
ट्रंप का दावा: ईरान ने परमाणु पारदर्शिता और होर्मुज खोलने पर सहमति दी, तेहरान का खंडन
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षण और होर्मुज खोलने पर सहमत हुआ, पर तेहरान ने क्षतिग्रस्त स्थलों के निरीक्षण की सहमति से इनकार किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया और व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि ईरान ने 'अनंत काल तक' उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षण और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला रखने पर सहमति दे दी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की अवरुद्ध संपत्तियाँ अमेरिकी नियंत्रण वाले एस्क्रो खाते में रखी जाएँगी और उनका उपयोग केवल अमेरिकी किसानों से खाद्यान्न एवं चिकित्सा आपूर्ति खरीदने में होगा। ट्रंप के अनुसार, सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुज़रा, जो एक रिकॉर्ड है, और तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है। उन्होंने ईरान की स्थिति को 'मानवीय संकट' बताते हुए तत्काल सहायता की ज़रूरत पर बल दिया।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने, हालांकि, स्पष्ट किया कि तेहरान ने युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त अपने परमाणु स्थलों के निरीक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ किसी व्यवस्था पर सहमति नहीं दी है। ईरानी पक्ष के अनुसार, स्विट्ज़रलैंड में हुई वार्ता रचनात्मक रही और तकनीकी बातचीत इसी सप्ताह फिर शुरू होगी। दोनों पक्षों ने मध्यस्थता की राजनीतिक निगरानी के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने पर भी सहमति जताई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जिससे भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा सीधे जुड़ी है। ट्रंप के इस दावे कि जलडमरूमध्य खुला है और नौसैनिक नाकेबंदी फिलहाल नहीं है, से बाज़ारों की चिंता कम हुई है, लेकिन अमेरिकी सेना अपनी स्थिति में बनी हुई है और ज़रूरत पड़ने पर 30 मिनट में नाकेबंदी बहाल करने की बात कही गई है। एस्क्रो खाते वाली व्यवस्था का अर्थ है कि ईरानी तेल राजस्व सीधे अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद में जाएगा, जिससे ईरान की आर्थिक स्वायत्तता सीमित होगी और अमेरिकी किसानों को लाभ पहुँचेगा।
यह घटनाक्रम एक व्यापक सैन्य टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। ट्रंप ने 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' का हवाला देते हुए दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायु सेना और वायु रक्षा प्रणालियाँ नष्ट हो चुकी हैं। उन्होंने नाटो सहयोगियों, विशेषकर ब्रिटेन, इटली और जर्मनी की आलोचना की कि उन्होंने इस कार्रवाई में सहयोग नहीं दिया। व्हाइट हाउस के अनुसार, यदि ईरान समझौते का पालन नहीं करता या 'अनुचित व्यवहार' करता है तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा।
फिलहाल, दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास के बावजूद कूटनीतिक प्रक्रिया जारी है। तकनीकी वार्ता इस सप्ताह पुनः आरंभ होने की उम्मीद है और उच्च-स्तरीय समिति के गठन से बातचीत को राजनीतिक दिशा मिल सकती है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए होर्मुज की स्थिरता और प्रतिबंधों में संभावित ढील अहम बनी हुई है, हालाँकि एस्क्रो मॉडल भुगतान के पारंपरिक रास्तों को जटिल बना सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका ने एक निर्णायक सफलता हासिल की है: ईरान ने स्थायी, उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षणों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर पूरी तरह सहमति दे दी है, जिससे रिकॉर्ड तेल परिवहन संभव हुआ। तेहरान के इनकार और शत्रुतापूर्ण मीडिया के दुष्प्रचार अभियान के बावजूद, यह समझौता अमेरिकी ताकत को साबित करता है और दीर्घकालिक परमाणु पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
ट्रम्प ईरान को नीचा दिखाने के लिए झूठे दावे फैला रहे हैं, जैसे कि जब्त ईरानी धनराशि का उपयोग केवल अमेरिकी किसानों से भोजन खरीदने के लिए किया जाएगा और अमेरिका का हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण है। ये बयान ईरान को अधीन दिखाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे दबाव अभियान का हिस्सा हैं, जबकि तेहरान किसी भी दखलंदाजी निरीक्षण या संप्रभुता के समर्पण पर सहमति से साफ इनकार करता है। इस कथा में राष्ट्रीय अपमान और आर्थिक दबाव को उजागर किया गया है।
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