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रक्षा एवं सुरक्षाबुधवार, 1 जुलाई 2026

रक्षा कूटनीति में तेज़ी: इंडोनेशिया ने तुर्किये-मलेशिया संधियों को मंज़ूरी दी, सऊदी-पाक सुरक्षा समझौता

जकार्ता में संसदीय समिति ने दो विधेयकों को मंज़ूरी देकर क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे को क़ानूनी आधार दिया, जबकि दिल्ली और रियाद में समानांतर सैन्य व सुरक्षा वार्ताएँ हुईं।

इंडोनेशिया की संसद की समिति-1 ने बुधवार को तुर्किये और मलेशिया के साथ रक्षा सहयोग समझौतों के अनुसमर्थन से जुड़े दो विधेयकों को सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे दी। इस निर्णय के बाद दोनों विधेयक अंतिम स्वीकृति के लिए संसद के पूर्ण सत्र में भेजे जाएँगे। समिति अध्यक्ष उतुत आदियांतो के अनुसार, क़ानूनी आधार मिलने के बाद ये कार्यक्रम अधिक सुगमता से चल सकेंगे। उप रक्षा मंत्री डॉनी एर्मावान ने बताया कि ये समझौते समानता, पारस्परिक लाभ और संप्रभुता के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित हैं और अब तक घरेलू क़ानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण लागू नहीं हो पाए थे।

समिति के उपाध्यक्ष डेव लैक्सोनो ने स्पष्ट किया कि तुर्किये के साथ समझौते में रणनीतिक वार्ता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा उपकरणों का संयुक्त विकास, संयुक्त सैन्य अभ्यास और मानव संसाधन आदान-प्रदान शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इंडोनेशिया को केवल विदेशी रक्षा उत्पादों का बाज़ार नहीं बनना चाहिए, बल्कि समान साझेदारी की स्थिति में रहना चाहिए। मलेशिया के साथ समझौता ज्ञापन पर अगस्त 2022 में और तुर्किये के साथ समझौते पर दिसंबर 2022 में हस्ताक्षर हुए थे। समिति ने इससे पहले जून में शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के साथ सार्वजनिक सुनवाई कर इनपुट लिए थे।

इसी दौरान नई दिल्ली में भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति की 12वीं बैठक में द्विपक्षीय सैन्य सहयोग के संपूर्ण दायरे की समीक्षा की गई। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने नियमित द्विपक्षीय अभ्यासों, प्रशिक्षण, समुद्री सहयोग और क्षमता निर्माण में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। बैठक में रक्षा उद्योग, साइबर सुरक्षा और आपदा राहत में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के तहत आतंकवाद-रोधी कार्य समूह में सक्रिय भागीदारी की सराहना की और हिंद-प्रशांत में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

रियाद में सऊदी अरब और पाकिस्तान के गृह मंत्रियों ने सुरक्षा समन्वय को मज़बूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सऊदी गृह मंत्री अब्दुलअज़ीज़ बिन सऊद ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह ज्ञापन वैज्ञानिक, प्रशिक्षण और अनुसंधान क्षेत्रों में सहयोग विकसित करेगा और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की गहराई को दर्शाता है। पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन रज़ा नक़वी के साथ बैठक में द्विपक्षीय संबंधों और साझा हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। ये सभी घटनाक्रम एक साथ हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया में सुरक्षा सहयोग के बहुस्तरीय विस्तार की ओर इशारा करते हैं, जहाँ क़ानूनी ढाँचे और संस्थागत तंत्र के ज़रिए दीर्घकालिक साझेदारियों को आकार दिया जा रहा है। इंडोनेशिया में विधेयकों पर अंतिम मतदान आगामी पूर्ण सत्र में होने की उम्मीद है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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44%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेसभारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

इंडोनेशिया की संसदीय समिति ने तुर्की और मलेशिया के साथ रक्षा समझौतों की पुष्टि करने वाले विधेयकों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। इस कदम से सैन्य सहयोग के लिए एक मजबूत कानूनी आधार मिलता है और संयुक्त कार्यक्रमों में तेजी आने की उम्मीद है। यह एशिया के भीतर अपनी सुरक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की जकार्ता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

भारत और मलेशिया ने नई दिल्ली में उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता की, जिसमें द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने आदान-प्रदान, अभ्यास और समुद्री समन्वय में स्थिर प्रगति पर ध्यान दिया। यह बैठक एशिया भर में सुरक्षा साझेदारियों के बढ़ते जाल को रेखांकित करती है।

