
स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका तकनीकी वार्ता: मीनाब 168 की स्मृति में प्रतिनिधिमंडल का नाम
इस्लामाबाद एमओयू के कार्यान्वयन के लिए 21 जून को शुरू हुई बैठक, होर्मुज और लेबनान युद्धविराम सहित अहम मुद्दों पर केंद्रित।
स्विट्जरलैंड के ब्यूर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में 21 जून को ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच तकनीकी वार्ता शुरू हुई, जिसका उद्देश्य 18 जून को दूरस्थ रूप से हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) के कार्यान्वयन पर चर्चा करना है। पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका में हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता एक दिन में दो दौर में होगी—पहला मध्यस्थों के साथ और दूसरा चतुर्भुज बैठक जिसमें अमेरिकी पक्ष शामिल होगा।
ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ़ कर रहे हैं; उन्होंने प्रतिनिधिमंडल का नाम ‘मीनाब 168’ रखा है, जो 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए मीनाब शहर के 168 स्कूली बच्चों की स्मृति में है। शनिवार रात ज्यूरिख पहुंचने पर ग़ालिबाफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके सभी कार्य इन बच्चों और शहीदों की निगरानी में हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता एस्माईल बग़ाई ने जोर दिया कि अंतिम समझौता एमओयू के पांच प्रावधानों के अमल और दूसरे पक्ष के आचरण पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मूलतः 19 जून को प्रस्तावित बैठक राष्ट्रपतियों द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर के बाद रद्द कर दी गई थी; अब यह तकनीकी विमर्श है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और पूर्व राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर हैं। अमेरिकी सरकार के अनुसार, इस चरण में परमाणु ऊर्जा के मुद्दे और लेबनान में युद्धविराम को प्राथमिकता दी जाएगी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ और सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर, जिन्होंने पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में समझौता कराने में अहम भूमिका निभाई थी, मध्यस्थता जारी रखेंगे।
एमओयू के तहत ईरान ने 60 दिनों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों के सुरक्षित मार्ग का आश्वासन दिया है और ओमान के साथ मिलकर भविष्य के प्रशासन की रूपरेखा तय करेगा। हालांकि, शनिवार को लेबनान में इजरायली हमलों के बाद ईरान ने फिर से जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा की, जिससे एक आपात बैठक को कार्यसूची में शामिल किया गया। सीबीएस न्यूज़ के राजनयिक सूत्रों के अनुसार, लेबनान संकट वार्ता का पहला मुद्दा बनेगा। यह एमओयू में दर्ज “सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने” की शर्त के खिलाफ है; इजरायल और हिज़्बुल्लाह एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं।
28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध में ईरान और लेबनान में लगभग 3,900-3,900 लोगों की मौत हो चुकी है और होर्मुज बंद होने से तेल-गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी विधायकों ने समझौते की आलोचना की है, जबकि क्षेत्रीय अस्थिरता—विशेषकर लेबनान में इजरायल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष—इस प्रक्रिया पर साया डाले हुए है। मौजूदा तकनीकी वार्ता इस बात की ठोस रूपरेखा तय करेगी कि क्या 60 दिन की समय-सीमा के भीतर स्थायी शांति संभव है; अगली बैठकों की रूपरेखा वार्ता के परिणाम पर निर्भर करेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The Russian press highlights the arrival of the Iranian delegation for technical talks, emphasizing that the delegation's plane was named "Minab-168" in memory of 168 children killed in an American strike. The coverage notes the Swiss welcome and positions the talks as part of the US-Iran memorandum of understanding, while subtly reminding readers of past grievances.
The continental European press reports factually on the arrival of both delegations, noting the symbolic name "Minab 168" for the Iranian team and Vice President Vance's statement about focusing on nuclear energy and a Lebanon ceasefire. The tone is neutral, simply recording events without editorializing.
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