
जर्मनी की पेंशन क्रांति: स्वीडिश मॉडल अपनाने की सिफारिश, सरकार ने पूरा पैकेज लागू करने का वादा किया
विशेषज्ञ आयोग ने अनिवार्य पूंजी-आधारित पेंशन, सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि और शीघ्र सेवानिवृत्ति पर अंकुश का प्रस्ताव रखा; चांसलर मेर्ज ने कहा- 'कोई रोज़िन पिकिंग नहीं'
जर्मनी की सरकारी पेंशन सुधार आयोग ने मंगलवार को अपनी लंबित रिपोर्ट सौंपी, जिसमें देश की वृद्ध होती आबादी के बीच सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को स्थायी बनाने के लिए एक व्यापक खाका पेश किया गया। चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज और श्रम मंत्री बार्बेल बास ने तुरंत घोषणा की कि सभी 33 सिफारिशों को 'पूर्ण रूप से और शीघ्रता से' लागू किया जाएगा, क्योंकि यह एक 'समग्र कलाकृति' है जिसके अलग-अलग हिस्सों को नहीं तोड़ा जा सकता। इस कदम का उद्देश्य पेंशन योगदान दरों में वृद्धि को रोकना और भविष्य में पेंशन स्तर को गिरने से बचाना है, जो वर्तमान जनसांख्यिकीय रुझानों के तहत अपरिहार्य माना जा रहा था।
आयोग का सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीडन की 'प्रीमियम पेंशन' की तर्ज पर एक अनिवार्य पूंजी-आधारित अतिरिक्त पेंशन स्तंभ की शुरुआत है। इसमें कर्मचारियों और नियोक्ताओं से सकल वेतन का दो प्रतिशत अतिरिक्त योगदान लिया जाएगा, जिससे सालाना 40 अरब यूरो से अधिक का कोष जुटेगा। यह राशि शेयर बाजार में निवेश की जाएगी और सेवानिवृत्ति पर मासिक आय में तब्दील होगी। साथ ही, आयोग ने '63 पर पेंशन' जैसी शीघ्र सेवानिवृत्ति योजनाओं को सीमित करने और कार्य-जीवन को लंबा करने के उपायों की सिफारिश की है, हालांकि मेर्ज ने स्पष्ट किया कि मौजूदा पेंशन भुगतान में कोई कटौती नहीं होगी।
प्रस्तावों पर जर्मन उद्योग जगत में गहरा मतभेद उभरा है। बीडीआई (उद्योग महासंघ) और वीडीएमए (मशीनरी निर्माता) जैसे संगठनों ने इस 'साहसिक' सुधार का स्वागत किया है, जबकि नियोक्ता संघ बीडीए और बीमा उद्योग ने अनिवार्य राज्य-संचालित पूंजी पेंशन का कड़ा विरोध किया है। बीडीए अध्यक्ष राइनर डुल्गर ने इसे 'व्यवसायों और कर्मचारियों पर भारी अतिरिक्त बोझ' बताया, जो जर्मनी को एक आर्थिक स्थल के रूप में कमजोर करेगा। वहीं, युवा संगठन जूनी यूनियन के प्रमुख जोहान्स विंकेल ने इसे सरकार के लिए 'अंडरव मोमेंट' करार दिया—एक ऐसा जोकर दांव जो सुस्त पड़ी सरकार को पुनर्जीवित कर सकता है।
वैश्विक संदर्भ में, यह सुधार उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक केस स्टडी बन सकता है जो पे-एज़-यू-गो पेंशन प्रणालियों के दबाव से जूझ रही हैं। ब्राज़ील में, निजी पेंशन फंड और सरकारी बॉन्ड 'रेंडा+' के संयोजन की सलाह दी जा रही है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में 42 वर्षीय निवेशकों को केवल सुपरएनुएशन पर निर्भर न रहने की हिदायत दी जाती है। भारत जैसे युवा लेकिन तेज़ी से वृद्ध हो रहे देश के लिए, जहाँ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) का मिश्रण मौजूद है, जर्मनी का अनिवार्य पूंजी-बाजार-लिंक्ड मॉडल एक दिलचस्प नीतिगत विकल्प प्रस्तुत करता है, हालांकि इसकी राजनीतिक स्वीकार्यता और वित्तीय साक्षरता की चुनौतियाँ अलग हैं।
अगला कदम संसदीय प्रक्रिया है, जहाँ गठबंधन सहयोगियों और विपक्ष के बीच बातचीत होगी। मंत्री बास ने कहा कि 'अंतिम निर्णय संसद का होगा', लेकिन सरकार इस पैकेज को इसी सत्र में पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग की सिफारिशों पर विस्तृत बहस और संभावित संशोधनों पर नज़र रखनी होगी, खासकर पूंजी पेंशन के अनिवार्य स्वरूप और योगदान दर को लेकर।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जर्मन मीडिया पेंशन सुधार को एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में पेश करता है: आयोग स्वीडिश मॉडल पर आधारित पूंजीकृत स्तंभ, सेवानिवृत्ति आयु 70 वर्ष करने और मिनीजॉब समाप्त करने की सिफारिश करता है। चांसलर मेर्ज़ ने यूनियनों और नियोक्ताओं के कड़े विरोध के बावजूद पूरा पैकेज लागू करने का वादा किया।
जर्मन सुधार की कोई चर्चा नहीं है; इसके बजाय, एक ब्राज़ीलियाई रेडियो कार्यक्रम में यह चर्चा होती है कि सेवानिवृत्ति के लिए निजी पेंशन फंड या सरकारी बॉन्ड बेहतर है या नहीं, जिसमें दीर्घकालिक कर लाभों पर जोर दिया जाता है। मुद्दे को जर्मन राजनीति से अलग, एक व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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