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अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोरOracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजनाहालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाईसंयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दियाहार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबलाअरब लीग ने मिस्र के नबील फहमी को नया महासचिव नियुक्त किया, एक जुलाई से संभालेंगे कार्यभारब्राजील में राजकोषीय ढील से दीर्घकालिक उच्च ब्याज दरों का अनुमान, भारत को तेल मूल्यों में गिरावट से राहतरूस में eSIM और M2M सिम कार्ड पर सख्ती की तैयारी, वैश्विक रोमिंग उदारीकरण से उलट दिशाअमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोरOracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजनाहालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाईसंयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दियाहार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबलाअरब लीग ने मिस्र के नबील फहमी को नया महासचिव नियुक्त किया, एक जुलाई से संभालेंगे कार्यभारब्राजील में राजकोषीय ढील से दीर्घकालिक उच्च ब्याज दरों का अनुमान, भारत को तेल मूल्यों में गिरावट से राहतरूस में eSIM और M2M सिम कार्ड पर सख्ती की तैयारी, वैश्विक रोमिंग उदारीकरण से उलट दिशा
भू-राजनीति और राजनीतिरविवार, 21 जून 2026

इज़राइली सर्वेक्षण में 92% ने माना ईरान युद्ध में जीता, नेतन्याहू के प्रति जनता का भरोसा गिरा

हिब्रू विश्वविद्यालय और अगाम इंस्टीट्यूट के अध्ययन से खुलासा हुआ कि अधिकांश इज़राइली अपनी दीर्घकालिक सुरक्षा को कमज़ोर मानते हैं और अमेरिका-ईरान समझौते का विरोध करते हैं, जबकि अमेरिकी जनमत ट्रंप की कूटनीति पर सवाल उठा रहा है।

हिब्रू विश्वविद्यालय, यरुशलम और अगाम इंस्टीट्यूट द्वारा 17 से 20 जून के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 92.1 प्रतिशत इज़राइली नागरिकों का मानना है कि हालिया युद्ध और उसके बाद हुए अमेरिका-ईरान समझौते में ईरान अधिक लाभप्रद स्थिति में रहा। वहीं 86 प्रतिशत ने समग्र परिणामों को नकारात्मक बताया और 82.9 प्रतिशत का आकलन है कि इस सैन्य अभियान से इज़राइल की दीर्घकालिक सुरक्षा कमज़ोर हुई है। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनावी आधार माने जाने वाले दक्षिणपंथी मतदाताओं में भी 93.1 प्रतिशत ने ईरान की जीत स्वीकार की।

सर्वेक्षण में नेतन्याहू के नेतृत्व पर अविश्वास स्पष्ट दिखा: 72.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे सैन्य सफलताओं के बारे में उनके दावों पर भरोसा नहीं करते, और 56.4 प्रतिशत ने युद्ध प्रबंधन को ‘असफल’ या ‘कमज़ोर’ करार दिया। प्रधानमंत्री पद के लिए उनका समर्थन मार्च के आरंभ के 40.5 प्रतिशत से गिरकर जून में 29.4 प्रतिशत रह गया। इज़राइली चैनल 12 के एक अन्य सर्वेक्षण में 59 प्रतिशत ने कहा कि नेतन्याहू को राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। इसी जनमत में 63.2 प्रतिशत ने अमेरिका-ईरान समझौते का विरोध किया, जबकि मात्र 12.1 प्रतिशत ने समर्थन जताया।

युद्ध परिणामों के प्रति नकारात्मक रवैये के बावजूद, हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को इज़राइली जनता का समर्थन बरकरार है। 48.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान का पक्ष लिया, भले ही उससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तनाव बढ़े। वहीं अमेरिका में एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी सेंटर के एक अलग सर्वेक्षण के मुताबिक 65 प्रतिशत वयस्क ईरान मामले पर ट्रंप के प्रबंधन से असंतुष्ट हैं, और लगभग आधे से अधिक ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई सीमा से अधिक बढ़ गई थी। रिपब्लिकन मतदाताओं में यह असंतोष अपेक्षाकृत कम (28 प्रतिशत) है।

रॉयटर्स और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी राष्ट्रपतियों ने 17 जून को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम सुनिश्चित करना था। परंतु इसके बाद भी इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष जारी रहा, और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया। ईरान ने चेतावनी दी है कि लेबनान में इज़राइली सैन्य कार्रवाई जारी रहने से समझौता ख़तरे में पड़ सकता है। निर्धारित वार्ता स्विट्ज़रलैंड में रविवार को होनी है, जहाँ एक स्थायी समझौते पर मंत्रणा का रास्ता निकलना बाकी है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

28%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेसअरब लेवांत-मगरिब प्रेस
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
संदेहआक्रोश

Survey results from Israel show an overwhelming public perception that Iran emerged stronger from the conflict, with 92% of Israelis holding this view. There is deep dissatisfaction with Netanyahu's leadership, and a majority want him to retire from politics. The tone is one of disillusionment with the government's handling of the war.

अरब लेवांत-मगरिब प्रेस
संदेहव्यावहारिकता

An Israeli opinion poll reveals that the vast majority of citizens consider Iran the victor in the recent Middle East war and view the US-Iran deal negatively. Interestingly, support for an aggressive military campaign against Hezbollah remains high, reflecting a complex mix of defeatism and belligerence. The survey underscores widespread skepticism toward Netanyahu's claims.

