनावों में हस्तक्षेप करने और यूक्रेन के खिलाफ झूठी कहानियां फैलाने का आरोप है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पेरिस में यूक्रेन के समर्थक देशों के ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ समूह की बैठक हो रही थी, जिसमें कीव के लिए सुरक्षा गारंटी और वायु रक्षा प्रणालियों पर चर्चा हुई। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने इस बैठक को “जंगबाजों का गठबंधन” करार देते हुए कहा कि ये देश रूस के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई कर रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो स्वयं राज्य-प्रायोजित और गैर-राज्य साइबर खतरों का सामना कर रहे हैं, यह घटनाक्रम साइबर हमलों के बढ़ते सैन्यीकरण और अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे की सीमाओं को रेखांकित करता है।
यूरोपीय संघ मॉस्को के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज पर भी विचार कर रहा है, जिसमें और नाम जोड़े जा सकते हैं। ब्रिटेन ने अक्टूबर 2024 से अब तक 40 से अधिक संस्थाओं और व्यक्तियों पर सूचना युद्ध से जुड़े प्रतिबंध लगाए हैं। फ्रांस और जर्मनी द्वारा राजदूतों को तलब करने के अलावा, ईयू ने भी ब्रुसेल्स में रूसी प्रतिनिधि को बुलाने की घोषणा की है। विश्लेषकों का मानना है कि ये समन्वित कार्रवाइयां पश्चिमी देशों की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत रूस की साइबर क्षमताओं को उजागर करने और भविष्य के हमलों के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
| इज़राइली प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.80 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
Russia is accused of a cyber campaign, but the evidence is yet to be verified.
The use of the term 'alleged' introduces doubt about guilt, maintaining a neutral stance.
It does not mention the specific attack on the Polish power grid nor the exact number of sanctioned individuals, downplaying the severity.
Russia is waging a hybrid war against Europe, with cyber attacks aimed at destabilizing critical infrastructure.
Emphasizing concrete details of the attack on the Polish power grid and the number of sanctions creates a sense of imminent threat.
It does not report the summoning of the Russian ambassador by France, focusing only on Anglo-European sanctions.
Europe responds united to Russian provocations, with coordinated sanctions and summoning of ambassadors.
Presenting the actions of multiple countries (France, Germany, EU, UK) as a cohesive and legitimate response.
It does not use the term 'alleged', presenting the accusations as established facts.
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