
ब्राजील में राजकोषीय ढील से दीर्घकालिक उच्च ब्याज दरों का अनुमान, भारत को तेल मूल्यों में गिरावट से राहत
ब्राजील सरकार के चुनावी वर्ष में 190 अरब रियाल के व्यय पैकेज ने बाजार का विश्वास हिला दिया है, जबकि भारत में अमेरिका-ईरान संधि के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से विकास दर 7% पार कर सकती है।
ब्राजील की लूला सरकार ने 2026 में प्रत्यक्ष लाभार्थी योजनाओं पर लगभग 190 अरब रियाल खर्च करने की घोषणा की, जिसमें से 118 अरब रियाल राजकोषीय ढांचे की व्यय सीमा से बाहर रखे गए हैं। इस कदम का तात्कालिक प्रभाव बाजार की ब्याज दर अपेक्षाओं पर पड़ा: बी3 पर कारोबारित वायदा अनुबंध अगले दस वर्षों तक सेलिक दर के 14% से ऊपर बने रहने का संकेत दे रहे हैं, और फोकस सर्वेक्षण में वर्षांत मुद्रास्फीति 5.33% तथा सेलिक 14% पर आंकी गई है।
इस राजकोषीय विस्तार की संरचना विश्वसनीयता को कमजोर करती है। अर्थशास्त्री मार्कोस मेंडेस के एक्सपी इन्वेस्टिमेंटोस के लिए तैयार अध्ययन के अनुसार, लगभग 60% व्यय राजकोषीय लेखांकन में दर्ज नहीं होंगे, जिससे सरकार औपचारिक रूप से घाटा लक्ष्य पूरा करते हुए भी वास्तविक ऋणग्रस्तता बढ़ा रही है। सार्वजनिक लेखा विशेषज्ञ मुरिलो वियाना बताते हैं कि ब्राजील का सार्वजनिक व्यय संघटन निवेश के लिए बहुत कम स्थान छोड़ता है, और 8-9% की वास्तविक ब्याज दर पर ऋण की गतिशीलता तीव्र हो जाती है। यह परिदृश्य पूर्व राष्ट्रपति दिल्मा रूसेफ के कार्यकाल की याद दिलाता है, जब ब्याज दर वक्र लंबे समय तक ऊंचा बना रहा।
इसके विपरीत, भारत को पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है, जिससे बाह्य संतुलन और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के जून के निर्णय के बाद जारी विचार-विमर्श में सदस्यों ने संकेत दिया कि यदि तेल कीमतों में और गिरावट आती है तो विकास दर 7% से ऊपर जा सकती है, जबकि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.6% वृद्धि का अनुमान लगाया है। रिज़र्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा जमाराशियों को आकर्षित करने के उपायों और सरकारी ऋण में निवेश को प्रोत्साहन से रुपया स्थिर बना हुआ है।
वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को लेकर विभाजित आकलन दिखते हैं। बैंक ऑफ अमेरिका के जून सर्वेक्षण में 170 अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने मुद्रास्फीति को सबसे बड़ा जोखिम बताया, वहीं कुछ प्रबंधकों का मानना है कि आने वाले महीनों में दबाव घटेगा। कैंड्रियम की नादेज दुफोसे ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारी निवेश और बुनियादी ढांचे की क्षमता सीमाएं मुद्रास्फीति की तीसरी लहर पैदा कर सकती हैं, भले ही यह तीव्र न हो, लेकिन विस्फीति की राह बाजार की उम्मीद से धीमी रह सकती है।
अगले तथ्यात्मक मील के पत्थर के रूप में, ब्राजील का केंद्रीय बैंक मंगलवार को अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक का विवरण जारी करेगा, जिससे हालिया भ्रामक संचार के बाद स्पष्टता की उम्मीद है। भारत में रिज़र्व बैंक खाद्य और ईंधन मूल्यों के पारगमन प्रभाव पर नज़र रखेगा, जबकि तेल बाजार पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया की स्थिरता पर निर्भर करेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ब्राजील सरकार के 'लाभ पैकेज' ने, जो चुनावी वर्ष में लगभग 190 अरब रियाल का खर्च है और जिसका अधिकांश हिस्सा राजकोषीय नियमों से बाहर है, बाजार का भरोसा तोड़ दिया है। विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि यह राजकोषीय गैरजिम्मेदारी ब्याज दर की उम्मीदों को 14% से ऊपर धकेल रही है और सार्वजनिक ऋण को अस्थिर बना रही है। केंद्रीय बैंक के फोकस सर्वेक्षण में मुद्रास्फीति और सेलिक दर के पूर्वानुमानों में वृद्धि की पुष्टि होती है, जो देश की आर्थिक दिशा पर गहरी चिंता दर्शाता है।
ईसीबी के मुख्य अर्थशास्त्री ने चेतावनी दी है कि मुद्रास्फीति लंबे समय तक 2% लक्ष्य से ऊपर रह सकती है। यह व्यापक वैश्विक मुद्रास्फीति चिंताओं को दर्शाता है, क्योंकि केंद्रीय बैंक लगातार मूल्य दबावों से जूझ रहे हैं। यह बयान प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में विकास को समर्थन और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के बीच नाजुक संतुलन को रेखांकित करता है।
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