
रूस में सेकेंड-हैंड कार बाजार की मजबूती, यूरोप में इलेक्ट्रिक वाहनों की धमक; वैश्विक ऑटो उद्योग के मिले-जुले संकेत
मई 2026 में रूस का पुरानी कार बाजार 5.11 लाख इकाई पर स्थिर, यूरोपीय संघ में नई कार बिक्री 3.2% बढ़ी, और इंडोनेशियाई निर्यात में 31.4% का उछाल।
रूस में मई 2026 के दौरान सेकेंड-हैंड यात्री कारों की बिक्री सालाना आधार पर 4.2% बढ़कर 5,11,500 इकाई तक पहुंच गई, जो लगातार दूसरा महीना है जब यह आंकड़ा पांच लाख के पार रहा। हालांकि, अप्रैल की तुलना में इसमें 5.7% की गिरावट दर्ज की गई, जिसे विशेषज्ञ मौसमी कारकों और लंबी छुट्टियों से जोड़ते हैं। इस बाजार की मजबूती के पीछे नई कारों की ऊंची कीमतें, मजबूत रूबल और तरजीही रीसाइक्लिंग शुल्क में संभावित बदलाव की आशंका जैसे कारक हैं। लाडा ब्रांड की बिक्री में गिरावट के बावजूद, टोयोटा, किआ और हुंडई जैसी विदेशी कंपनियों की पुरानी कारों की मांग बढ़ी है, और चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ रही है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 55% रूसी उपभोक्ता पुरानी कार के लिए 20 लाख रूबल से अधिक खर्च करने को तैयार नहीं हैं, जबकि बाजार में औसत कीमत 14.3 लाख रूबल है।
दूसरी ओर, यूरोपीय संघ में नई कारों की बिक्री मई में 3.2% बढ़कर 9.55 लाख इकाई रही, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री में 42.9% का उछाल प्रमुख रहा। ईवी की बाजार हिस्सेदारी अब 20% तक पहुंच गई है। जर्मनी और फ्रांस में मामूली वृद्धि, जबकि स्पेन में गिरावट देखी गई। चीनी कंपनियों बीवाईडी और चेरी की बिक्री कई गुना बढ़ी, और टेस्ला की बिक्री ढाई गुना उछली। यह रुझान यूरोप के तेजी से विद्युतीकरण की ओर बढ़ने का संकेत है।
उत्तरी अमेरिका में, मेक्सिको का वाहन बेड़ा 5.4 करोड़ इकाई से अधिक हो गया है, जिसकी औसत आयु 16.2 वर्ष है। इस कारण ऑटो पार्ट्स और रखरखाव सेवाओं की मांग ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। राष्ट्रीय ऑटो पार्ट्स उद्योग (आईएनए) के अनुसार, मैक्सिकन परिवार प्रतिवर्ष औसतन 15,507 पेसो ईंधन, पुर्जों और सर्विसिंग पर खर्च कर रहे हैं। यह बाजार न केवल घरेलू बल्कि पूरे उत्तरी अमेरिकी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जहां 36.7 करोड़ वाहन सड़कों पर हैं।
एशिया में, इंडोनेशिया से तैयार कारों (सीबीयू) का निर्यात मई में मासिक आधार पर 31.4% बढ़कर 47,560 इकाई हो गया, जो वैश्विक मांग में मजबूती दर्शाता है। यह आंकड़ा दक्षिण-पूर्व एशियाई विनिर्माण केंद्र के रूप में इंडोनेशिया की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई बाजारों के लिए ये वैश्विक रुझान महत्वपूर्ण हैं: पुरानी कारों का संगठित बाजार तेजी से बढ़ रहा है, ईवी अपनाने की गति बढ़ी है, और निर्यात के अवसर भी बढ़ रहे हैं। अगला पड़ाव: जून के अंत में जारी होने वाले तिमाही बिक्री आंकड़े और विभिन्न देशों में ईवी नीतियों की समीक्षा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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यूरोप में नई कार पंजीकरण बढ़ रहे हैं, इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजार हिस्सेदारी बढ़ रही है जबकि डीजल और पेट्रोल घट रहे हैं। बाजार व्यावहारिक रूप से हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक की ओर बढ़ रहा है।
रूस का पुरानी कार बाजार मजबूत बना हुआ है, नई कारों की ऊंची कीमतों और मजबूत रूबल के कारण बिक्री बढ़ रही है। जहां यूरोप इलेक्ट्रिक पर जोर दे रहा है, रूसी आर्थिक व्यावहारिकता से पुरानी कारों पर टिके हैं।
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