
अमेरिका-जापान में जुलाई से वीज़ा नियमों में बड़ा बदलाव: प्रीमियम सेवा से लेकर पाँच गुना तक शुल्क वृद्धि
एक ओर अमेरिका B1/B2 वीज़ा आवेदकों के लिए त्वरित साक्षात्कार का वैकल्पिक प्रीमियम विकल्प ला रहा है, वहीं जापान 48 साल बाद वीज़ा शुल्क में पाँच गुना तक की बढ़ोतरी कर रहा है।
जुलाई 2026 से दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—अमेरिका और जापान—की वीज़ा नीतियों में अलग-अलग लेकिन अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के एक पायलट कार्यक्रम के तहत, पर्यटन और व्यावसायिक (B1/B2) वीज़ा के आवेदक 750 डॉलर (क़रीब 62,000 रुपये) का अतिरिक्त शुल्क देकर 10 दिनों के भीतर कांसुलर साक्षात्कार की सुविधा पा सकेंगे। यह राशि मौजूदा 185 डॉलर के आवेदन शुल्क से अलग होगी। वहीं, जापानी कैबिनेट ने 1978 के बाद पहली बार वीज़ा शुल्क में संशोधन करते हुए सिंगल-एंट्री वीज़ा की लागत 3,000 येन (लगभग 1,650 रुपये) से बढ़ाकर 15,000 येन (लगभग 8,250 रुपये) और मल्टीपल-एंट्री का शुल्क 6,000 येन से बढ़ाकर 30,000 येन कर दिया है।
अमेरिकी पहल को लेकर एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन द्वारा आव्रजन प्रक्रियाओं को सख़्त किए जाने के बाद दुनियाभर के वाणिज्य दूतावासों में साक्षात्कार की प्रतीक्षा अवधि में भारी इज़ाफ़ा हुआ है। अतिरिक्त जाँच, कुछ देशों से वित्तीय गारंटी की माँग और व्यक्तिगत जानकारी के विस्तार जैसे कदमों से प्रशासनिक बोझ बढ़ा, जिसके चलते आवेदकों की शिकायतें बढ़ीं। विदेश विभाग ने साफ़ किया है कि प्रीमियम भुगतान वीज़ा स्वीकृति की गारंटी नहीं है, यह केवल त्वरित तारीख सुनिश्चित करता है। यह पायलट 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा, और इसके परिणामों के आधार पर इसे स्थायी या विस्तारित किया जा सकता है।
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने शुल्क वृद्धि को मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा दरों के उतार-चढ़ाव से जोड़ते हुए कहा कि पिछले 48 वर्षों की आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है। जापान सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से आवक पर्यटन पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, निवास स्थिति बदलने या उसे बढ़ाने जैसी सेवाओं की अधिकतम फ़ीस सीमा 10,000 येन से बढ़ाकर 100,000 येन और स्थायी निवास आवेदन की सीमा 10,000 येन से 300,000 येन कर दी गई है। सरकार का तर्क है कि बढ़ी हुई आय का इस्तेमाल 41.3 लाख की रिकॉर्ड विदेशी आबादी के प्रबंधन, जापानी भाषा शिक्षा कार्यक्रमों और अवैध ओवरस्टे की रोकथाम में किया जाएगा। जापानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि अमेरिका (नवीनीकरण शुल्क 420-470 डॉलर) और जर्मनी (93-98 यूरो) जैसे पश्चिमी देशों की तुलना में उनकी फ़ीस अब भी कम है।
दक्षिण एशियाई और अफ़्रीकी यात्रियों पर इन बदलावों का मिश्रित प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी प्रीमियम सेवा उन्हें जल्द साक्षात्कार का विकल्प दे सकती है, मगर अतिरिक्त लागत कई परिवारों के लिए भारी साबित हो सकती है। जापान का शुल्क ढाँचा तो पहली बार आवेदन करने वालों पर सीधा आर्थिक दबाव डालेगा, विशेषकर मल्टीपल-एंट्री वीज़ा के लिए 3.3 लाख रुपये तक की रकम। आगे की राह: अमेरिकी पायलट इसी वर्ष जुलाई से दिसंबर तक चलेगा, जबकि जापान की संशोधित फ़ीस 1 जुलाई 2026 या उसके बाद के आवेदनों पर स्थायी रूप से लागू होगी। दोनों ही मामलों में ग़ैर-पश्चिमी देशों के नागरिक सबसे अधिक प्रभावित समूह के रूप में उभर रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका 1 जुलाई से एक वैकल्पिक प्रीमियम सेवा शुरू कर रहा है जिसमें B1/B2 वीज़ा आवेदक अतिरिक्त शुल्क देकर साक्षात्कार प्रतीक्षा समय कम कर सकते हैं। इसे एक बहुप्रतीक्षित लाभ के रूप में पेश किया जा रहा है जो लाखों यात्रियों और व्यावसायिक आगंतुकों के लिए प्रक्रिया आसान बनाएगा।
जापान 48 वर्षों में पहली बार विदेशी नागरिकों के लिए वीज़ा शुल्क बढ़ा रहा है। 2026 जुलाई से एकल-प्रवेश शुल्क 3,000 येन से पाँच गुना बढ़कर 15,000 येन हो जाएगा। इंडोनेशियाई मीडिया इसे रुपिए में बदलकर यात्रियों को कहीं अधिक खर्च के लिए तैयार रहने की चेतावनी देता है।
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