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अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोर·Oracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजना·हालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाई·संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दिया·हार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबला·अरब लीग ने मिस्र के नबील फहमी को नया महासचिव नियुक्त किया, एक जुलाई से संभालेंगे कार्यभार·ब्राजील में राजकोषीय ढील से दीर्घकालिक उच्च ब्याज दरों का अनुमान, भारत को तेल मूल्यों में गिरावट से राहत·रूस में eSIM और M2M सिम कार्ड पर सख्ती की तैयारी, वैश्विक रोमिंग उदारीकरण से उलट दिशा·अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोर·Oracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजना·हालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाई·संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दिया·हार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबला·अरब लीग ने मिस्र के नबील फहमी को नया महासचिव नियुक्त किया, एक जुलाई से संभालेंगे कार्यभार·ब्राजील में राजकोषीय ढील से दीर्घकालिक उच्च ब्याज दरों का अनुमान, भारत को तेल मूल्यों में गिरावट से राहत·रूस में eSIM और M2M सिम कार्ड पर सख्ती की तैयारी, वैश्विक रोमिंग उदारीकरण से उलट दिशा·
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इज़राइली सर्वेक्षण में 92% ने माना ईरान युद्ध में जीता, नेतन्याहू के प्रति जनता का भरोसा गिरा

हिब्रू विश्वविद्यालय और अगाम इंस्टीट्यूट के अध्ययन से खुलासा हुआ कि अधिकांश इज़राइली अपनी दीर्घकालिक सुरक्षा को कमज़ोर मानते हैं और अमेरिका-ईरान समझौते का विरोध करते हैं, जबकि अमेरिकी जनमत ट्रंप की कूटनीति पर सवाल उठा रहा है।

हिब्रू विश्वविद्यालय, यरुशलम और अगाम इंस्टीट्यूट द्वारा 17 से 20 जून के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 92.1 प्रतिशत इज़राइली नागरिकों का मानना है कि हालिया युद्ध और उसके बाद हुए अमेरिका-ईरान समझौते में ईरान अधिक लाभप्रद स्थिति में रहा। वहीं 86 प्रतिशत ने समग्र परिणामों को नकारात्मक बताया और 82.9 प्रतिशत का आकलन है कि इस सैन्य अभियान से इज़राइल की दीर्घकालिक सुरक्षा कमज़ोर हुई है। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनावी आधार माने जाने वाले दक्षिणपंथी मतदाताओं में भी 93.1 प्रतिशत ने ईरान की जीत स्वीकार की।

सर्वेक्षण में नेतन्याहू के नेतृत्व पर अविश्वास स्पष्ट दिखा: 72.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे सैन्य सफलताओं के बारे में उनके दावों पर भरोसा नहीं करते, और 56.4 प्रतिशत ने युद्ध प्रबंधन को ‘असफल’ या ‘कमज़ोर’ करार दिया। प्रधानमंत्री पद के लिए उनका समर्थन मार्च के आरंभ के 40.5 प्रतिशत से गिरकर जून में 29.4 प्रतिशत रह गया। इज़राइली चैनल 12 के एक अन्य सर्वेक्षण में 59 प्रतिशत ने कहा कि नेतन्याहू को राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। इसी जनमत में 63.2 प्रतिशत ने अमेरिका-ईरान समझौते का विरोध किया, जबकि मात्र 12.1 प्रतिशत ने समर्थन जताया।

युद्ध परिणामों के प्रति नकारात्मक रवैये के बावजूद, हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को इज़राइली जनता का समर्थन बरकरार है। 48.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान का पक्ष लिया, भले ही उससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तनाव बढ़े। वहीं अमेरिका में एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी सेंटर के एक अलग सर्वेक्षण के मुताबिक 65 प्रतिशत वयस्क ईरान मामले पर ट्रंप के प्रबंधन से असंतुष्ट हैं, और लगभग आधे से अधिक ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई सीमा से अधिक बढ़ गई थी। रिपब्लिकन मतदाताओं में यह असंतोष अपेक्षाकृत कम (28 प्रतिशत) है।

रॉयटर्स और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी राष्ट्रपतियों ने 17 जून को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम सुनिश्चित करना था। परंतु इसके बाद भी इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष जारी रहा, और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया। ईरान ने चेतावनी दी है कि लेबनान में इज़राइली सैन्य कार्रवाई जारी रहने से समझौता ख़तरे में पड़ सकता है। निर्धारित वार्ता स्विट्ज़रलैंड में रविवार को होनी है, जहाँ एक स्थायी समझौते पर मंत्रणा का रास्ता निकलना बाकी है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 3 स्रोत · 1 भाषा

28%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र17%
निंदक83%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेसअरब लेवांत-मगरिब प्रेस
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
संदेहआक्रोश

Survey results from Israel show an overwhelming public perception that Iran emerged stronger from the conflict, with 92% of Israelis holding this view. There is deep dissatisfaction with Netanyahu's leadership, and a majority want him to retire from politics. The tone is one of disillusionment with the government's handling of the war.

अरब लेवांत-मगरिब प्रेस
संदेहव्यावहारिकता

An Israeli opinion poll reveals that the vast majority of citizens consider Iran the victor in the recent Middle East war and view the US-Iran deal negatively. Interestingly, support for an aggressive military campaign against Hezbollah remains high, reflecting a complex mix of defeatism and belligerence. The survey underscores widespread skepticism toward Netanyahu's claims.

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