
रूसी सुरक्षा एजेंसी ने दो सैन्य हवाई अड्डों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों की साजिश नाकाम करने का दावा किया
एफएसबी के अनुसार, पश्चिमी देशों में निर्मित कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त 24 ड्रोन जब्त किए गए और कई संदिग्ध गिरफ्तार हुए।
रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) ने सोमवार को दावा किया कि उसने अमूर क्षेत्र के “उक्राइंका” और चेल्याबिंस्क क्षेत्र के “शागोल” सैन्य हवाई अड्डों पर नियोजित बड़े पैमाने के ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला को विफल कर दिया। एजेंसी के अनुसार, यूक्रेनी विशेष सेवाओं ने ब्रांस्क क्षेत्र में गुब्बारों और बड़े मानवरहित विमानों के जरिए एफपीवी ड्रोन पहुंचाए थे, जिन्हें बाद में दोहरे तल वाले कार ट्रेलरों में छिपाकर लक्ष्य तक ले जाया गया। वहां किराए के गैरेजों में इन्हें असेंबल कर विस्फोटकों से लैस किया जा रहा था। छापेमारी में 24 एफपीवी ड्रोन जब्त हुए, जो ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और स्वीडन में निर्मित न्यूरल नेटवर्क नियंत्रण मॉड्यूल से सुसज्जित थे और जिनमें एक किलोग्राम से अधिक विस्फोटक भरा जा चुका था। साथ ही स्व-विनाश उपकरणों वाली दो मोबाइल ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन भी बरामद हुईं।
रूसी पक्ष ने इस पूरी कार्रवाई को “अभूतपूर्व पैमाने और खतरे” की साजिश बताया। एफएसबी के बयान में कहा गया कि यह ऑपरेशन यूक्रेनी विशेष सेवाओं द्वारा “पश्चिमी आकाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी” से तैयार किया गया था और हर कदम रूसी प्रति-खुफिया की कड़ी निगरानी में था। राज्य ड्यूमा की रक्षा समिति के सदस्य आंद्रेई कोलेसनिक ने इसे जून 2025 की यूक्रेनी “स्पाइडर वेब” कार्रवाई की पुनरावृत्ति का प्रयास करार दिया, जिसमें ट्रकों में छिपाए गए ड्रोनों ने कई रूसी एयरबेसों को निशाना बनाया था। उन्होंने सड़क जांच कड़ी करने, प्रति-खुफिया कार्य बढ़ाने और हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह घटनाक्रम यूक्रेन की गहराई तक मार करने की क्षमता में वृद्धि और रूस की जवाबी कार्रवाई की रणनीति को रेखांकित करता है। पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह विफल ऑपरेशन 2025 के उस हमले से मिलता-जुलता है जिसमें अमेरिकी अनुमानों के मुताबिक करीब 10 रूसी विमान नष्ट हो गए थे। जब्त ड्रोनों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नेविगेशन का उपयोग रूसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों को चकमा देने के लिए किया गया था, जो पश्चिमी तकनीक के युद्धक्षेत्र में बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों और रक्षा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले तेज किए हैं, जिससे कई क्षेत्रों में ईंधन की कमी हुई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने पिछले सप्ताह कहा था कि पश्चिमी समर्थन के कारण यूक्रेन में “विशेष सैन्य अभियान” एक युद्ध में बदल चुका है।
एफएसबी ने बताया कि सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है और जांच एजेंसी ने आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। एजेंसी ने यह भी याद दिलाया कि रूसी कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपराध से पीछे हटता है और उसे रोकने में सहयोग करता है तो उसे आपराधिक दायित्व से मुक्त किया जा सकता है। यह घटनाक्रम रोस्तोव-ऑन-डॉन स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे पर हाल ही में विफल किए गए इसी तरह के एक हमले और मॉस्को क्षेत्र में उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों पर जानलेवा हमलों की साजिशों के बाद सामने आया है। रूसी सांसदों ने भविष्य में ऐसे खतरों से निपटने के लिए सड़क परिवहन की कड़ी निगरानी और हवाई अड्डों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +1.00 | aligned |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Russia rejects accusations of aggression and presents itself as a victim of a terrorist attack planned by Ukraine and the West.
By emphasizing the 'unprecedented' scale and Western involvement, a hierarchy of threats is created that justifies the need for a harsh response and internal surveillance.
It does not mention the possibility that the FSB may have exaggerated or that the attacks were not imminent, nor does it provide independent evidence.
The news agency reports the FSB statement without adding its own assessments, maintaining an observer position.
It uses the structure of the news as an official statement, without independent verification, which leaves the reader the possibility to doubt or accept.
It does not include the context of previous Russian claims of foiled attacks that turned out to be unfounded, nor the Ukrainian point of view.
The Russian security service announces the seizure of Western drones with AI, highlighting the technological novelty and global threat.
By inserting the detail of artificial intelligence, the focus shifts from the bilateral dispute to a universal technological threat, making the news more relevant to a global audience.
It does not mention that the FSB has not provided evidence of AI use, nor that Western drones may have been captured previously.
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