
स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान तकनीकी वार्ता आरंभ, लेबनान और हरमुज पर बढ़ता दबाव
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ की अगुआई में ब्यूरगेनस्टॉक में यह वार्ता 60-दिन के समझौता-ज्ञापन को स्थायी शांति में बदलने का प्रयास है।
21 जून, 2026 को स्विट्जरलैंड के ब्यूरगेनस्टॉक रिसॉर्ट में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी-स्तर की बातचीत शुरू हुई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में शिष्टमंडल, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं, रविवार सुबह वहां पहुंचा। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष एवं मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ कर रहे हैं, जिसमें विदेश मंत्री अब्बास अराक़्ची और केंद्रीय बैंक के गवर्नर मौजूद हैं। पाकिस्तान और कतर मध्यस्थता कर रहे हैं। वेंस ने कहा कि “हम पिछले कुछ घंटों में बड़ी प्रगति कर चुके हैं”, और परमाणु मुद्दे व लेबनान युद्धविराम को प्राथमिकता दी जाएगी। यह वार्ता पिछले सप्ताह हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता-ज्ञापन पर आधारित है, जिसके तहत 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता करना है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बाघ़ाई के अनुसार, तेहरान किसी अंतिम समझौते पर तभी बढ़ेगा जब पूर्व प्रतिबद्धताएं लागू हों, विशेषकर लेबनान में पूर्ण युद्धविराम। इसी मांग को लेकर ईरान ने शनिवार को हरमुज जलडमरूमध्य फिर से बंद करने की घोषणा की, जिसे उसने इजरायली हमलों को अमेरिकी वचन का उल्लंघन बताया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसका खंडन करते हुए कहा कि 55 व्यापारिक जहाज 1.7 करोड़ बैरल से अधिक तेल लेकर शनिवार को ही जलडमरूमध्य से गुजरे। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि यदि 60 दिनों में सौदा नहीं हुआ तो अमेरिका जलडमरूमध्य पर कर लगा सकता है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोख़्बेर ने अमेरिका पर समझौते के पहले बिंदु—सर्वांगीण युद्धविराम—को लागू न करने का आरोप लगाया।
लेबनान में हालात बातचीत को जटिल बना रहे हैं। शुक्रवार के युद्धविराम के बावजूद इजरायली सेना और हिज़्बुल्लाह में झड़पें जारी रहीं। इजरायली सैन्य सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को गोलीबारी रोकने का निर्देश दिया है, परंतु सैनिक “सुरक्षा क्षेत्र में रक्षात्मक” मुद्रा में हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च से अब तक 4,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेनाध्यक्ष असीम मुनीर मध्यस्थता के प्रयासों में जुटे हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह “ईरान और अमेरिका के बीच हुई समझ के कार्यान्वयन में सहयोग जारी रखेगा।”
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले से शुरू हुआ था। हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय ज्ञापन में हरमुज जलडमरूमध्य को खोलना, ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, जब्त संपत्तियों को मुक्त करना और तेल बिक्री की अनुमति देना शामिल है। ईरान ने अपने उच्च-संवर्धित यूरेनियम भंडार को पतला करने पर सहमति दी है। वार्ता में तकनीकी कार्य-समूह गठित किए गए हैं जो अंतिम समझौते के प्रावधानों पर काम करेंगे। पाकिस्तान और कतर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। अगले कुछ दिनों में विशेषज्ञ-स्तर की बैठकों के बाद राजनीतिक स्तर की बातचीत संभावित है, जिसके नतीजे पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता को प्रभावित करेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The Latin American press reports the start of US-Iran negotiations in Switzerland as a crucial diplomatic step, highlighting the arrival of delegations and the issues on the table: nuclear program, Lebanon ceasefire, and the Strait of Hormuz. The coverage is factual, detailing the 14-point memorandum and the 60-day timeline, without taking a strong editorial stance. Emphasis is on the high-level delegations and the multilateral mediation effort.
The Russian press frames the talks as a technical negotiation facilitated by Pakistan and Qatar, with a focus on the mediation process and the formation of technical groups. The coverage is calm and procedural, highlighting the roles of the mediators and the Iranian delegation's arrival. There is no strong bias, but the narrative underscores the importance of the Islamabad memorandum and the need for a comprehensive agreement.
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