
बर्लिन के खाली मैदान में घास के नीचे दबा इतिहास: एक नाज़ी बंकर का विध्वंस और स्मृति का संघर्ष
हिटलर के शासन के अंतिम अवशेषों में से एक बंकर को लक्ज़री अपार्टमेंट के लिए गिराने की योजना ने जर्मनी में स्मृति, इतिहास और शहरी विकास पर बहस छेड़ दी है।
बर्लिन के मिट्टे इलाके में एक खाली पड़े मैदान पर घास की एक छोटी-सी पहाड़ी है, जिसके किनारे पर ईंटों से बने एक प्रवेश द्वार के अवशेष ज़मीन के नीचे उतरते हैं। यह प्रवेश द्वार उस बंकर की ओर जाता है जो कभी नाज़ी शासन की नई राइख़ चांसलरी के नीचे स्थित था। 2007 में आखिरी बार इस बंकर का दौरा करने वाले इतिहासकार और भूमिगत शोधकर्ता डीटमार आर्नोल्ड बताते हैं कि 1,200 वर्ग मीटर का यह परिसर अभी भी उल्लेखनीय रूप से अच्छी स्थिति में है, इसकी दीवारें और छत 1.7 मीटर मोटी हैं।
अब एक हैम्बर्ग निवेशक इस जगह पर 66 अपार्टमेंट वाली सात मंज़िला आवासीय इमारत और एक छह मंज़िला कार्यालय भवन बनाना चाहता है, जिसके लिए बंकर के लगभग आधे हिस्से को गिराना होगा। बर्लिन के निर्माण सीनेटर क्रिस्टियन गेबलर ने स्थानीय समाचार पत्र को बताया कि शहर आवास निर्माण के रास्ते में नहीं खड़ा होगा, सिर्फ़ एक ऐसे बंकर को बचाने के लिए जो ‘तीर्थ स्थल’ बन सकता है। बर्लिन सीनेट की भवन निदेशक पेट्रा कालफ़ेल्ड के अनुसार, विरासत प्राधिकरणों का मानना है कि बंकर को संरक्षित करना ज़रूरी नहीं, क्योंकि शहर में पहले से ही जनता के लिए खुले कई भूमिगत ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं।
लेकिन आर्नोल्ड इस योजना को ‘पूर्ण पागलपन’ कहते हैं। वे बर्लिन अंडरवर्ल्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और चाहते हैं कि होलोकॉस्ट संग्रहालय के सहयोग से इस स्थान को युद्ध की समाप्ति पर केंद्रित एक संग्रहालय और स्मारक में बदला जाए। उनका तर्क है कि जर्मनी में पहले ही बहुत सारा इतिहास—साम्यवादी और नाज़ी दोनों—नष्ट किया जा चुका है, और अपराधियों द्वारा छोड़े गए भौतिक निशानों को मिटाना जारी नहीं रखना चाहिए। बर्लिन राज्य स्मारक परिषद ने भी पिछले साल एक आंतरिक सिफ़ारिश में विध्वंस का विरोध करते हुए कहा कि नई राइख़ चांसलरी ‘द्वितीय विश्व युद्ध का नियोजन केंद्र और प्रारंभ बिंदु थी और नाज़ी शासन के विनाशकारी अंत का प्रतीक है।’
यह बंकर वह फ़्यूररबंकर नहीं है जहाँ हिटलर और ईवा ब्राउन ने 30 अप्रैल 1945 को आत्महत्या की थी—वह लगभग 100-120 मीटर दूर स्थित था और उसे जानबूझकर नष्ट कर रेत-बजरी से भर दिया गया था, ताकि वह नव-नाज़ी समूहों के लिए श्रद्धा स्थल न बन सके। लंबे समय तक उस स्थान पर कोई सूचना पट्ट भी नहीं लगी थी; 2006 में जाकर एक पैनल लगाया गया। यह सावधानी जर्मनी की उस व्यापक सांस्कृतिक कठिनाई को दर्शाती है जो नाज़ी अतीत के भौतिक अवशेषों से जुड़ी है—एक ओर स्मृति और शिक्षा का दायित्व, दूसरी ओर किसी भी प्रकार के महिमामंडन का भय।
यह विवाद सिर्फ़ एक बंकर के भविष्य का नहीं है; यह इस सवाल को छूता है कि कोई शहर अपनी सबसे अंधेरी परतों के साथ कैसे रहता है। ब्रांडेनबुर्ग गेट से दिखाई देने वाली इस खाली ज़मीन पर घास के नीचे छिपा प्रवेश द्वार अभी भी मौजूद है, और इसकी मोटी कंक्रीट की दीवारें एक ऐसे युग की गवाह हैं जिसे जर्मनी न तो पूरी तरह भूल पाया है और न ही पूरी तरह याद रखना चाहता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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बर्लिन में आखिरी बचे नाज़ी बंकर को गिराकर लक्ज़री अपार्टमेंट बनाने की योजना की कड़ी निंदा हुई है। राइख चांसलरी परिसर का हिस्सा यह बंकर तीसरे राइख के अपराधों और उसके पतन का एक अनिवार्य ऐतिहासिक गवाह माना जाता है। आलोचकों ने चेतावनी दी है कि इसका विनाश एक महत्वपूर्ण स्मारक को मिटाने के साथ-साथ एक ऐसा खालीपन पैदा करेगा जिसका फ़ायदा अतिवादी दक्षिणपंथी समूह उठा सकते हैं।
बर्लिन में एक अप्रयुक्त नाज़ी बंकर को लेकर ऐतिहासिक संरक्षण और शहरी विकास के बीच बहस छिड़ी हुई है। 2006 की शहर की मास्टर प्लान में पहले से ही इस जगह पर नए आवास बनाने की योजना थी, लेकिन स्थानीय समूह बंकर को संरक्षित करने और एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के रूप में जनता के लिए खोलने की माँग कर रहे हैं। यह विवाद अतीत को याद रखने और वर्तमान की ज़रूरतों को पूरा करने के बीच जारी तनाव को दर्शाता है।
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