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ओपनएआई ने अमेरिकी सरकार को 5% हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव रखा·उपग्रहों की मेगा-तारामंडल योजनाएं खगोल विज्ञान के लिए अस्तित्व का संकट, 1.7 मिलियन तक पहुंच सकता है आंकड़ा·संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट: AI विकास का कुछ देशों में केंद्रीकरण लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए खतरा·ऑस्ट्रिया का 96वें मिनट का नाटकीय गोल, अब स्पेन की अभेद्य दीवार से सामना·चुनावी खर्च पर ब्राजील की यथास्थिति, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का पार्टी खर्च पर नियंत्रण हटाने का निर्णय·2027 के बजट खाके: विकास लक्ष्य ऊंचे, पर राजकोषीय दबाव बरकरार·अंटार्कटिका में चार दशक बाद पहचाना गया पहला डायनासोर जीवाश्म, समुद्री संरक्षण के नए आयाम·सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संकट: दो प्रभावशाली हस्तियों ने कैंसर और ट्यूमर की जानकारी सार्वजनिक की·ओपनएआई ने अमेरिकी सरकार को 5% हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव रखा·उपग्रहों की मेगा-तारामंडल योजनाएं खगोल विज्ञान के लिए अस्तित्व का संकट, 1.7 मिलियन तक पहुंच सकता है आंकड़ा·संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट: AI विकास का कुछ देशों में केंद्रीकरण लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए खतरा·ऑस्ट्रिया का 96वें मिनट का नाटकीय गोल, अब स्पेन की अभेद्य दीवार से सामना·चुनावी खर्च पर ब्राजील की यथास्थिति, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का पार्टी खर्च पर नियंत्रण हटाने का निर्णय·2027 के बजट खाके: विकास लक्ष्य ऊंचे, पर राजकोषीय दबाव बरकरार·अंटार्कटिका में चार दशक बाद पहचाना गया पहला डायनासोर जीवाश्म, समुद्री संरक्षण के नए आयाम·सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संकट: दो प्रभावशाली हस्तियों ने कैंसर और ट्यूमर की जानकारी सार्वजनिक की·
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रक्षा कूटनीति में तेज़ी: इंडोनेशिया ने तुर्किये-मलेशिया संधियों को मंज़ूरी दी, सऊदी-पाक सुरक्षा समझौता

जकार्ता में संसदीय समिति ने दो विधेयकों को मंज़ूरी देकर क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे को क़ानूनी आधार दिया, जबकि दिल्ली और रियाद में समानांतर सैन्य व सुरक्षा वार्ताएँ हुईं।

इंडोनेशिया की संसद की समिति-1 ने बुधवार को तुर्किये और मलेशिया के साथ रक्षा सहयोग समझौतों के अनुसमर्थन से जुड़े दो विधेयकों को सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे दी। इस निर्णय के बाद दोनों विधेयक अंतिम स्वीकृति के लिए संसद के पूर्ण सत्र में भेजे जाएँगे। समिति अध्यक्ष उतुत आदियांतो के अनुसार, क़ानूनी आधार मिलने के बाद ये कार्यक्रम अधिक सुगमता से चल सकेंगे। उप रक्षा मंत्री डॉनी एर्मावान ने बताया कि ये समझौते समानता, पारस्परिक लाभ और संप्रभुता के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित हैं और अब तक घरेलू क़ानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण लागू नहीं हो पाए थे।

समिति के उपाध्यक्ष डेव लैक्सोनो ने स्पष्ट किया कि तुर्किये के साथ समझौते में रणनीतिक वार्ता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा उपकरणों का संयुक्त विकास, संयुक्त सैन्य अभ्यास और मानव संसाधन आदान-प्रदान शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इंडोनेशिया को केवल विदेशी रक्षा उत्पादों का बाज़ार नहीं बनना चाहिए, बल्कि समान साझेदारी की स्थिति में रहना चाहिए। मलेशिया के साथ समझौता ज्ञापन पर अगस्त 2022 में और तुर्किये के साथ समझौते पर दिसंबर 2022 में हस्ताक्षर हुए थे। समिति ने इससे पहले जून में शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के साथ सार्वजनिक सुनवाई कर इनपुट लिए थे।

इसी दौरान नई दिल्ली में भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति की 12वीं बैठक में द्विपक्षीय सैन्य सहयोग के संपूर्ण दायरे की समीक्षा की गई। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने नियमित द्विपक्षीय अभ्यासों, प्रशिक्षण, समुद्री सहयोग और क्षमता निर्माण में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। बैठक में रक्षा उद्योग, साइबर सुरक्षा और आपदा राहत में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के तहत आतंकवाद-रोधी कार्य समूह में सक्रिय भागीदारी की सराहना की और हिंद-प्रशांत में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

रियाद में सऊदी अरब और पाकिस्तान के गृह मंत्रियों ने सुरक्षा समन्वय को मज़बूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सऊदी गृह मंत्री अब्दुलअज़ीज़ बिन सऊद ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह ज्ञापन वैज्ञानिक, प्रशिक्षण और अनुसंधान क्षेत्रों में सहयोग विकसित करेगा और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की गहराई को दर्शाता है। पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन रज़ा नक़वी के साथ बैठक में द्विपक्षीय संबंधों और साझा हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। ये सभी घटनाक्रम एक साथ हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया में सुरक्षा सहयोग के बहुस्तरीय विस्तार की ओर इशारा करते हैं, जहाँ क़ानूनी ढाँचे और संस्थागत तंत्र के ज़रिए दीर्घकालिक साझेदारियों को आकार दिया जा रहा है। इंडोनेशिया में विधेयकों पर अंतिम मतदान आगामी पूर्ण सत्र में होने की उम्मीद है।

स्रोतों में मतभेद

रक्षा एवं सुरक्षा · 4 स्रोत · 3 भाषाएँ

44%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक67%
न्यूनत्र33%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेसभारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

इंडोनेशिया की संसदीय समिति ने तुर्की और मलेशिया के साथ रक्षा समझौतों की पुष्टि करने वाले विधेयकों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। इस कदम से सैन्य सहयोग के लिए एक मजबूत कानूनी आधार मिलता है और संयुक्त कार्यक्रमों में तेजी आने की उम्मीद है। यह एशिया के भीतर अपनी सुरक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की जकार्ता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

भारत और मलेशिया ने नई दिल्ली में उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता की, जिसमें द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने आदान-प्रदान, अभ्यास और समुद्री समन्वय में स्थिर प्रगति पर ध्यान दिया। यह बैठक एशिया भर में सुरक्षा साझेदारियों के बढ़ते जाल को रेखांकित करती है।

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