
बगीचे की नम मिट्टी से उभरता एक नया आक्रमण: जलवायु परिवर्तन और कीटों का बदलता चेहरा
स्वीडन के बागानों में सूखे बसंत के बाद बारिश से जागी 'मर्डर स्लग' से लेकर इंडोनेशिया की मक्के की फसलों में तेज़ी से फैलती आर्मीवर्म तक, बदलता मौसम कीटों को अधिक आक्रामक और प्रतिरोधी बना रहा है।
जून 2026 की एक भीगी सुबह, स्वीडन के एक बागान मालिक ने अपने गीले बगीचे में कदम रखा। पिछले कुछ हफ्तों की असामान्य शुष्कता के बाद, बारिश की पहली बूंदों ने मिट्टी को भिगोया तो एक परिचित लेकिन अप्रिय दृश्य उभरा: बड़े, भूरे रंग के 'मर्डर स्लग' (हत्यारा घोंघा) पत्तियों के नीचे से रेंगते हुए बाहर आ रहे थे, उनके चमकदार शरीर नम हरियाली पर धीमी लकीरें छोड़ रहे थे। गोथेनबर्ग प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के घोंघा विशेषज्ञ टेड फॉन प्रोशविट्ज़ के अनुसार, शुष्क वसंत ने इनकी संख्या 2024 की तुलना में बेहद कम कर दी थी, लेकिन अब बारिश ने बचे हुए घोंघों को अंडे देने के लिए बाहर निकाला है। आने वाले सप्ताहों की नमी तय करेगी कि ये अंडे कितने सफल होंगे।
बागान मालिक के लिए यह एक पुरानी लड़ाई है, लेकिन इस बार एक अप्रत्याशित सहयोगी सामने आया है: चित्तीदार 'पैंथर स्लग'। फॉन प्रोशविट्ज़ बताते हैं कि यह धारीदार घोंघा मर्डर स्लग का प्रतिस्पर्धी ही नहीं, बल्कि उसे खा भी सकता है। इसलिए विशेषज्ञ की सलाह है कि बागान मालिक पैंथर स्लग को बख्श दें, ताकि वह इस आक्रामक प्रजाति को काबू में रखने में मदद करे। यह सलाह एक गहरे बदलाव की ओर इशारा करती है—कीटों के विरुद्ध पूर्ण विनाश की जगह, पारिस्थितिक संतुलन को साधने की कोशिश।
यह स्वीडिश बागान की कहानी एक वैश्विक पैटर्न का हिस्सा है। इंडोनेशिया में, 2019 में पहली बार दर्ज की गई फॉल आर्मीवर्म (स्पोडोप्टेरा फ्रूजीपेर्डा) मक्के की फसलों को तबाह कर रही है। रिपब्लिका की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से बढ़ता तापमान इस कीट के चयापचय को तेज़ कर देता है—हर एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि फसल हानि को बढ़ा सकती है, और कीट अब अधिक पीढ़ियाँ पैदा कर रहे हैं। वहीं नाइजीरिया में, नेशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NIHORT) किसानों को नीम, लहसुन और मिर्च के प्राकृतिक स्प्रे की ओर लौटने की सलाह दे रहा है, क्योंकि बारिश के मौसम में एफिड और सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में, किसान जंगली सूअरों और लोमड़ियों से जूझ रहे हैं, लेकिन समस्या तब और गहराती है जब गैर-निवासी भूमि मालिक कीट प्रबंधन में भाग नहीं लेते—स्थानीय किसान डेरेक लार्सन के अनुसार, यह एक कानूनी दायित्व है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, और सहयोग के बिना जंगली सूअरों को रोकना असंभव है।
ब्रिटेन में, रॉयल एंटोमोलॉजिकल सोसायटी ने चेतावनी दी है कि जलवायु गर्म होने से एशियाई हॉर्नेट और अर्जेंटीनी चींटी जैसी आक्रामक प्रजातियाँ अब सर्दियों में भी जीवित रह सकती हैं। प्रोफेसर हेलेन रॉय के अनुसार, ये कीट पारिस्थितिकी तंत्र के इंजीनियर हैं जो देशी परागणकर्ताओं और प्राकृतिक कीट नियंत्रकों को खतरे में डालते हैं। इन सबके बीच, एक समान सबक उभरता है: रासायनिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता ने कीटों को प्रतिरोधी बना दिया है और लाभकारी कीटों को भी नष्ट किया है। अब किसान और बागान मालिक धीरे-धीरे एक पुरानी समझ की ओर लौट रहे हैं—प्रकृति के अपने संतुलन को सहारा देने की। गोथेनबर्ग के उस बगीचे में, शाम के धुंधलके में, एक पैंथर स्लग और एक मर्डर स्लग आमने-सामने हैं। यह छोटा-सा दृश्य एक बड़े संघर्ष की छाया है, जहाँ हर बारिश के बाद ज़मीन से नए आक्रमणकारी उभरते हैं, और हर माली को तय करना है कि किसे बचाना है और किसे नहीं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्वीडिश बागवानों के लिए अच्छी खबर: असामान्य रूप से शुष्क वसंत ने आक्रामक स्पेनिश स्लग की आबादी को काफी कम कर दिया है। एक विशेषज्ञ पुष्टि करते हैं कि संख्या 2024 की गर्मियों के चरम से काफी नीचे है, हालांकि आने वाले हफ्तों का मौसम निर्णायक होगा। इस बगीचे के कीट के खिलाफ शांत संघर्ष को इस वर्ष राहत मिल सकती है।
इंडोनेशिया में, जलवायु परिवर्तन कीटों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए एक विकट खतरे में बदल रहा है। 2019 में प्रकट हुआ फॉल आर्मीवर्म अब अधिक आक्रामक व्यवहार करता है और इसे नियंत्रित करना कठिन है, जो एक व्यापक पैटर्न को दर्शाता है। आक्रामक कीटों के खिलाफ शांत वैश्विक संघर्ष तेज हो रहा है क्योंकि गर्म होती परिस्थितियाँ कीट व्यवहार को बदल रही हैं।
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